हूती विद्रोहियों ने यमन के राष्ट्रपति भवन पर मिसाइलें दागीं:15 दिन पहले यहां हमले में 4 की मौत हुई थी; सऊदी पर भी ड्रोन अटैक

Oct 31, 2026 - 08:32
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हूती विद्रोहियों ने यमन के राष्ट्रपति भवन पर मिसाइलें दागीं:15 दिन पहले यहां हमले में 4 की मौत हुई थी; सऊदी पर भी ड्रोन अटैक
यमन के हूती विद्रोहियों ने शुक्रवार को यमन के अदन में राष्ट्रपति भवन पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यहां 15 दिन पहले हुए हमले में 4 लोगों की मौत हुई थी। हूतियों ने सऊदी अरब के मदीना इलाके की ओर भी ड्रोन भेजा, जिसे सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने हवा में ही मार गिराया। यमन सरकार के एक सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने अदन एयरपोर्ट पर भी बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। हालांकि, यह साफ नहीं है कि मिसाइलें अपने निशाने पर लगीं या नहीं। अधिकारियों ने हमले में किसी के मारे जाने या घायल होने की जानकारी नहीं दी है। न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन में एंबुलेंस जाते हुए देखीं गई है। अदन शहर यमनी सरकार का मुख्य ठिकाना अदन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का मुख्य ठिकाना है। हूती विद्रोहियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद सरकार को वहां से हटना पड़ा था। जुलाई से अदन में हमले फिर तेज हुए हैं। इससे पहले 28 अक्टूबर को भी हूती विद्रोहियों ने अदन एयरपोर्ट को निशाना बनाया था। हमले से पहले संगठन ने लोगों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी थी। यह एयरपोर्ट दक्षिणी यमन में राहत और मानवीय मदद पहुंचाने का एक अहम रास्ता है। सऊदी का मक्का के पास भी ड्रोन रोकने का दावा सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने शुक्रवार को मदीना के ऊपर एक ड्रोन मार गिराने का दावा किया। इससे पहले गठबंधन ने मक्का में भी एक ड्रोन को नष्ट करने की बात कही थी। मक्का में ग्रैंड मस्जिद और काबा, जबकि मदीना में पैगंबर मोहम्मद की मस्जिद है। दोनों शहर मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में शामिल हैं। सऊदी अरब ने अक्टूबर में हूतियों पर मदीना के बिजली वितरण केंद्र पर हमला करने का आरोप लगाया था। यह केंद्र पैगंबर की मस्जिद को बिजली देता है। हालांकि, हूतियों ने इस आरोप को खारिज किया था। हूती मक्का और मदीना को निशाना बनाने से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि उनके हमले सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों और तेल से जुड़े ठिकानों पर होते हैं। सऊदी अरब के समर्थन से लड़ रही यमन की सरकार यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है और हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सरकारी सेनाओं को हवाई मदद देता है। वहीं, ईरान पर हूती विद्रोहियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। राष्ट्रपति भवन परिसर पर हमले से यमन में संघर्ष और बढ़ने की आशंका है। हूतियों ने कहा है कि उनका निशाना सऊदी सैन्य अभियान से जुड़े ठिकाने थे। 2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं हरा पा रहा? सऊदी अरब के पास आधुनिक लड़ाकू विमान और मिसाइलें हैं। अमेरिका भी उसे हथियार देता है। इसके बावजूद सऊदी अरब 2015 से हूतियों के खिलाफ जारी लड़ाई नहीं जीत पाया है। हूती आज भी यमन के बड़े हिस्से पर काबिज हैं और सऊदी अरब पर ड्रोन-मिसाइल हमले कर रहे हैं। हूतियों के सस्ते ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए सऊदी अरब को महंगी मिसाइलें दागनी पड़ती हैं। इससे उसका खर्च बढ़ता है। इसके अलावा, यमन का पहाड़ी इलाका भी बड़ी चुनौती है। यहां हूतियों के ठिकानों का पता लगाना मुश्किल है। उन्हें पूरी तरह हटाने के लिए जमीनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है, जिसमें सैनिकों के मारे जाने और युद्ध लंबा चलने का खतरा है। --------------------------- यह खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट-हूतियों को हमला न करने के बदले पैसे देगा सऊदी: रक्षा मंत्री 1 अरब डॉलर लेकर तेहरान पहुंचे; ईरान-पाकिस्तान के जरिए मध्यस्थता की कोशिश सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच पिछले 3 महीने से जंग चल रही है। हूती विद्रोहियों ने सऊदी के कई तेल ठिकानों और एयरपोर्ट्स पर हमले किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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