काशी संस्कृति संसद का 3 नवंबर से होगा आगाज:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भेजा शुभकामना संदेश,मनुस्मृति की मूल पांडुलिपियों पर होगी चर्चा

Nov 01, 2026 - 17:31
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काशी संस्कृति संसद का 3 नवंबर से होगा आगाज:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भेजा शुभकामना संदेश,मनुस्मृति की मूल पांडुलिपियों पर होगी चर्चा
धर्म और आध्यात्मिकता की नगरी काशी में 3 से 5 नवंबर तक संस्कृति संसद 2026 का आयोजन किया जाएगा। सिगरा स्थित रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में देशभर के संत, विद्वान, सामाजिक चिंतक और युवा शामिल होंगे। इस बार संस्कृति संसद भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ अशोक सिंघल के शताब्दी वर्ष को समर्पित है। आयोजन में शामिल होने के लिए देशभर के संत सोमवार शाम काशी पहुंचेंगे। सोमवार को प्रदोष काल में बाबा विश्वनाथ का सहस्त्रार्चन और रुद्राभिषेक किया जाएगा। इस अनुष्ठान के मुख्य यजमान संत समाज के प्रतिनिधि होंगे। पीएम मोदी ने भेजा शुभकामना संदेश संस्कृति संसद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभकामना संदेश भेजा है। उन्होंने भारतीय संत समाज, गंगा महासभा और अखाड़ा परिषद सहित आयोजन से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी सदियों से भारत की आध्यात्मिक चेतना और ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र रही है। बाबा विश्वनाथ की नगरी, सारनाथ में भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश की भूमि और जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थली होने के कारण काशी का विशेष महत्व है। आदि शंकराचार्य की ज्ञान साधना से भी काशी का गहरा संबंध रहा है। यहां विभिन्न मतों और विचारों ने शास्त्रार्थ, संवाद और चिंतन को नई दिशा दी है। गंगा संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत पर विमर्श प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में काशी के विकास और विरासत संरक्षण के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास, मां गंगा की स्वच्छता, घाटों का सौंदर्यीकरण, सारनाथ की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और बनारसी हस्तशिल्प को नए अवसरों से जोड़ना इसी सोच का हिस्सा है। इस वर्ष संस्कृति संसद में राष्ट्रीय गंगा विमर्श विशेष महत्व रखेगा। गंगा की निर्मलता के लिए नमामि गंगे अभियान के तहत सीवेज शोधन संयंत्रों के निर्माण, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और जनभागीदारी बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा होगी। युवाओं के सवाल, युवाओं के जवाब संस्कृति संसद में युवाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। आयोजन में युवाओं के लिए अलग सभागार और सत्र तैयार किया गया है, जहां युवा वक्ता, श्रोता और संचालक की भूमिका निभाएंगे। उनके मन में उठने वाले सवालों पर संवाद और समाधान का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, युवाओं को केवल भाषण सुनने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें विचार-विमर्श का सक्रिय हिस्सा बनाया जाएगा। मनुस्मृति की मूल पांडुलिपियों पर चर्चा संस्कृति संसद में मनुस्मृति की मूल पांडुलिपियों और उनके ऐतिहासिक संदर्भों पर भी चर्चा होगी। आयोजकों का कहना है कि मूल पांडुलिपियों की उपलब्धता और उनके विदेशों में पहुंचने से जुड़े सवालों पर विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्र और धर्म की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। आयोजन में रॉ के पूर्व निदेशक एमके सूजी सहित कई प्रमुख अतिथि शामिल होंगे। आयोजकों के मुताबिक, देश और धर्म से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संवाद और प्रश्नोत्तर के सत्र आयोजित किए जाएंगे।

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