बंगाल में बरुईपुर दुष्कर्म-हत्या का आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में बारह वर्षीय बालिका से दुष्कर्म और हत्या के मुख्य आरोपी प्रभास मंडल की पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु हो गई। पुलिस का दावा है कि घटनास्थल पर पुनर्निर्माण के दौरान आरोपी ने पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर गोली चलाई थी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई। मामले की जांच विशेष जांच दल द्वारा जारी है।

बंगाल में बरुईपुर दुष्कर्म-हत्या का आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 8 जुलाई 2026

पश्चिम बंगाल के दक्षिण चौबीस परगना जिले के बरुईपुर में बारह वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी प्रभास मंडल की मुठभेड़ में मौत हो गई। दावा किया गया कि घटनास्थल का पुनर्निर्माण कराते समय आरोपी ने पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर गोली चला दी, जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। घायल आरोपी को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।


बरुईपुर दुष्कर्म-हत्या के मुख्य आरोपी की पुलिस मुठभेड़ में मौत

पश्चिम बंगाल के दक्षिण चौबीस परगना जिले के बरुईपुर में बारह वर्षीय बालिका के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। इस जघन्य अपराध के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही थी। इसी बीच पुलिस ने जानकारी दी कि मामले का मुख्य आरोपी प्रभास मंडल मुठभेड़ में मारा गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को घटनास्थल पर ले जाकर अपराध का पुनर्निर्माण कराया जा रहा था, तभी उसने पुलिस दल पर हमला कर दिया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।


घटनास्थल का पुनर्निर्माण कराने पहुंची थी पुलिस टीम

पुलिस के अनुसार आठ जुलाई की देर रात लगभग बारह बजकर पैंतालीस मिनट पर जांच अधिकारी अपनी टीम और मुख्य आरोपी प्रभास मंडल को लेकर बरुईपुर थाने से रवाना हुए। आरोपी को सूर्यापुर स्थित उस स्थान पर ले जाया गया, जहां इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया था। जांच दल का उद्देश्य आरोपी से पूरे घटनाक्रम को दोबारा समझना, अपराध के तरीके की पुष्टि करना तथा उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान करना था। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे, क्योंकि आरोपी पहले से गंभीर अपराध में गिरफ्तार था।


अचानक पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर चला दी गोली

पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल पर पहुंचने के कुछ ही समय बाद आरोपी ने अचानक एक पुलिसकर्मी का सरकारी हथियार छीन लिया। इसके बाद उसने पुलिस दल की ओर एक गोली चलाई, जिससे वहां मौजूद अधिकारी और पुलिसकर्मी सतर्क हो गए। आरोपी ने गोली चलाने के बाद मौके से भागने का प्रयास भी किया। अचानक हुई इस घटना से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पुलिस ने आरोपी को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई शुरू की।


आत्मरक्षा में पुलिस ने की जवाबी कार्रवाई

पुलिस का कहना है कि आरोपी द्वारा गोली चलाए जाने के बाद पुलिस दल के सामने आत्मरक्षा के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। कानून व्यवस्था बनाए रखने और आरोपी को भागने से रोकने के उद्देश्य से जवाबी गोली चलाई गई। इस कार्रवाई में चली गोली आरोपी प्रभास मंडल को लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस ने बिना समय गंवाए उसे तत्काल बरुईपुर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच भी प्रारंभ कर दी गई है।


चार जुलाई को लापता हुई थी मासूम बालिका

मृतक बालिका चार जुलाई की शाम लगभग छह बजे अपने घर से लापता हो गई थी। जब काफी देर तक वह घर वापस नहीं लौटी तो परिजनों ने आसपास उसकी तलाश शुरू की। देर रात तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। अगले दिन बरुईपुर के एक तालाब से बालिका का शव बरामद हुआ। शव मिलने के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश फैल गया तथा लोगों ने दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।


दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका से मचा था हड़कंप

प्रारंभिक जांच में पुलिस को ऐसे कई संकेत मिले, जिनसे बालिका के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने की आशंका मजबूत हुई। चिकित्सकीय परीक्षण और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्यभर में इसकी व्यापक चर्चा हुई। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग करते हुए प्रदर्शन भी किए।


विशेष जांच दल का किया गया गठन

घटना के बाद मामले की निष्पक्ष और तेज जांच सुनिश्चित करने के लिए राज्य प्रशासन ने विशेष जांच दल का गठन किया। इस दल में अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया, जिन्होंने घटनास्थल का कई बार निरीक्षण किया। जांच दल ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए, आसपास लगे निगरानी उपकरणों के दृश्य एकत्र किए और तकनीकी साक्ष्यों का भी गहन विश्लेषण किया। पुलिस का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अपराध के पूरे षड्यंत्र का खुलासा करना भी है।


तीनों आरोपियों के विरुद्ध जुटाए गए अहम साक्ष्य

जांच के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के साथ-साथ उनके चल दूरभाष, संपर्कों और गतिविधियों की भी जांच की गई। पुलिस को कई ऐसे साक्ष्य मिले, जिन्होंने आरोपियों की गतिविधियों को घटना के समय और स्थान से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अधिकारियों का कहना है कि इन साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां स्पष्ट होती चली गईं और जांच को निर्णायक दिशा मिली।


डिजिटल साक्ष्यों ने खोले कई महत्वपूर्ण राज

विशेष जांच दल को जांच के दौरान महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य प्राप्त हुए। आरोपियों के चल दूरभाष से प्राप्त तकनीकी जानकारी के अनुसार चार जुलाई की शाम लगभग साढ़े चार बजे से रात ग्यारह बजे तक तीनों आरोपियों की स्थिति एक ही क्षेत्र में दर्ज हुई। यह समय उसी अवधि से मेल खाता है, जब बालिका के साथ अपराध किए जाने की आशंका व्यक्त की गई है। पुलिस का मानना है कि यह तकनीकी जानकारी जांच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुई और इससे यह संकेत भी मिला कि अपराध की योजना पहले से बनाई गई थी।


पुलिस ने क्या कहा

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी को घटनास्थल पर अपराध का पुनर्निर्माण कराने के लिए ले जाया गया था। इसी दौरान उसने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीन लिया और पुलिस दल पर गोली चला दी। आत्मरक्षा तथा आरोपी को भागने से रोकने के लिए जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें आरोपी घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच कराई जाएगी और सभी तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा की जाएगी।


मामले ने फिर पकड़ा तूल

मुख्य आरोपी की मुठभेड़ में हुई मौत के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच भी की जा रही है। उधर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग पहले की तरह जारी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि विशेष जांच दल शेष आरोपियों के विरुद्ध कितनी शीघ्र आरोपपत्र प्रस्तुत करता है और न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।