जिंदा को पहले मृत दिखाया, अब परिवार का विभाजन किया:राशन कार्ड में गड़बड़ियों का खेल खत्म नहीं, संशोधन के बाद भी मिली नई खामी
सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा बच्चों को मृत दिखाकर राशन की यूनिट काट दी गईं। परिवार ने राशन डीलर से लेकर आपूर्ति विभाग तक चक्कर लगाए लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप और एडीएम सिटी से शिकायत के बाद विभाग हरकत में आया। राशन कार्ड की गलतियां सुधारी गईं और नया कार्ड जारी कर परिवार को राशन भी मिल गया। लगा कि समस्या का समाधान हो गया लेकिन नए कार्ड ने विभागीय कार्यप्रणाली की पोल फिर खोल दी। इस बार परिवार के सदस्यों के नाम के सामने विभाजन और विस्थापन की प्रविष्टियां दर्ज कर दी गईं। पहले जिन बच्चों को मृत दर्शाया गया था, अब उनके नाम के सामने परिवार के विभाजन का कारण दर्ज है। सुर कालू और छोटे बेटे विराट को विस्थापित दिखाया गया है। संबंधित कर्मचारी इसे तकनीकी गड़बड़ी बताकर सुधारने का भरोसा दे रहे हैं। सवाल यह है कि जब शिकायत के बाद कार्ड में संशोधन हुआ तो गलतियां पूरी तरह दुरुस्त क्यों नहीं की गईं? पहले पति को विभाजित, बच्चों को मृत दिखाया
रोहटा विकास खंड के ग्राम किनौनी निवासी सोनाक्षी पत्नी योगेश के नाम राशन कार्ड संख्या 213840655396 जारी है। कार्ड में ससुर कालू समेत परिवार के छह यूनिट दर्ज थे। पिछले दिनों डेटा में बदलाव के बाद पति योगेश को विभाजित और दो बच्चों देव व परी को मृत दर्शा दिया गया। इससे परिवार की राशन यूनिट प्रभावित हो गईं। योगेश लंबे समय तक राशन डीलर और आपूर्ति विभाग के चक्कर लगाते रहे लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। जिंदा बच्चों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाए जाने के बावजूद परिवार को राहत नहीं मिली। विधायक के प्रतिनिधि ने उठाया मुद्दा
मामला सिवालखास विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा था। परेशान योगेश, विधायक गुलाम मोहम्मद के कार्यालय पहुंचे। यहां विधायक के प्रतिनिधि दिनेश गुप्ता ने उनकी समस्या सुनी। दो दिन पहले दिनेश गुप्ता, योगेश और उनके बच्चों को लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे। वहां एडीएम सिटी से शिकायत की गई। बच्चों को मृत दर्शाए जाने की जानकारी पर एडीएम सिटी ने गंभीरता दिखाई और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। अगले दिन फोन, शनिवार को नया कार्ड
शिकायत के अगले ही दिन सदर तहसील के कर्मचारी आशु कुमार ने योगेश से संपर्क किया। परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड लेकर उन्हें तहसील बुलाया गया। शनिवार को राशन कार्ड में संशोधन कर नया कार्ड जारी कर दिया गया। रविवार को परिवार को नए राशन कार्ड से राशन भी मिल गया। इसके बाद लगा कि महीनों की परेशानी दूर हो गई है लेकिन कार्ड की दूसरी प्रविष्टियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए। नए कार्ड में भी विभाजन-विस्थापन का खेल
नए राशन कार्ड में ससुर कालू, बेटे देव और विराट, बेटी परी तथा पति योगेश के नाम शामिल हैं। इसके बावजूद यूनिट निरस्तीकरण के कारण में विभाजन और विस्थापन दर्ज है। पुराने कार्ड में देव और परी को मृत दिखाया गया था, जबकि नए कार्ड में उनके नाम के सामने परिवार के विभाजन को निरस्तीकरण का कारण बताया गया है। ससुर कालू और छोटे बेटे विराट को विस्थापित दर्शाया गया है। यानी कार्ड में परिवार के सदस्यों के नाम शामिल करने के बाद भी रिकॉर्ड में ऐसी प्रविष्टियां मौजूद हैं, जो परिवार की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े करती हैं। परिवार का कहना है कि जब सभी सदस्य मौजूद हैं और उनके आधार कार्ड भी उपलब्ध कराए गए तो फिर कार्ड में इस तरह की गलत जानकारी क्यों दर्ज है? तकनीकी समस्या बताकर पल्ला झाड़ रहा विभाग
राशन कार्ड में संशोधन करने वाले सदर तहसील के कर्मचारी आशु कुमार ने बताया कि तकनीकी समस्या के चलते डेटा में बदलाव हो गया था। इसे ठीक कर नया राशन कार्ड जारी कर दिया गया है। नए कार्ड में फिर विभाजन और विस्थापन की प्रविष्टियां सामने आने पर उन्होंने इन्हें भी तकनीकी गड़बड़ी बताया। परिवार के विभाजन से संबंधित सवाल पर उन्होंने कहा कि इसे भी सुधार दिया जाएगा। विभाग पर सवाल, जवाबदेही किसकी
एक ही राशन कार्ड में पहले जिंदा बच्चों को मृत दर्शाना और फिर संशोधन के बाद विभाजन-विस्थापन की गलत प्रविष्टियां सामने आना महज तकनीकी समस्या कहकर टाला नहीं जा सकता। इससे यह सवाल भी उठता है कि राशन कार्ड के डेटा में बदलाव कौन कर रहा है और संशोधन के बाद रिकॉर्ड की जांच किस स्तर पर होती है? अगर परिवार के आधार कार्ड देखकर नया कार्ड बनाया गया था तो उसमें गलत प्रविष्टियां कैसे रह गईं? फिलहाल परिवार को राशन मिलना शुरू हो गया है लेकिन कार्ड में दर्ज सभी जानकारियों को दुरुस्त करना बाकी है। अब देखना यह है कि विभाग गलतियों को वास्तव में सुधारता है या परिवार को एक बार फिर दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)