मेरठ लाठीचार्ज पर मानवाधिकार आयोग सख्त!
मेरठ में कथित पुलिस लाठीचार्ज के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और प्रमुख सचिव (गृह) से विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने पुलिस कार्रवाई के कारण, घायलों की स्थिति, उपचार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध संभावित कार्रवाई सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जवाब तलब किया है।
दि राइजिंग न्यूज़ |मेरठ | 10 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के मेरठ में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज के मामले ने अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और प्रमुख सचिव (गृह) से विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने पूछा है कि पुलिस को बल प्रयोग की आवश्यकता क्यों पड़ी, प्रदर्शनकारियों को कितनी चोटें आईं और घायलों को क्या चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि यदि जांच में किसी प्रकार की ज्यादती सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए कथित लाठीचार्ज का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और प्रमुख सचिव (गृह) से विस्तृत प्रतिवेदन तलब किया है। आयोग का कहना है कि यदि किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग किया गया है तो उसके पीछे के कारणों की पूरी जानकारी आवश्यक है। इस मामले को मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन के रूप में भी देखा जा रहा है।
शिकायत के आधार पर आयोग ने शुरू की कार्रवाई
यह मामला डॉ. अंबेडकर जन कल्याण समिति की ओर से की गई शिकायत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष पहुंचा। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने बिना किसी बड़े उकसावे के लाठीचार्ज कर दिया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस कार्रवाई में कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। आयोग ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित अधिकारियों से तथ्यात्मक जानकारी मांगी है।
हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर हो रहा था प्रदर्शन
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह प्रदर्शन एक हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें प्रशासन तक पहुंचाना चाहते थे। आरोप है कि इसी दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिससे कई लोग घायल हो गए। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे और मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पूछे कई महत्वपूर्ण प्रश्न
आयोग ने अपने नोटिस में उत्तर प्रदेश प्रशासन से कई बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी मांगी है। इसमें पूछा गया है कि पुलिस को बल प्रयोग की आवश्यकता क्यों पड़ी, कार्रवाई किस आधार पर की गई और घायल हुए लोगों को क्या उपचार उपलब्ध कराया गया। आयोग यह भी जानना चाहता है कि पुलिस ने निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया या नहीं। सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
जवाबदेही तय करने के भी दिए संकेत
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में पुलिस की ओर से किसी प्रकार की ज्यादती, नियमों का उल्लंघन या अनावश्यक बल प्रयोग सामने आता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है अथवा की जाएगी, इसकी भी जानकारी दी जाए। आयोग का उद्देश्य केवल घटना की जांच करना नहीं बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मामले की गंभीरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
रिपोर्ट मिलने के बाद आगे होगी कार्रवाई
आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार से निर्धारित समय के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग पूरे मामले की समीक्षा करेगा और आवश्यक होने पर आगे की कार्रवाई करेगा। फिलहाल सभी पक्षों के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। आयोग का अंतिम निर्णय प्रतिवेदन और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।