अमेरिकी हमले से शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 364 अंक टूटा
अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स तीन सौ चौंसठ अंक और निफ्टी एक सौ उनतालीस अंक की कमजोरी के साथ खुले। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी दबाव बना रहा, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।
दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 8 जुलाई 2026
अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव फिर से गहरा गया है। इसका सीधा असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर दिखाई दिया और भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा। बुधवार को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई, जहां सेंसेक्स तीन सौ चौंसठ अंक टूट गया, जबकि निफ्टी भी एक सौ उनतालीस अंकों की कमजोरी के साथ खुला। बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
लाल निशान के साथ खुला भारतीय शेयर बाजार, निवेशकों में बढ़ी चिंता
बुधवार सुबह भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत निराशाजनक रही। बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स तीन सौ चौंसठ अंकों की गिरावट के साथ सतहत्तर हजार आठ सौ सोलह अंक पर खुला। वहीं राष्ट्रीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक निफ्टी एक सौ उनतालीस अंक फिसलकर चौबीस हजार दो सौ उनसठ के स्तर पर कारोबार शुरू करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार के दौरान अधिकांश क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दिया, जिससे बाजार का वातावरण पूरी तरह नकारात्मक बना रहा। निवेशकों ने नए निवेश की बजाय सतर्क रुख अपनाया और कई लोगों ने जोखिम कम करने के उद्देश्य से अपने निवेश में कटौती की।
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने बढ़ाई वैश्विक बाजारों की बेचैनी
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजार में आई गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर की गई हवाई कार्रवाई है। इस घटना के बाद पश्चिम एशिया में तनाव अचानक बढ़ गया है और दुनिया भर के निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध या सैन्य संघर्ष जैसी स्थिति बनती है, तो उसका सबसे पहले असर वित्तीय बाजारों पर दिखाई देता है। निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे शेयर बाजारों में बिकवाली तेज हो जाती है।
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने दिखाई मजबूती, कई बड़े शेयरों पर बिकवाली
बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़ी कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इस क्षेत्र में सीमित खरीदारी होने के कारण नुकसान अपेक्षाकृत कम रहा। दूसरी ओर ऊर्जा, बंदरगाह, खुदरा व्यापार और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक फिलहाल जोखिम वाले क्षेत्रों से दूरी बना रहे हैं और सुरक्षित निवेश की रणनीति अपना रहे हैं।
एशिया के प्रमुख बाजारों में भी गिरावट का माहौल
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का प्रभाव केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। जापान, दक्षिण कोरिया, हांगकांग और चीन के प्रमुख शेयर बाजारों में भी कारोबार गिरावट के साथ शुरू हुआ। इन देशों के निवेशकों ने भी बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव को देखते हुए सतर्कता दिखाई और बड़े स्तर पर बिकवाली की। पूरे एशियाई क्षेत्र में कमजोर कारोबार यह संकेत देता है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा फिलहाल डगमगाया हुआ है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं, तो आने वाले दिनों में बाजारों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी बाजारों से भी मिले कमजोर संकेत
अमेरिका के प्रमुख शेयर बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के अलावा प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इसका असर वैश्विक निवेशकों के भरोसे पर पड़ा और अमेरिकी बाजारों से एशियाई बाजारों को भी कमजोर संकेत मिले। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल, महंगाई बढ़ने की आशंका
पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में वहां किसी भी प्रकार का तनाव कच्चे तेल की कीमतों को सीधे प्रभावित करता है। पिछले दो दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक बैरल कच्चे तेल की कीमत छिहत्तर डॉलर के पार पहुंच गई है। यदि यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों में ईंधन महंगा हो सकता है। इससे परिवहन खर्च बढ़ेगा और महंगाई पर भी दबाव देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी मुद्रा में मजबूती, सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा रुझान
वैश्विक संकट के समय निवेशक आमतौर पर सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों और मुद्राओं की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि अमेरिकी मुद्रा में भी मजबूती दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो अमेरिकी मुद्रा और मजबूत हो सकती है। इसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर भी पड़ेगा और विदेशी निवेश के प्रवाह में कमी आ सकती है। भारतीय मुद्रा पर भी इसका दबाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है आगे की राह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में निवेशकों को भावनाओं में आकर कोई बड़ा निर्णय नहीं लेना चाहिए। वैश्विक घटनाक्रमों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए और घबराहट में निवेश बेचने से बचना चाहिए। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के हालात और विदेशी बाजारों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखना आवश्यक होगा। आने वाले दिनों में इन्हीं कारकों के आधार पर भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय होगी।
आने वाले दिनों में बाजार पर रहेगी इन कारणों की नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है तो बाजार में तेजी लौट सकती है। लेकिन यदि संघर्ष और बढ़ता है, तो वैश्विक निवेशकों की चिंता भी बढ़ेगी और शेयर बाजारों में दबाव बना रहेगा। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, अमेरिकी मुद्रा की चाल और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़े भी भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।