एफसीआई का मिशन साइलो शुरू, अनाज की बर्बादी रोकने की बड़ी तैयारी

भारतीय खाद्य निगम ने देशभर में आधुनिक स्टील साइलो विकसित करने के लिए मिशन साइलो को गति दी है। 249 स्थानों पर 108 लाख मीट्रिक टन से अधिक भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। अत्याधुनिक तकनीक से लैस इन साइलो में अनाज की बर्बादी लगभग शून्य दर्ज की गई है। यह परियोजना खाद्यान्न संरक्षण, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

एफसीआई का मिशन साइलो शुरू, अनाज की बर्बादी रोकने की बड़ी तैयारी

दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 05 जून 2026

देश में हर साल लाखों टन अनाज खराब होने की समस्या से निपटने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने आधुनिक भंडारण व्यवस्था को बढ़ावा देने के तहत मिशन साइलो को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य पारंपरिक गोदामों की जगह आधुनिक स्टील साइलो स्थापित कर अनाज को सुरक्षित रखना, खाद्यान्न की बर्बादी रोकना और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाना है। भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्यान्न उत्पादक देशों में शामिल है। केंद्र सरकार हर साल करोड़ों किसानों से गेहूं और अन्य अनाज की खरीद करती है तथा 80 करोड़ से अधिक लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से राशन उपलब्ध कराती है। इसके बावजूद भंडारण की पारंपरिक व्यवस्था और रखरखाव की कमियों के कारण हर वर्ष बड़ी मात्रा में अनाज खराब हो जाता है। अनुमान है कि देश में कटाई के बाद हर साल करीब 1.2 करोड़ से 1.6 करोड़ टन अनाज बर्बाद हो जाता है। इसी चुनौती को देखते हुए भारतीय खाद्य निगम ने देशभर में आधुनिक साइलो नेटवर्क विकसित करने का अभियान शुरू किया है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े खाद्यान्न भंडारण आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है।

आधुनिक तकनीक से सुरक्षित रहेगा अनाज

पारंपरिक बोरी आधारित गोदामों में नमी, तापमान और रखरखाव की समस्याओं के कारण अनाज खराब होने का खतरा बना रहता है। वहीं आधुनिक साइलो में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इन साइलो में तापमान और नमी नियंत्रण प्रणाली, उन्नत वेंटिलेशन व्यवस्था, स्वचालित लोडिंग और अनलोडिंग सिस्टम तथा कंप्यूटर आधारित भंडारण प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। मशीन आधारित संचालन के कारण मानव हस्तक्षेप कम होता है, जिससे अनाज के टूटने, बिखरने और खराब होने की संभावना बेहद कम हो जाती है।  इस तकनीक के जरिए अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और उसकी गुणवत्ता भी बनी रहती है।

249 स्थानों पर विकसित होगा विशाल नेटवर्क

एफसीआई इस परियोजना को हब और स्पोक मॉडल के तहत लागू कर रहा है। योजना के अंतर्गत देशभर के 249 स्थानों पर आधुनिक साइलो विकसित किए जा रहे हैं। परियोजना का लक्ष्य 108 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद्यान्न भंडारण क्षमता विकसित करना है। यह केवल नए गोदाम बनाने की योजना नहीं है, बल्कि देश की पूरी खाद्यान्न भंडारण और वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने का प्रयास है। इससे आवश्यकता पड़ने पर देश के विभिन्न हिस्सों तक और राशन दुकानों तक अनाज को तेजी से पहुंचाना संभव होगा। साथ ही परिवहन लागत और समय में भी कमी आने की उम्मीद है।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर हो रहा काम

इस विशाल परियोजना में भारी निवेश और उन्नत तकनीक की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर लागू करने का निर्णय लिया है। वर्ष 2021 से अब तक विभिन्न चरणों में लगभग 60 लाख मीट्रिक टन क्षमता के साइलो निर्माण के लिए टेंडर आवंटित किए जा चुके हैं। कई निजी कंपनियों ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में भाग लेकर परियोजनाएं हासिल की हैं। सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक तरीके से संचालित की गई है, जिससे किसी एक कंपनी का वर्चस्व स्थापित न हो सके और परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

अनाज की बर्बादी में आई बड़ी गिरावट

एफसीआई के आंकड़ों के अनुसार पारंपरिक गोदामों में वर्ष 2023-24 के दौरान लगभग 10,348 टन अनाज खराब हुआ था। हालांकि आधुनिक भंडारण व्यवस्थाओं के विस्तार के साथ यह आंकड़ा वर्ष 2025-26 में घटकर 2,247 टन रह गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आधुनिक साइलो में संग्रहित अनाज की बर्बादी लगभग शून्य दर्ज की गई है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि नई तकनीक खाद्यान्न संरक्षण के क्षेत्र में कितना बड़ा बदलाव ला सकती है।

खाद्य सुरक्षा को मिलेगा मजबूत आधार

भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश में खाद्यान्न की बर्बादी रोकना राष्ट्रीय प्राथमिकता है। आधुनिक साइलो न केवल अनाज को सुरक्षित रखने में मदद करेंगे, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाएंगे। इस योजना से किसानों को बेहतर भंडारण व्यवस्था का लाभ मिलेगा, सरकार को नुकसान कम होगा और जरूरतमंद लोगों तक गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न समय पर पहुंच सकेगा।

देश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मिशन साइलो

भारत में खाद्यान्न उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन भंडारण क्षमता और तकनीकी संसाधनों की कमी लंबे समय से चुनौती बनी हुई थी। ऐसे में मिशन साइलो को खाद्यान्न प्रबंधन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। यदि परियोजना अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुसार पूरी होती है तो आने वाले वर्षों में देश में अनाज की बर्बादी में भारी कमी आएगी और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। यही कारण है कि विशेषज्ञ इस योजना को भारत के खाद्यान्न प्रबंधन क्षेत्र में गेम चेंजर मान रहे हैं।