झांसी कलेक्ट्रेट में वकीलों ने दरोगा को दौड़ाया, CCTV:वीडियो बना रहे सिपाही से मोबाइल छीना, मारपीट की, पुलिस ने जारी की 3 फुटेज

Nov 01, 2026 - 01:54
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झांसी कलेक्ट्रेट में वकीलों ने दरोगा को दौड़ाया, CCTV:वीडियो बना रहे सिपाही से मोबाइल छीना, मारपीट की, पुलिस ने जारी की 3 फुटेज
झांसी में वकीलों और पुलिस की झगड़ का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रविवार रात को पुलिस ने 3 सीसीटीवी फुटेज जारी किए। दो फुटेज में नजर आ रहा है कि शुक्रवार को वकील कलेक्ट्रेट में डीएम ऑफिस के पास प्रदर्शन कर रहे है। एक सिपाही भूपेंद्र अपने मोबाइल में उनकी वीडियो बना रहा है। तभी कुछ वकीलों ने उसका मोबाइल छीन लिया। तभी एक दरोगा चौकी इंचार्ज मोहित कुमार पहुंच गए। आक्रोशित कुछ वकील दोनों को धक्का देते हुए पीटते हैं और फिर दौड़ा लेते हैं। दरोगा मोहित की तहरीर पर नवाबाद पुलिस ने 4 वकीलों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, लूट, मारपीट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। उधर, वकीलों ने भी दो नवंबर को अनशन का अल्टीमेटम दिया है। 4 फुटेज देखिए… अब पूरा मामला विस्तार से पढ़िए जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष प्रमोद शिवहरे, महामंत्री छोटेलाल वर्मा की अगुवाई में अधिवक्ता शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। वकीलों ने दो बड़े आरोप लगाए। पहला- कोतवाली गए संयुक्त सचिव अधिवक्ता राेमेश अग्रवाल के साथ थाना प्रभारी ने अभद्रता करते हुए गाली गलौच की। दूसरा- नवाबाद क्षेत्र के बस स्टैंड के पास बने लॉज और होटलों में पुलिस देह व्यापार करा रही है। प्रदर्शन के डीएम ऑफिस के बाहर जेल चौकी इंचार्ज मोहित कुमार और सिपाही भूपेंद्र तैनात थे। भूपेंद्र अपने मोबाइल में वकीलों की वीडियो बनाने लगा। यह देख वकील भड़क गए। नारेबाजी करते हुए दोनों पुलिसकर्मियों को घेर लिया। मोबाइल छीनकर दोनों को धक्का देते हुए दौड़ा लिया। बाद में अधिवक्ता डीएम कार्यालय पहुंचे। एडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए नबावाद थाना प्रभारी, कोतवाली प्रभारी और सीपरी बाजार थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने उसी दिन बबीना निवासी अविनाश यादव, आजाद, दीपू और नैनागढ़ निवासी देवेंद्र यादव के खिलाफ केस दर्ज किया था। पुलिस ने सिल-सिलेवार वकीलों के आरोपों को नकारा देह व्यापार के साक्ष्य नहीं मिले शुक्रवार रात को ही सीओ सिटी के नेतृत्व में पुलिस ने बस स्टैंड के आसपास बने 11 लॉज एवं होटलों में दबिश ली। लेकिन वहां कोई संदिग्ध महिला या पुरुष नहीं मिला। एसपी सिटी प्रीति सिंह ने कहा- देह व्यापार के हमें कोई भी साक्ष्य नहीं मिले। एसपी सिटी बोली- वकील के साथ थाने में अभद्रता नहीं हुई रविवार रात को पुलिस ने 3 सीसीटीवी फुटेज जारी किया। इसमें 44 सेकेंड की एक फुटेज कोतवाली थाना प्रभारी अनंज कुमार सिंह के कक्ष की है। एसपी सिटी ने कहा- वकील राेमेश अग्रवाल ने थाना प्रभारी पर अभद्र व्यवहार करते हुए गाली गलौच का आरोप लगाया था। जांच में सामने आया कि 27 अक्टूबर को रोमेश अग्रवाल के मुंशी विनय कोटी की पत्नी ने अपने पति समेत ससुराल वालों पर केस दर्ज कराया था। अगले दिन रमेश और विनय कोतवाली गए थे। प्रभारी के कक्ष में लगे वाइस रिकॉर्डर वाले सीसीटीवी कैमरे की जांच की गई। इसमें सामने आया कि शाम 7.12 बजे अधिवक्ता रोमेश अग्रवाल ने उनके कक्ष में प्रवेश किया। फुटेज में आ रही आवाज में एसएचओ अंजन सिंह कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि आप बाहर जाइए। रोमेश ने कहा कि हमें बात करनी है। इस पर एसएचओ ने कहा कि अभी आप बाद में अपनी बात कहिएगा। एसएचओ के सामने कुर्सी पर बैठे विनय ने कहा कि यह मेरे प्रकरण में ब्रीफ करेंगे। इस पर एसएचओ ने यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि जब आपकी बात न सुनी जाए तब आप जिसकी मदद लेनी हो, उनकी लीजिएगा। इसके बाद रोमेश कमरे से बाहर निकल गए। सामने बैठे विनय ने कहा कि यह हमारे वकील हैं। कुछ देर बाद विनय भी कमरे से बाहर जाते दिखाई दिए। एसपी सिटी ने कहा- प्रकरण पति-पत्नी के घरेलु विवाद से संबंधित था। ऐसे में काउंसिलिंग की प्रिक्रिया को अधिवक्ता द्वारा अप्रयक्ष रूप से प्रभावित करने की आशंका के दृष्टिगत कोतवाली थाना प्रभारी ने अधिवक्ता को बाहर जाने के लिए कहा। इसके अलावा उनके द्वारा अधिवक्ता के साथ कोई अभद्रता या गाली गलौच नहीं की। अधिवक्ता द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार और गलत हैं। एसपी सिटी बोली- FIR में जो तथ्य अंकित, उनके प्रमाण वकीलों पर लूट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज होने के बाद सवाल उठ रहे थे। पुलिस ने 47 सेकेंड और 3:58 मिनट के दो सीसीटीवी फुटेज जारी किए। एसपी सिटी ने कहा- पुलिसकर्मियों का मोबाइल लूटने, गाली गलौच, धक्का मुक्की और मारपीट करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर से बाहर भगा देने की घटना के संबंध में नवाबाद थाने में एक केस दर्ज हुआ है। केस में जो तथ्य अंकित है, उन समस्त तथ्यों की पुष्टि कलेक्ट्रेट में लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच में हो रही है। जो भी घटनाक्रम बताया गया है, वो वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में दिखाई पड़ रहा है। जो भी पंजीकृत एफआईआर है, उसमें जल्द ही वैधानिक कार्रवाई पूरी की जाएगी। दोनों घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि थानों में अधिवक्ताओं के खिलाफ कई प्रकरण विवेचनाधीन है। उन प्रकरणों में पुलिस पर दबाव बनाने की नियत से ये कृत्य उस दिन किया गया।

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