मिडिल ईस्ट संकट से भारत पर आर्थिक खतरा, बढ़ सकती है महंगाई

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल को लेकर एशियाई विकास बैंक ने चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत में महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक विकास दर पर गंभीर असर पड़ सकता है।

मिडिल ईस्ट संकट से भारत पर आर्थिक खतरा, बढ़ सकती है महंगाई

दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 11 मई 2026

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई भारत की चिंता

मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। एशियाई विकास बैंक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। फल, सब्जियां, खाद्यान्न और रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। इससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और घरेलू बजट बिगड़ सकता है। बाजार में पहले से मौजूद महंगाई का दबाव और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

एशियाई विकास बैंक ने दी बड़ी चेतावनी

एशियाई विकास बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने कहा है कि यदि मिडिल ईस्ट संकट लगातार बना रहता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि वर्ष दो हजार छब्बीस में कच्चे तेल की औसत कीमत छियानवे डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं अगले वर्ष भी कीमतें अस्सी डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रह सकती हैं। यह स्थिति भारत जैसे आयात आधारित देशों के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है। इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा और विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है। आर्थिक संस्थाओं का मानना है कि यह संकट केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि देश की संपूर्ण विकास दर को प्रभावित कर सकता है।

प्रधानमंत्री की अपील के बाद बढ़ी आर्थिक चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से सोना न खरीदने, पेट्रोल की खपत कम करने और विदेश यात्राएं घटाने की अपील के बाद देश में आर्थिक हालात को लेकर चिंता और बढ़ गई है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि वैश्विक संकट के कारण आने वाले समय में संसाधनों की बचत बेहद जरूरी होगी। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने और अनावश्यक खर्च से बचने की सलाह दी थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह अपील संकेत देती है कि सरकार आने वाले समय में आर्थिक दबाव को लेकर गंभीर चिंता में है। इससे आम लोगों के बीच भी भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है।

महंगाई बढ़ने से आम जनता पर पड़ेगा सीधा असर

यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो इसका सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर दिखाई देगा। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से परिवहन खर्च बढ़ जाएगा जिससे बाजार में हर वस्तु की कीमत बढ़ सकती है। रसोई गैस और बिजली उत्पादन की लागत बढ़ने से घरेलू खर्च में भी वृद्धि होने की आशंका है। पहले से बढ़ती महंगाई से परेशान मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए हालात और मुश्किल हो सकते हैं।छोटे कारोबारी और मध्यम उद्योग सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। रोजगार के अवसर घटने और आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ने का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार के सामने अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।

विकास दर पर भी मंडराने लगा संकट

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की बढ़ती कीमतें भारत की विकास दर को भी प्रभावित कर सकती हैं। जब उत्पादन लागत बढ़ती है और बाजार में मांग घटती है तो उद्योगों की गति धीमी पड़ जाती है। इससे देश की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां पहले ही वैश्विक आर्थिक मंदी को लेकर चिंता जता चुकी हैं। विदेशी निवेश में कमी, व्यापारिक गतिविधियों में गिरावट और बाजार में अस्थिरता जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।