सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट
आठवें वेतन आयोग के समक्ष केंद्रीय कर्मचारियों को व्यवसाय कर से पूर्ण छूट देने की मांग उठी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि विभिन्न करों का बोझ पहले से होने के कारण व्यवसाय कर समाप्त किया जाना चाहिए। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 9 जुलाई 2026
आठवें वेतन आयोग के समक्ष केंद्रीय कर्मचारियों के लिए व्यवसाय कर से पूर्ण छूट देने की मांग रखी गई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पहले से विभिन्न प्रकार के करों का भुगतान करने वाले कर्मचारियों पर यह अतिरिक्त बोझ है। यदि आयोग इस मांग को स्वीकार करता है तो लाखों कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
आठवें वेतन आयोग में कर छूट की नई मांग, केंद्रीय कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत
देशभर के केंद्रीय कर्मचारी आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन ने आयोग के समक्ष एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। इस मांग में केंद्रीय कर्मचारियों को राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले व्यवसाय कर से पूरी तरह मुक्त करने का आग्रह किया गया है। यदि इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है तो कर्मचारियों की आय पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम हो सकता है।
क्या है कर्मचारियों की नई मांग
राष्ट्रीय परिषद संयुक्त परामर्श तंत्र के कर्मचारी पक्ष ने अपने ज्ञापन में कहा है कि केंद्रीय कर्मचारियों को व्यवसाय कर से पूर्ण छूट मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि कर्मचारी पहले ही आयकर सहित अनेक प्रकार के करों का भुगतान करते हैं। इसके अतिरिक्त राज्यों द्वारा वेतन से व्यवसाय कर की कटौती कर्मचारियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ाती है। इसलिए आठवें वेतन आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशों में इस मांग को शामिल करना चाहिए।
क्या होता है व्यवसाय कर
भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७६ के अंतर्गत राज्य सरकारों को व्यवसाय कर लगाने का अधिकार प्राप्त है। प्रत्येक राज्य अपनी निर्धारित व्यवस्था के अनुसार इस कर की वसूली करता है। हालांकि इसकी अधिकतम वार्षिक सीमा ढाई हजार रुपये निर्धारित की गई है। यह कर वेतनभोगी कर्मचारियों सहित विभिन्न व्यवसायों और सेवाओं से जुड़े लोगों से लिया जाता है।
पुरानी और नई कर व्यवस्था में क्या अंतर है
जिन कर्मचारियों ने पुरानी कर व्यवस्था को अपनाया है, उन्हें वेतन से कटे व्यवसाय कर पर आयकर कानून के अंतर्गत राहत प्राप्त होती है। वहीं नई कर व्यवस्था में ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसी कारण कर्मचारी संगठनों का मानना है कि नई व्यवस्था अपनाने वाले कर्मचारियों को अधिक आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। इस असमानता को दूर करने के लिए व्यवसाय कर से पूर्ण छूट की मांग की गई है।
कर्मचारी संगठन ने क्यों उठाई यह मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि केंद्रीय कर्मचारी पहले ही अपनी आय पर कर का भुगतान करते हैं। इसके अलावा दैनिक उपयोग की वस्तुओं और सेवाओं पर भी विभिन्न प्रकार के कर चुकाने पड़ते हैं। ऐसे में राज्यों द्वारा अलग से व्यवसाय कर की वसूली उचित नहीं मानी जा सकती। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों की वास्तविक आय कम हो जाती है और घरेलू खर्चों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
राज्य सरकारें व्यवसाय कर क्यों लगाती हैं
राज्य सरकारों के पास राजस्व जुटाने के सीमित साधन होते हैं। इसी कारण वे व्यवसाय कर के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त करती हैं। इस धन का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सफाई, सड़क मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य स्थानीय विकास कार्यों में किया जाता है। यह राशि स्थानीय निकायों और नगर प्रशासन के विकास कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
आठवें वेतन आयोग से कर्मचारियों को क्या उम्मीद है
केंद्रीय कर्मचारियों को उम्मीद है कि आठवां वेतन आयोग वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं के साथ-साथ कर संबंधी राहत पर भी सकारात्मक विचार करेगा। यदि व्यवसाय कर से छूट की सिफारिश की जाती है और उसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो लाखों कर्मचारियों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों और सरकार की स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होगा।