कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस विलय की खबरों को बताया बेबुनियाद

कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस के साथ विलय की अटकलों को खारिज कर दिया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ममता बनर्जी और कांग्रेस नेताओं की बैठक में सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस विलय की खबरों को बताया बेबुनियाद

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 12 जून 2026

कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस के साथ संभावित विलय की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इन चर्चाओं को बेबुनियाद अफवाह बताया और कहा कि दोनों दलों के नेताओं के बीच हुई बैठक में विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई थी।उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस नेताओं के बीच बैठक का उद्देश्य केवल राष्ट्रीय मुद्दों को मजबूती से उठाने और विपक्षी एकजुटता को लेकर चर्चा करना था।

कांग्रेस बोली विलय की खबरें गलत

केसी वेणुगोपाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के साथ हुई बैठक को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि बातचीत केवल देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित थी। तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के विलय जैसी कोई बात बैठक में नहीं हुई।

ममता और सोनिया राहुल की मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा

दरअसल, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने के बाद दोनों दलों के बीच नजदीकियों की चर्चा तेज हुई थी।इसके बाद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी से अलग-अलग मुलाकात की थी।इन मुलाकातों के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या दोनों दलों के बीच कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव होने वाला है।

इंडिया गठबंधन को लेकर बदला ममता का रुख

ममता बनर्जी आमतौर पर इंडिया गठबंधन की बैठकों में सीमित रूप से शामिल होती रही हैं। कई मौकों पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता बैठकों में हिस्सा लेते रहे हैं।उन्होंने विपक्षी गठबंधन की शुरुआती बैठकों में भी कई बार दूरी बनाई थी। ऐसे में हाल की बैठकों में उनकी सक्रिय मौजूदगी को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा गया।

तृणमूल कांग्रेस ने भी विलय की खबरों को नकारा

तृणमूल कांग्रेस ने भी कांग्रेस में विलय की संभावनाओं को खारिज कर दिया है।तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय ने कहा कि कांग्रेस के साथ मिलकर काम करना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब विलय नहीं है।उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच सहयोग किस रूप में आगे बढ़ेगा, यह भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।वहीं तृणमूल कांग्रेस नेता रिताब्रता बनर्जी ने भी विलय की खबरों को गलत बताया।उन्होंने कहा कि विधायक दल कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहा है और संसद में मौजूद सांसदों के भी कांग्रेस में जाने की कोई योजना नहीं है।

ममता का कांग्रेस से पुराना राजनीतिक रिश्ता

ममता बनर्जी का कांग्रेस से पुराना रिश्ता रहा है। उन्होंने कांग्रेस में दो दशक से ज्यादा समय तक राजनीति की।1997 में पार्टी नेतृत्व से मतभेद के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी। इसके बाद 1998 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की।धीरे-धीरे तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में मजबूत राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और 2011 के विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चे की लंबे समय से चली आ रही सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया।

चुनावी हार और अंदरूनी कलह के बीच बढ़ी नजरें

फिलहाल कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने विलय की खबरों को खारिज कर दिया है। हालांकि पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रही उठापटक के बीच राजनीतिक जानकार दोनों दलों के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं। तृणमूल कांग्रेस चुनावी हार और अंदरूनी मतभेदों से जूझ रही है। ऐसे में आने वाले समय में कांग्रेस के साथ किसी बड़े राजनीतिक समझौते की संभावना को लेकर चर्चाएं जारी हैं।