फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत ने किया रुख साफ, इंडोनेशिया में पीएम मोदी
इंडोनेशिया की दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिलिस्तीन-इजरायल विवाद पर भारत की लंबे समय से चली आ रही नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है और अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद तथा कूटनीति को सबसे प्रभावी माध्यम मानता है।
दि राइजिंग न्यूज़ | जकार्ता | 7 जुलाई 2026
इंडोनेशिया की दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंच से फिलिस्तीन-इजरायल विवाद पर भारत की स्पष्ट और पारंपरिक विदेश नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से दो-राष्ट्र समाधान का समर्थक रहा है और उसका मानना है कि स्थायी शांति केवल बातचीत, आपसी विश्वास और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही स्थापित की जा सकती है। प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में विश्व अनेक संघर्षों और अस्थिरताओं का सामना कर रहा है। ऐसे दौर में किसी भी विवाद का समाधान सैन्य टकराव के बजाय संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है और भविष्य में भी इसी नीति पर आगे बढ़ेगा।
दो-राष्ट्र समाधान के प्रति भारत ने दोहराया समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि फिलिस्तीन-इजरायल विवाद के समाधान के लिए भारत दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच स्थायी शांति स्थापित करने के लिए आपसी संवाद और कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना आवश्यक है। भारत का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान केवल शांतिपूर्ण वार्ता से ही संभव है।उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष का प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की शांति, सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था पर भी पड़ता है। इसलिए सभी देशों को मिलकर शांति स्थापित करने के प्रयास करने चाहिए।
विश्व समुदाय से संवाद बढ़ाने की अपील
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वैश्विक विवादों के समाधान के लिए संवाद को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में कूटनीति की भूमिका पहले की तुलना में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संघर्ष की स्थिति को बातचीत के माध्यम से समाप्त करना ही विश्व हित में होगा।प्रधानमंत्री के इस बयान को भारत की विदेश नीति की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की वकालत करता रहा है तथा दोनों पक्षों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति अपनाता रहा है।
इंडोनेशिया यात्रा का विशेष महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय यात्रा पर इंडोनेशिया पहुंचे हैं, जहां उनका आधिकारिक स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न द्विपक्षीय विषयों पर चर्चा हुई। भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को आर्थिक, सामरिक, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है।इस दौरान भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री का स्वागत किया। यात्रा के विभिन्न कार्यक्रमों में दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा दे सकती है।
भारत की विदेश नीति की निरंतरता
भारत लंबे समय से इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ अपने संबंधों को संतुलित बनाए रखने की नीति पर चलता रहा है। एक ओर भारत इजरायल के साथ रणनीतिक और तकनीकी सहयोग बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर फिलिस्तीन के वैध अधिकारों और शांतिपूर्ण समाधान के समर्थन की नीति भी जारी रखे हुए है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ताजा बयान इसी स्थापित विदेश नीति का विस्तार माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी विवाद के समाधान के लिए बातचीत, आपसी सम्मान और कूटनीतिक प्रयासों को सबसे प्रभावी माध्यम मानता है।