जज की कुर्सी पर किया काला जादू, फिर हुआ ये!

कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर में अपने मुकदमे का फैसला पक्ष में कराने की कथित मंशा से एक महिला ने न्यायाधीश की कुर्सी पर टोना-टोटका किया। पूरी घटना निगरानी कैमरों में कैद हो गई, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने आरोपी महिला को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

जज की कुर्सी पर किया काला जादू, फिर हुआ ये!

दि राइजिंग न्यूज़ |  कर्नाटक | 14 जुलाई 2026

कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में न्यायालय परिसर के भीतर हुई एक असामान्य घटना ने सभी को हैरान कर दिया है। विज्ञान और तकनीक के आधुनिक युग में भी अंधविश्वास से जुड़ी इस घटना ने न्याय व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार एक पैंसठ वर्षीय महिला अपने मुकदमे का फैसला अपने पक्ष में करवाने की मंशा से न्यायालय परिसर पहुंची और न्यायाधीश के कक्ष में जाकर कथित रूप से टोना-टोटका किया।बताया जा रहा है कि महिला ने यह कदम इस विश्वास में उठाया कि इससे अदालत का फैसला उसके पक्ष में आ जाएगा। हालांकि उसकी पूरी गतिविधि न्यायालय परिसर में लगे निगरानी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। घटना सामने आने के बाद न्यायालय प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल पुलिस को सूचना दी और कानूनी कार्रवाई शुरू कराई।


न्यायाधीश की कुर्सी पर बिखेरे सफेद सरसों के दाने

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी महिला की पहचान मंजुला के रूप में हुई है, जिसकी उम्र लगभग पैंसठ वर्ष बताई गई है। महिला प्रथम अतिरिक्त वरिष्ठ दीवानी न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट के कक्ष तक पहुंच गई और वहां न्यायाधीश की कुर्सी पर कथित रूप से मंत्र पढ़कर सफेद सरसों के दाने बिखेर दिए।जांच अधिकारियों के अनुसार महिला का मानना था कि इस प्रकार का अनुष्ठान करने से उसके पक्ष में फैसला आ सकता है। यह घटना उस समय किसी की नजर में नहीं आई, लेकिन दो दिन बाद जब निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच की गई तो महिला की पूरी गतिविधि सामने आ गई। इसके बाद न्यायालय प्रशासन ने बिना देर किए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।


निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग बनी सबसे बड़ा साक्ष्य

इस पूरे मामले का खुलासा न्यायालय परिसर में लगे निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग से हुआ। रिकॉर्डिंग में महिला को न्यायाधीश के कक्ष में प्रवेश करते और कथित रूप से टोना-टोटका करते हुए देखा गया। यही रिकॉर्डिंग पुलिस जांच का सबसे महत्वपूर्ण आधार बनी।रिकॉर्डिंग देखने के बाद न्यायालय की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नेत्रा ने पुलिस को लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज किया और महिला की पहचान कर उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि महिला को न्यायाधीश के कक्ष तक पहुंचने में किसी ने सहायता तो नहीं की।


पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कथित कृत्य

पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान महिला ने बताया कि उसका एक मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है और वह चाहती थी कि उसका फैसला उसके पक्ष में आए। इसी उद्देश्य से उसने कथित रूप से टोना-टोटका किया। पुलिस ने महिला के बयान को दर्ज कर लिया है और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का भी सत्यापन किया जा रहा है।अधिकारियों का कहना है कि केवल आरोपी के बयान के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा। जांच में उपलब्ध सभी साक्ष्यों, रिकॉर्डिंग और अन्य गवाहों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इस घटना के पीछे किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है।


कड़े कानून के तहत दर्ज हुआ मामला

महिला के खिलाफ कर्नाटक अमानवीय कुप्रथाओं तथा काला जादू की रोकथाम एवं उन्मूलन अधिनियम, २०१७ के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस कानून का उद्देश्य अंधविश्वास, कुप्रथाओं और समाज में फैली अमानवीय गतिविधियों पर रोक लगाना है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।पुलिस ने बताया कि मामले में अन्य संबंधित धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं, यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं। साथ ही न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।


अदालत ने भेजा चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी महिला को अदालत में पेश किया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने उसे चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। फिलहाल महिला जेल में है और पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि महिला ने यह कथित कृत्य अकेले किया था या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने न्यायालयों की सुरक्षा व्यवस्था, अंधविश्वास और न्यायिक संस्थानों की गरिमा को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।