एचडीएफसी बैंक में बड़ा बदलाव! पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार बने नए चेयरमैन

एचडीएफसी बैंक ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्षों के लिए नया अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त किया है। जानिए उनका पूरा प्रशासनिक अनुभव, नियुक्ति की प्रक्रिया और बैंक के लिए इसका क्या महत्व है।

एचडीएफसी बैंक में बड़ा बदलाव! पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार बने नए चेयरमैन

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 30 जून 2026


एचडीएफसी बैंक के नए चेयरमैन बने राजीव कुमार

देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक ने अपने नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को नया अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त करने का निर्णय लिया है। बैंक के निदेशक मंडल ने इस नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। उनके कार्यकाल की अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि यह नियुक्ति शेयरधारकों और भारतीय रिजर्व बैंक की अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद पूरी तरह प्रभावी होगी।


अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक की भी मिली जिम्मेदारी

राजीव कुमार को केवल चेयरमैन ही नहीं बनाया गया है, बल्कि उन्हें चार वर्षों के लिए अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। उनका कार्यकाल 30 जून 2026 से प्रभावी माना जाएगा। बैंक प्रबंधन का मानना है कि उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और वित्तीय मामलों की समझ से संस्था को मजबूत नेतृत्व मिलेगा और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलेगी।


राजीव कुमार का लंबा प्रशासनिक अनुभव

राजीव कुमार वर्ष 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्ष 2017 से 2020 के बीच उन्होंने देश के वित्त सचिव के रूप में कार्य किया। इसके अलावा वह भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल और भारतीय स्टेट बैंक के निदेशक मंडल में भी सदस्य रह चुके हैं। वित्तीय नीतियों और बैंकिंग व्यवस्था में उनका अनुभव काफी व्यापक माना जाता है।


मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में भी निभाई बड़ी भूमिका

राजीव कुमार ने भारत के पच्चीसवें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में देश की चुनावी व्यवस्था का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनाव का संचालन करने का अनुभव भी उनके नाम दर्ज है। प्रशासनिक क्षमता और निष्पक्ष कार्यशैली के कारण उन्हें देश के अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है।


बैंकिंग सुधारों में निभाई अहम भूमिका

वित्त सचिव रहते हुए राजीव कुमार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय, बैंकों के पुनर्पूंजीकरण और वित्तीय सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को लागू कराने में अहम भूमिका निभाई। सरकार की बैंकिंग नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू कराने में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। यही अनुभव अब एचडीएफसी बैंक के संचालन और रणनीतिक निर्णयों में उपयोगी माना जा रहा है।


पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे के बाद लिया गया फैसला

मार्च 2026 में बैंक के तत्कालीन चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने त्यागपत्र में नैतिक मूल्यों और कार्यप्रणाली से जुड़े कारणों का उल्लेख किया था। उनके इस्तीफे के बाद बैंक के नेतृत्व को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। अब राजीव कुमार की नियुक्ति के बाद बैंक में नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है।


बैंक को क्या होगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि राजीव कुमार के लंबे प्रशासनिक अनुभव, वित्तीय नीतियों की गहरी समझ और संस्थागत नेतृत्व क्षमता का लाभ एचडीएफसी बैंक को मिलेगा। इससे बैंक की पारदर्शिता, प्रशासनिक व्यवस्था और निवेशकों का भरोसा और मजबूत होने की संभावना है। साथ ही भविष्य की कारोबारी रणनीतियों को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।