काशी की 16 साल की हिरल ने PM को लिखा-पत्र:बोलीं- ‘स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग’ का नाम बदलकर ‘स्वास्थ्य विभाग’ करें
वाराणसी की 16 वर्षीय हिरल श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली शब्दावली में बदलाव का सुझाव दिया है। हिरल चाहती हैं कि ‘स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग’ का नाम बदलकर ‘स्त्री एवं प्रसूति स्वास्थ्य विभाग’ किया जाए। उनका कहना है कि स्त्री होना या बच्चे को जन्म देना कोई बीमारी नहीं है। ऐसे में विभाग के नाम में ‘रोग’ की जगह ‘स्वास्थ्य’ शब्द का इस्तेमाल महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा दे सकता है। 12वीं में पढ़ने वाली हिरल महिला स्वास्थ्य से जुड़े इस सुझाव के साथ AI आधारित ‘कवच’ प्रोजेक्ट पर भी काम करना चाहती हैं। उनका विचार रक्षा से जुड़े अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक सिस्टम तैयार करने का है। हिरल के मुताबिक, उनके इस आइडिया को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) तक भी पहुंचाया जा चुका है। हिरल ने PM को पत्र लिखकर कहा- ‘रोग’ नहीं, ‘स्वास्थ्य’ शब्द अपनाएं
हिरल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली शब्दावली में बदलाव का सुझाव दिया है। उन्होंने पत्र में ‘स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग’ की जगह ‘स्त्री एवं प्रसूति स्वास्थ्य विभाग’ और ‘स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ’ की जगह ‘स्त्री एवं प्रसूति स्वास्थ्य विशेषज्ञ’ नाम रखने की बात कही है। हिरल ने बताया कि स्त्री होना या प्रसव करना कोई बीमारी नहीं है। यह प्रकृति की एक सामान्य प्रक्रिया है, जिससे जीवन आगे बढ़ता है। उनका कहना है कि जब अस्पतालों में किसी विभाग के नाम में ‘रोग’ शब्द आता है, तो उससे बीमारी का भाव जुड़ जाता है। इसके बजाय ‘स्वास्थ्य’ शब्द इस्तेमाल करने से सकारात्मक संदेश जा सकता है। हिरल का मानना है कि शब्दों का असर लोगों की सोच पर भी पड़ता है। उनके मुताबिक, कई महिलाएं स्वास्थ्य से जुड़े संवेदनशील विषयों पर खुलकर बात करने में संकोच करती हैं। अगर भाषा अधिक सकारात्मक होगी, तो महिलाओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि गर्भावस्था, प्रसव और उनसे जुड़ी देखभाल स्वास्थ्य सेवाओं का सामान्य हिस्सा हैं, न कि शर्म या डर की बात। ‘कवच’ से सेना, एयरफोर्स और दूसरे रक्षा विभागों को जोड़ने का आइडिया हिरल का दूसरा आइडिया ‘कवच’ है। हिरल ने बताया कि देश में रक्षा से जुड़े कई विभाग और संस्थान अलग-अलग काम करते हैं। इनमें सेना, एयरफोर्स, नौसेना, रक्षा अनुसंधान और दूसरी सुरक्षा एजेंसियां शामिल हैं। उनका विचार है कि इन सभी प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए AI आधारित एक सिस्टम तैयार किया जाए। हिरल ने बताया कि उनका आइडिया ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने का है, जो अलग-अलग विभागों के सिस्टम को जरूरत के अनुसार जोड़ सके। इससे संबंधित सूचनाओं के समन्वय और कामकाज में मदद मिल सकती है। वह चाहती हैं कि सैनिक चाहे वो कहीं भी हो रेगिस्तान जंगल जहां नेटवर्क ना हो पर वो अपने हेड ऑफिस से जुड़े रहें, ताकि जरूरी सूचनाओं और प्रक्रियाओं का तालमेल बेहतर हो सके। हिरल ने बताया कि इस सिस्टम में AI की भूमिका सहायक की होनी चाहिए। उनका विचार यह नहीं है कि पूरा नियंत्रण AI को दे दिया जाए। उनके मुताबिक, AI सहायता दे सकता है, लेकिन सिस्टम पर नियंत्रण इंसानों के पास रहना चाहिए। वह चाहती हैं कि सैनिकों की सुरक्षा और रक्षा से जुड़े कामों को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाए। बचपन से PM मोदी से मिलने का सपना, मुलाकात नहीं हुई तो रातभर रोती रही हिरल हिरल की मां गरिमा श्रीवास्तव ने बताया कि बेटी बचपन से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित रही है। करीब पांच साल की उम्र से ही वह उनसे मिलने का सपना देखती थी। उस समय हिरल प्रधानमंत्री को सुपरहीरो की तरह देखती थी। घर में देश और राजनीति से जुड़ी खबरों पर बातचीत होती थी, जिससे उसकी रुचि बढ़ती गई। गरिमा ने बताया कि एक बार प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए अनुमति मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। परिवार को उम्मीद थी कि हिरल अपने पसंदीदा नेता से मिल पाएगी, लेकिन बाद में कार्यक्रम में बदलाव हुआ और मुलाकात नहीं हो सकी। गरिमा के मुताबिक, उस समय हिरल बहुत छोटी थी और मुलाकात न हो पाने से वह बेहद निराश हो गई। वह पूरी रात रोती रही। मां के लिए भी बेटी को इस तरह उदास देखना भावुक कर देने वाला पल था। मां गरिमा बोलीं- बेटी के विचारों को हर पहलू से परखकर देते हैं साथ गरिमा श्रीवास्तव ने बताया कि हिरल जो भी विचार रखती है, परिवार उसे गंभीरता से सुनता है। किसी भी प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले वे उसके अलग-अलग पहलुओं पर विचार करते हैं। गरिमा के मुताबिक, वे देखते हैं कि किसी विचार से देश, समाज या दूसरे लोगों को नुकसान पहुंचने की आशंका तो नहीं है। जब उन्हें लगता है कि बेटी की सोच सही दिशा में है और उसका उद्देश्य सकारात्मक है, तो वे उसका साथ देते हैं। गरिमा ने बताया कि महिला स्वास्थ्य से जुड़ी शब्दावली बदलने का सुझाव भी हिरल ने इसी सोच के साथ रखा था। परिवार को लगा कि वह किसी भाषा या चिकित्सा पद्धति का विरोध नहीं कर रही, बल्कि ऐसे शब्द अपनाने की बात कर रही है, जिनसे सकारात्मक भाव आए। इसलिए परिवार ने पत्र लिखने और उसे आगे पहुंचाने में उसका सहयोग किया। पीएम मोदी से पहली मुलाकात में अपने दो गुल्लक उन्हें दिए थे
हिरल बताती हैं कि जब वह 2017 में आठ साल की उम्र में पहली बार पीएम मोदी से मिली थीं, तब उन्होंने उनसे कहा था कि जब 15 मिनट में स्विगी से खाना आ सकता है, तो नेत्रदान करने की इच्छा रखने वाले लोगों की आंखें लेने के लिए डॉक्टर इतनी जल्दी क्यों नहीं आ सकते? उन्होंने इस दिशा में व्यवस्था बनाने की बात कही थी। हिरल ने पीएम मोदी को अपना एक गुल्लक दिया था, ताकि वह देश के लिए अपना योगदान दे सकें। दूसरा गुल्लक उन्होंने इस इच्छा के साथ दिया था कि पीएम मोदी अच्छे लोगों को आगे लाएं और बुरे लोगों को दूर करें। हिरल ने गुल्लक के साथ खुद बनाया हुआ एक पोर्ट्रेट भी उन्हें भेंट किया था। बायोसाइंस में करियर बनाना चाहती हैं हिरल, जीन पर रिसर्च की इच्छा
हिरल अभी 12वीं की छात्रा हैं। वह आगे बायोसाइंस के क्षेत्र में करियर बनाना चाहती हैं और अलग-अलग जीन पर रिसर्च करने की इच्छा रखती हैं। 16 साल की हिरल बचपन से ही पीएम मोदी को सुपरहीरो की तरह देखती हैं। उनके मुताबिक, पीएम मोदी ऐसे सुपरहीरो हैं, जो बुरे लोगों को दूर करके अच्छे लोगों को आगे लाते हैं। पहली मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने हिरल को अपनी लिखी किताब एग्जाम वॉरियर्स भी भेजी थी।
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