बैक स्टेज सिवलिंग्स की प्रस्तुति ने बांधा समां:प्राची और राघव की आवाज का जादू छाया,सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हुआ समापन

Nov 03, 2026 - 05:19
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बैक स्टेज सिवलिंग्स की प्रस्तुति ने बांधा समां:प्राची और राघव की आवाज का जादू छाया,सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हुआ समापन
ब्रजरज उत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अंतिम बेला में सोमवार देर शाम को बैक स्टेज सिवलिंग्स के प्राची और राघव की आवाज का जादू छाया। कलात्मक अभिव्यक्ति, संगीत और मंचीय प्रस्तुति के अनूठे संगम से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इधर, दुकानदारों एवं शिल्पकारों की मांग पर ब्रजरज उत्सव को तीन दिन के लिए और बढ़ा दिया गया है। प्रदर्शनी,फूड,हस्तशिल्प के स्टॉल 5 नवंबर तक लगेंगे परिषद के डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र ने बताया कि धौली प्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड पर आयोजित उत्सव में अब प्रदर्शनी, फूड कोर्ट, हस्तशिल्प एवं उत्पादों के स्टॉल 5 नवंबर तक संचालित होंगे। धनतेरस और दीपावली पर्व को देखते हुए दुकानदारों एवं शिल्पकारों ने मेले की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया था। केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। उत्सव में लगी हैं 150 दुकान डिप्टी सीईओ ने बताया कि 23 अक्टूबर से आयोजित ब्रज रज उत्सव के बाजार में 150 दुकानें लगाई गई हैं। इनमें देश के विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधान, खानपान और स्थानीय उत्पादों को स्थान दिया गया है। हिमाचल, कश्मीर, त्रिपुरा, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक सहित कई राज्यों के कारीगरों एवं उद्यमियों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। बाजार में उत्तर प्रदेश के एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत तैयार उत्पादों के साथ स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुएं भी आकर्षण का केंद्र रहीं। लोकल फॉर वोकल को मिला मंच मेले में बाजार के माध्यम से सरकार की 'लोकल फॉर वोकल' और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल को भी मंच मिला। स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री का अवसर मिला। दीपावली के मद्देनजर हस्तनिर्मित वस्तुओं, पारंपरिक उत्पादों और स्वदेशी सामान की खरीदारी के लिए भी लोगों को एक ही परिसर में विविध विकल्प उपलब्ध कराए गए। उत्सव में ब्रज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के साथ लोककलाओं, संगीत और साहित्य को मंच मिला। स्थानीय लोक कलाकारों और स्ट्रीट परफॉर्मर्स ने भी अपनी प्रतिभा दिखाई। गोकुल गांव की थीम, सेल्फी प्वाइंट, झूले, खादी के आधुनिक परिधान, सांझी कला और चित्रांकन दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे।

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