केमिकल टैंकर पलटने के 24 घंटे बाद भी हाईवे बंद:लोगों को रॉन्ग साइड लौटाया जा रहा, 20 हजार की आबादी को आंखों में जलन और सांस की परेशानी

Oct 28, 2026 - 08:12
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केमिकल टैंकर पलटने के 24 घंटे बाद भी हाईवे बंद:लोगों को रॉन्ग साइड लौटाया जा रहा, 20 हजार की आबादी को आंखों में जलन और सांस की परेशानी
बख्शी का तालाब (बीकेटी) इलाके में किसान पथ पर फॉर्मेलिन केमिकल से भरे टैंकर के पलटने के 24 घंटे बाद भी हाईवे बंद है। वाहनों को लौटाया जा रहा है, जिससे मजबूरी में सब रॉन्ग साइड में लौट रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 15 से 20 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हो रही है। कई लोगों ने आंखों में जलन, उल्टी जैसा महसूस होने और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। हादसे के बाद पुलिस और राहत-बचाव टीमों की कार्रवाई के बावजूद 24 घंटे बाद भी हाईवे पर बैरिकेडिंग लगी रही। वहीं, फैक्ट्री संचालक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सोमवार शाम करीब 6:30 बजे टैंकर हरदोई के संडीला से गुडंबा क्षेत्र स्थित एक फैक्ट्री में फॉर्मेलिन लेकर जा रहा था। मानपुर-बाना के पास टायर फटने से अनियंत्रित हुआ टैंकर हाईवे पर पलट गया। इससे केमिकल का रिसाव होने लगा। हादसे की सूचना मिलने पर बीकेटी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल के आसपास बैरिकेडिंग कर आवागमन रोक दिया। इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और फायर सर्विस की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। हालांकि, केमिकल के रिसाव पर काबू पाने में कई घंटे लग गए। तीन घंटे तक रिसाव रोकने की कार्रवाई शुरू होने का इंतजार स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसे के बाद पुलिस ने घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर बैरिकेडिंग लगा दी। मौके पर पहुंचीं पुलिस, एसडीआरएफ और फायर सर्विस की टीमें भी टैंकर से दूरी बनाकर खड़ी रहीं। आरोप है कि शुरुआती करीब तीन घंटे तक मुख्य रूप से लोगों को घटनास्थल की ओर जाने से रोकने की कार्रवाई होती रही। इसके बाद केमिकल के रिसाव को नियंत्रित करने का काम शुरू हुआ। रिसाव पर काबू पाने के लिए कई डंपरों से करीब आठ ट्रक मिट्टी डाले जाने की बात सामने आई। इसके बावजूद इलाके में केमिकल के प्रभाव को लेकर लोगों में चिंता बनी रही। स्थानीय स्तर पर करीब पांच किलोमीटर तक असर महसूस किए जाने की बात कही गई, जबकि लगभग दो किलोमीटर के दायरे में लोगों ने जलन और अन्य परेशानियों की शिकायत की। 24 घंटे बाद भी बैरिकेडिंग, उल्टी दिशा से निकल रहे लोग हादसे के अगले दिन मंगलवार को भी हाईवे पर बैरिकेडिंग लगी रही। आवागमन रोकने के कारण लोगों को दूसरे रास्तों से जाना पड़ा। कुछ लोग उल्टी दिशा से निकलते दिखाई दिए, जिससे सड़क हादसे का खतरा बना रहा। लंबे समय तक यातायात प्रभावित होने से स्थानीय लोगों और राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ी। 20 हजार की आबादी प्रभावित, कार्रवाई पर सवाल फॉर्मेलिन के रिसाव से आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों में दहशत और नाराजगी देखी गई। लोगों ने आंखों में जलन, उल्टी जैसा महसूस होने और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि खतरनाक केमिकल के परिवहन, सुरक्षा इंतजामों और हादसे के बाद की कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है। हादसे के बाद फैक्ट्री संचालक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, फैक्ट्री संचालक के खिलाफ किसी कार्रवाई या जांच की आधिकारिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मॉक ड्रिल में 30 मिनट, हकीकत में कई घंटे… लखनऊ के बीकेटी में फार्मेलिन से भरे टैंकर के पलटने की घटना ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मॉक ड्रिल में चंद मिनटों में हालात संभालने का अभ्यास करने वाली NDRF और SDRF की टीमें मौके पर कई घंटों तक केमिकल को नियंत्रित करने का तरीका तलाशती रहीं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मॉक ड्रिल में टीमें तेजी से हालात संभालने का प्रदर्शन करती हैं, तो वास्तविक घटना के दौरान केमिकल पर काबू पाने में इतना समय क्यों लगा? क्या तैयारियों में कोई कमी थी या केमिकल की प्रकृति ने चुनौती बढ़ा दी? बीकेटी की इस घटना ने आपदा प्रबंधन की वास्तविक तैयारियों, त्वरित प्रतिक्रिया और रासायनिक आपदाओं से निपटने की क्षमता की समीक्षा की जरूरत सामने ला दी है। फैक्टरी मालिक से मांगे भंडारण के दस्तावेज एसीपी बख्शी का तालाब अंकित बंसल ने बताया कि फैक्टरी मालिक मनु गुप्ता से केमिकल के भंडारण और टैंकर मालिक से परिवहन संबंधी दस्तावेज मांगे गए हैं। घटनास्थल पर फैले लिक्विड को हटाने के लिए छह डंपर मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। आरोपी चालक की तलाश में पुलिस की टीमें लगाई गई हैं। तीन दिन पहले ही नौकरी पर आया था चालक एसीपी के मुताबिक, टैंकर के हेल्पर हरदोई के रामपुर निवासी गौरव मिश्रा से पूछताछ में पता चला कि चालक मनीष तीन दिन पहले ही ड्यूटी पर आया था। इस वजह से फैक्टरी मालिक के पास उसके बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। पुलिस चालक के संबंध में अन्य जानकारियां जुटा रही है। आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हो तो अस्पताल जाएं घटनास्थल पर डीजी हेल्थ पवन कुमार अरुण, सीएमओ नरेंद्र बहादुर सिंह और सीएचसी अधीक्षक जेपी सिंह मौजूद हैं। सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि केमिकल हवा के साथ तेजी से फैल सकता है। प्रभावित लोगों की मदद के लिए घटनास्थल से कुछ दूरी पर स्वास्थ्य कैंप लगाए गए हैं। दो एंबुलेंस और छह सदस्यीय मेडिकल टीम तैनात है। उन्होंने बताया कि किसी को आंखों में जलन या सांस लेने में परेशानी हो तो अस्पताल में संपर्क करें। अधिक लोगों को परेशानी होने पर कैंप में भी पहुंच सकते हैं। सांस संबंधी बीमारी, अस्थमा और टीबी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। एक बार काम पूरा होने पर होगी आगे की कार्रवाई एसीपी अंकित बंसल ने बताया कि केमिकल को निष्क्रिय करने का काम तेजी से किया जा रहा है। चालक के बारे में अभी पुलिस को अधिक जानकारी नहीं मिल सकी है। केमिकल हटाने का काम पूरा होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। ……………… ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ में केमिकल भरा टैंकर पलटा, 5km तक असर:20 घंटे बाद भी एक लेन बंद, सड़क पर मिट्टी डालकर गैस का असर कम किया लखनऊ के बख्शी का तालाब (बीकेटी) में फॉर्मेलिन (केमिकल) से भरा टैंकर पलटने के 20 घंटे बाद भी राहत कार्य जारी है। हाईवे की सड़क पर मिट्‌टी डालकर केमिकल के असर को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। हाईवे की एक लेन और सर्विस रोड को बैरिकेडिंग कर बंद कर दिया गया है। 500 मीटर के दायरे में लोगों को अब भी आंखों में जलन महसूस हो रही है। हालांकि, केमिकल का असर कल से कम है। मौके पर पुलिस और एंबुलेंस तैनात हैं। पढ़िए पूरी खबर…

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