गयादीन अहिरवार हत्याकांड में कोतवाली प्रभारी लाइन हाजिर:जालौन के अधिवक्ता 4 नवंबर तक न्यायिक काम से दूर रहेंगे
जालौन के कालपी बार संघ के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार के अपहरण और निर्मम हत्याकांड के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में लापरवाही और शिथिलता बरतने के आरोप में कालपी कोतवाली प्रभारी अजय ब्रह्म तिवारी को एसपी ने लाइन हाजिर कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल मच गई है। अधिवक्ता के अपहरण के मामले में समय रहते प्रभावी कार्रवाई न किए जाने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे। गौरतलब है कि कालपी बार संघ के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार 31 अक्टूबर को उरई न्यायालय में आए थे। यहां से वापस कालपी पहुंचने के बाद वह अपने बेटे को स्टैंड पर बुलाने की बात कह रहे थे। इसी दौरान कुछ लोग फाइल पर चर्चा करने के बहाने उन्हें अपनी कार में बैठाकर ले गए थे। कार में चार लोगों के सवार होने की जानकारी सामने आई थी। कुछ समय बाद उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया। काफी देर तक घर न पहुंचने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की और पुलिस को सूचना दी थी। बताया गया कि अधिवक्ता का वर्ष 2000 से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी जमीनी विवाद के चलते उनके अपहरण और हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया। अपहरण के बाद आरोपियों ने कानपुर के सचेंडी क्षेत्र में गुजैनी नहर में बेरहमी से हत्या कर शव फेंक दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की स्वाट, सर्विलांस और एसओजी समेत कई टीमों को लगाया गया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बाद में कालपी क्षेत्र के जोल्हूपुर-मदारीपुर के जंगल में पुलिस मुठभेड़ के दौरान दो आरोपी घायल हुए थे, जबकि तीसरे को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। वही मुख्य साजिश करता इंद्रजीत यादव को भी गिरफ्तार कर लिया था। इस जघन्य हत्याकांड के बाद से ही जनपद के अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है। अधिवक्ता लगातार आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और पुलिस की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। हत्या के विरोध में जालौन के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। अधिवक्ता 4 नवंबर तक न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। जिला एवं सत्र न्यायालय उरई सहित जनपद की विभिन्न तहसीलों और न्यायालयों में अधिवक्ताओं का विरोध जारी है।
कोतवाली प्रभारी को लाइन हाजिर किए जाने की कार्रवाई को इसी मामले में पुलिस की शुरुआती कार्यशैली पर उठे सवालों और लापरवाही के आरोपों के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि अधिवक्ताओं का आक्रोश अभी थमा नहीं है। उनकी मांग है कि हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस व्यवस्था को जवाबदेह बनाया जाए।
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