ऑस्ट्रेलियाई ओपनर ने छिपाई आर्थराइटिस की बीमारी:ख्वाजा का खुलासा- 22 की उम्र में पता चला था, लगा मैं मर जाऊंगा
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ओपनर उस्मान ख्वाजा ने बताया कि उन्होंने अपने पूरे इंटरनेशनल करियर में रूमेटॉइड आर्थराइटिस छिपाकर रखा। जनवरी 2026 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने यह खुलासा किया। ख्वाजा को 22 साल की उम्र में बीमारी का पता चला था। उस समय वह न्यू साउथ वेल्स के लिए प्रोफेशनल क्रिकेट में जगह बना रहे थे। बीमारी के कारण उनके बाएं घुटने में तेज दर्द रहता था। उन्हें लगा कि वह दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे। दवा और नियमित इंजेक्शन से वह करीब छह महीने बाद मैदान पर लौटे। ख्वाजा ने 88 टेस्ट में 6,229 रन और 16 शतक बनाए। उन्होंने जनवरी 2026 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया के पांचवें एशेज टेस्ट के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लिया। बीमारी के बारे में बोले- लगा मैं मर जाऊंगा ख्वाजा ने ऑस्ट्रेलियन स्टोरी कार्यक्रम में अपने अनुभव के बारे में बताया। वह चाहते हैं कि उनकी कहानी ऑटोइम्यून बीमारियों से जूझ रहे लोगों को प्रेरित करे। उन्होंने कहा, “मुझे सच में लगा था कि मैं मरने वाला हूं। मैं एक ऐसे एथलीट से, जो प्रोफेशनल क्रिकेट खेल रहा था, ऐसा हो गया था कि बाथरूम तक 10 मीटर चल नहीं पाता था।” उन्होंने आगे कहा, “अगर रूमेटॉइड आर्थराइटिस के साथ कोई व्यक्ति प्रोफेशनल क्रिकेटर के तौर पर टॉप लेवल पर खेल सकता है, तो मुझे लगता है कि कई दूसरे लोग भी बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं।” ख्वाजा ने बताया कि दवा ने उन्हें बीमारी के बाद क्रिकेट में लौटने में मदद की। उन्होंने कहा, “उस दवा के बिना मैं कभी दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाता। मैं सामान्य जिंदगी भी नहीं जी पाता।” कई साल तक बीमारी छिपाकर रखी ख्वाजा को 2009 के ऑफ-सीजन में बीमारी का पता चला था। उस समय वह न्यू साउथ वेल्स के लिए खेल रहे थे। उन्होंने अपनी बीमारी के बारे में मेडिकल प्रोफेशनल्स, कोच और क्रिकेट प्रशासकों को बताया था। हालांकि, उन्होंने अपने साथियों को इसकी जानकारी नहीं दी। बाएं हाथ के बल्लेबाज ख्वाजा किसी तरह की विशेष मदद नहीं लेना चाहते थे। उन्हें डर था कि विरोधी या आलोचक उनकी बीमारी का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर सकते हैं। इस वजह से ड्रेसिंग रूम में उनके सबसे करीबी लोगों को भी उनकी बीमारी के बारे में पता नहीं था। बचपन के क्रिकेट साथी डेविड वॉर्नर और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व साथी माइकल हसी भी इससे अनजान थे। दवा के नियमित इंजेक्शन से ख्वाजा करीब छह महीने बाद फिर बल्लेबाजी करने लौटे। इस इलाज ने उन्हें बीमारी की चुनौतियों के बावजूद ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने का सपना जारी रखने में मदद की। अपनी आने वाली ऑटोबायोग्राफी ‘सबर’ के जरिए ख्वाजा लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे लोगों को अपने लक्ष्य जारी रखने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं। उनका खुलासा मैदान पर सफल दिखने वाले करियर के पीछे छिपी निजी चुनौतियों की जानकारी भी देता है। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया ख्वाजा ने जनवरी 2011 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। वह ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले पाकिस्तान में जन्मे पहले खिलाड़ी बने। इसके बाद उन्होंने संघर्ष और बड़ी उपलब्धियों से भरा करियर बनाया। उन्हें ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम से कई बार बाहर किया गया, लेकिन वह बार-बार टीम में लौटे। उनकी सबसे यादगार वापसी 2021-22 एशेज सीरीज में हुई। सिडनी टेस्ट की दोनों पारियों में उन्होंने शतक लगाए। बाद में वह ऑस्ट्रेलिया के टॉप ऑर्डर के अहम सदस्य बने। उन्होंने देश के सबसे सफल बल्लेबाजों में शामिल होकर अपना टेस्ट करियर खत्म किया। ख्वाजा ने 88 टेस्ट मैचों में 6,229 रन बनाए। उनके नाम 16 टेस्ट शतक हैं। उन्होंने जनवरी 2026 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया के पांचवें एशेज टेस्ट के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया।
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