महंगाई ने बिगाड़ा घर का बजट...
देश में पिछले 12 दिनों के भीतर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, दूध, राशन और सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती महंगाई ने आम आदमी और मध्यम वर्ग का मासिक बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 26 मई 2026
लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की तोड़ी कमर
देश में इन दिनों महंगाई ने आम आदमी की जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले 12 दिनों में जिस तेजी से पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, दूध, राशन, सोना और दूसरी जरूरी चीजों के दाम बढ़े हैं, उससे हर वर्ग परेशान दिखाई दे रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा परिवारों की आर्थिक स्थिति पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है। लोग अब घर का खर्च चलाने के लिए अपनी बचत तक खर्च करने को मजबूर हो रहे हैं।महंगाई का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई दे रहा है। हर दिन बढ़ते खर्च ने परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। लोग अब पहले की तुलना में कम सामान खरीद रहे हैं और कई जरूरी खर्चों में कटौती करने लगे हैं।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने बढ़ाई सबसे बड़ी परेशानी
महंगाई की सबसे बड़ी वजह लगातार बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों को माना जा रहा है। पिछले 12 दिनों में चार बार तेल के दाम बढ़ाए जा चुके हैं। कई शहरों में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच चुका है, जबकि डीजल भी लगातार महंगा हो रहा है।तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से यह स्थिति बनी है। हालांकि आम आदमी के लिए इन कारणों से ज्यादा मायने नहीं रखते, क्योंकि उसकी जेब पर लगातार बोझ बढ़ता जा रहा है। अब रोजाना दफ्तर जाने वाले लोगों के लिए वाहन चलाना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो चुका है।
सीएनजी ने भी खत्म कर दी राहत
कुछ समय पहले तक लोग पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से बचने के लिए सीएनजी गाड़ियों की तरफ तेजी से बढ़ रहे थे। लेकिन अब सीएनजी के दामों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले कुछ दिनों में सीएनजी की कीमतें चार बार बढ़ाई जा चुकी हैं।ऑटो और टैक्सी चालकों का कहना है कि अब उनकी आधी कमाई ईंधन में ही खर्च हो रही है। कई शहरों में चालकों ने किराया बढ़ाने की मांग शुरू कर दी है। अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ेगा और आम लोगों के लिए सफर करना और महंगा हो जाएगा।
रसोई तक पहुंची महंगाई की आग
महंगाई की मार अब सीधे घर की रसोई तक पहुंच चुकी है। दूध कंपनियों ने दूध के दाम बढ़ा दिए हैं। कई जगहों पर प्रति लीटर दूध दो से चार रुपये तक महंगा हो चुका है। इसके अलावा दाल, ब्रेड, खाद्य तेल और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।गृहिणियों का कहना है कि अब हर सप्ताह बाजार जाने पर खर्च पहले से ज्यादा हो रहा है। बच्चों के खाने-पीने से लेकर सुबह की चाय तक सब कुछ महंगा हो गया है। छोटे परिवारों के लिए भी महीने का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
सोना-चांदी खरीदना अब आम आदमी के बस से बाहर
शादी के मौसम में सोना और चांदी की कीमतों में आई तेजी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई शहरों में सोने की कीमत एक लाख रुपये प्रति दस ग्राम के करीब पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और बढ़े आयात शुल्क को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।मध्यम वर्गीय परिवारों का कहना है कि अब शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रमों में आभूषण खरीदना बेहद मुश्किल हो गया है। लोग जरूरत के बावजूद सोना खरीदने से बच रहे हैं। बाजार में भी इसका असर दिखाई देने लगा है।
परिवहन महंगा होते ही बढ़े हर सामान के दाम
पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। जब माल ढुलाई महंगी होती है तो सब्जियां, फल, राशन और दूसरी चीजों के दाम भी बढ़ जाते हैं। ट्रक संचालकों का कहना है कि डीजल महंगा होने से परिवहन लागत तेजी से बढ़ी है।थोक बाजारों में सामान महंगा पहुंच रहा है, जिसका असर खुदरा बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। दुकानदारों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें भी दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं।
मासिक किस्त, फीस और बिलों के बीच पिस रहा मध्यम वर्ग
सबसे ज्यादा असर इस समय मध्यम वर्ग पर दिखाई दे रहा है। एक तरफ घर और गाड़ी की मासिक किस्तें हैं, दूसरी तरफ बच्चों की फीस, बिजली बिल और रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं।लोगों का कहना है कि अब महीने की शुरुआत में ही पूरा बजट बिगड़ जाता है। कई परिवार अब घूमना-फिरना, बाहर खाना और दूसरी गैरजरूरी चीजों पर खर्च कम करने लगे हैं। बचत करना अब लगभग असंभव होता जा रहा है।
राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल कम
आर्थिक जानकारों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम नहीं होतीं, तब तक महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद कम है। पश्चिम एशिया में तनाव और डॉलर की मजबूती भारत जैसे देशों पर लगातार दबाव बना रही है।सरकार हालात पर नजर रखने की बात कह रही है, लेकिन फिलहाल आम लोगों को राहत मिलती नहीं दिख रही। आने वाले दिनों में यदि कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।