जंगलों की आग ने बिगाड़े 3 देशों के रिश्ते:इंडोनेशिया के जहरीले धुएं से मलेशिया-सिंगापुर परेशान, विरोध करने पर गैस सप्लाई घटाई

Nov 03, 2026 - 09:03
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जंगलों की आग ने बिगाड़े 3 देशों के रिश्ते:इंडोनेशिया के जहरीले धुएं से मलेशिया-सिंगापुर परेशान, विरोध करने पर गैस सप्लाई घटाई
इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग का धुआं पड़ोसी देशों मलेशिया और सिंगापुर के लिए मुसीबत बन गया है। कालिमंतान, पापुआ और सुमात्रा के जंगलों से उठ रहा जहरीला धुआं हवा के साथ इन देशों तक पहुंच रहा है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो रही हैं। मलेशिया के कुछ इलाकों में स्कूल बंद करने पड़े हैं। धुआं कई हफ्तों से बना हुआ है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। मलेशिया में लोगों ने इंडोनेशिया के उत्पादों का बहिष्कार शुरू कर दिया है, जबकि सिंगापुर ने आग से जुड़ी कंपनियों की जांच शुरू की है। इस बीच इंडोनेशिया ने सिंगापुर को गैस का निर्यात घटाने का ऐलान किया है। उसने इसकी वजह अपने देश की ऊर्जा जरूरतों को बताया है। खेती के लिए जंगलों में लगाई जाती है आग इंडोनेशिया में जंगलों में आग लगने की घटनाएं हर साल होती हैं। इसकी बड़ी वजह खेती और कारोबार के लिए जंगलों को साफ करना है। खासतौर पर पाम ऑयल की खेती के लिए बड़े इलाकों में जमीन तैयार की जाती है। इसके लिए कई जगह जंगलों में आग लगाई जाती है। आग जमीन के नीचे मौजूद पीटलैंड तक फैल जाए तो इसे बुझाना और मुश्किल हो जाता है। पीटलैंड में मौजूद सूखे जैविक पदार्थ आग को लंबे समय तक सुलगाए रखते हैं। इस साल अल नीनो के कारण इंडोनेशिया के जंगलों और पीटलैंड में सूखे की स्थिति ज्यादा गंभीर रही। इससे आग तेजी से फैली और उस पर काबू पाना मुश्किल हो गया। आमतौर पर इस तरह के धुएं का असर मलेशिया और सिंगापुर में कुछ दिनों तक रहता है, लेकिन इस बार यह कई हफ्तों से बना हुआ है। मलेशिया में बहिष्कार, सिंगापुर में सरकार की आलोचना धुएं से परेशान मलेशिया के लोगों ने इंडोनेशिया के उत्पादों का बहिष्कार शुरू कर दिया है। मलेशियाई सांसद सैयद सादिक ने आग से जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने लोगों से ऐसी कंपनियों को क्षेत्र में अलग-थलग करने की अपील भी की। सिंगापुर सरकार ने धुएं से लोगों को बचाने के लिए सैकड़ों राहत केंद्र बनाए हैं। बच्चों, बुजुर्गों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों को मास्क बांटे जा रहे हैं। सरकार धुएं से जुड़े मौजूदा कानूनों को सख्त करने पर भी विचार कर रही है। हालांकि सिंगापुर में लोगों ने अपनी सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को पहले से पता था कि इस साल अल नीनो के कारण सूखे की स्थिति गंभीर होगी। इसके बावजूद धुएं से निपटने की पर्याप्त तैयारी नहीं की गई। इंडोनेशिया के अधिकारी के बयान से बढ़ा विवाद इस बीच इंडोनेशिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जंगलों में लगने वाली आग पर इंसानों का नियंत्रण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पड़ोसी देशों सिंगापुर और मलेशिया को मिलने वाली ऑक्सीजन भी इंडोनेशिया के जंगलों से आती है। इस बयान पर सिंगापुर ने नाराजगी जताई। वहां के वरिष्ठ मंत्री के. शनमुगम ने इसे निराशाजनक और गलत बताया। उन्होंने कहा कि जहरीले धुएं से लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान हो रहा है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। शनमुगम ने कहा कि इस समस्या से दोनों देशों के नागरिक प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए इसे आपसी विवाद का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इंडोनेशिया के लोग भी प्रदूषण से परेशान हैं। ऐसे में आग लगाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करना इंडोनेशिया के भी हित में है। इंडोनेशिया ने पहले धमकी दी फिर गैस सप्लाई रोकी विवाद के कुछ दिन बाद इंडोनेशिया ने सिंगापुर को गैस का निर्यात कम करने का ऐलान किया। सरकार ने इसकी वजह अपने देश में ऊर्जा की बढ़ती जरूरत बताई। इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में बिजली की कमी भी सामने आई है। हालांकि, इस फैसले को सिंगापुर की आलोचना के बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे पहले इंडोनेशिया के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी थी कि जो देश इंडोनेशिया का सम्मान नहीं करेंगे, उनकी गैस सप्लाई रोकी जा सकती है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने भी जंगलों में आग के मुद्दे पर उन देशों का जिक्र किया था, जो इंडोनेशिया का अपमान करते हैं। सिंगापुर का कहना है कि गैस सप्लाई में यह कटौती उसकी कुल रोजाना जरूरत के 2% से भी कम है। इसलिए इससे उसकी ऊर्जा आपूर्ति पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। मलेशिया इंडोनेशिया से टकराव क्यों नहीं चाहता?

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