रामगढ़ताल में चलेगी फेरी:किराया देकर एक किनारे से दूसरे किनारे जा सकेंगे पर्यटक
रामगढ़ताल में बोटिंग के साथ ही अब वाटर टैक्सी भी चलेगी। इसमें बैठकर लोग ताल में एक किनारे से दूसरे किनाने जा सकेंगे। किराया 50 रुपये होगा। इसके लिए ताल में दो फ्लोटिंग जेटी भी बनाई जाएगी। वाटर टैक्सी फेरी के रूप में चलेगी। रात में इसमें पार्टियां हो सकेंगी। यह फेरी आधुनिक कैटामरैन फेरी बोट होगी। फेरी का संचालन करने वाली फर्म को वर्क आर्डर दिया जा चुका है।
जीडीए के मुख्य अभियंता किशन सिंह ने बताया कि परियोजना के लिए परिवहन विभाग की ओर से जीएसटी सहित 3.06 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिली है। इसके तहत एक फेरी बोट और दो फ्लोटिंग जेटी का निर्माण कराया जाएगा। फेरी का निर्माण गोरखपुर में ही तकनीकी विशेषज्ञों और कुशल कारीगरों की मदद से किया जाएगा। फर्म का लक्ष्य करीब तीन माह में इसका संचालन शुरू करने का है, जबकि कार्ययोजना के अनुसार 6 माह में निर्माण और संचालन की प्रक्रिया पूरी की जानी है। एसी केबिन में सफर, खाने-पीने की भी सुविधा फेरी की खासियत यह होगी कि यह पूरी तरह वातानुकूलित होगी। कैटामरैन डिजाइन पर बनने वाली इस बोट में एक साथ 50 यात्री सफर कर सकेंगे। यात्रियों के लिए आरामदायक बैठने की व्यवस्था के साथ फूड और बेवरेजेज की सुविधा भी होगी। फेरी का संचालन सुबह से शाम तक निर्धारित रूट पर किया जाएगा। शाम को इसका इस्तेमाल निजी आयोजनों के लिए भी किया जा सकेगा। इससे परिवारों और पर्यटकों को ताल के बीच अलग तरह का अनुभव मिलेगा।
फेरी के संचालन के लिए कन्वेंशन सेंटर के सामने और आरकेबीके पुल के पास फ्लोटिंग जेटी बनाई जाएंगी। इन पर प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, किचन, फूड प्रिपरेशन एरिया और शौचालय जैसी सुविधाएं विकसित होंगी। फेरी नौका विहार फेज-1, कन्वेंशन सेंटर, आरकेबीके, सहारा एस्टेट, चिड़ियाघर और नौका विहार फेज-2 होते हुए वापस अपने शुरुआती स्थान पर पहुंचेगी। इससे पर्यटकों को सड़क मार्ग से घूमने के बजाय ताल के रास्ते प्रमुख स्थलों तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा। ताल की स्वच्छता और रोजगार पर भी जोर
मुख्य अभियंता के अनुसार, फेरी और जेटी के संचालन में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाएगा। जीरो वेस्ट डिस्पोजल व्यवस्था लागू होगी। फेरी से निकलने वाले कचरे का संग्रह, पृथक्करण और अधिकृत माध्यम से निस्तारण कराया जाएगा। ताल में कोई गंदगी नहीं जाएगी। चयनित फर्म को 10 वर्ष तक संचालन की अनुमति दी जाएगी। निर्धारित मानकों का पालन करने पर इसे पांच वर्ष और बढ़ाया जा सकेगा। परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और तकनीकी कौशल को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रामगढ़ताल में जल्द चलेगी फेरी जीडीए के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने कहा कि रामगढ़ताल को पर्यटन के साथ-साथ जल परिवहन के एक नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम उठाया गया है। इसके लिए ताल में फेरी चलाई जाएगी। इससे ताल के एक किनारे से दूसरे किनारे तक जाने में आसानी होगी।
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