पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका...

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी के पार्टी नेतृत्व से नाराज होने की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। संगठन में बड़े बदलाव नहीं होने के बाद उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेश को लेकर अटकलें तेज हैं। हालांकि अभी तक पार्टी छोड़ने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यह मामला पंजाब की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका...

दि राइजिंग न्यूज़ | चंडीगढ़ | 2 जुलाई 2026

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लोकसभा सांसद और वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी के पार्टी छोड़ने की अटकलों ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बताया जा रहा है कि पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर पार्टी आलाकमान के हालिया फैसलों से वह संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि अभी तक मनीष तिवारी या कांग्रेस की ओर से पार्टी छोड़ने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन उनके हालिया संदेश ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।कांग्रेस ने हाल ही में स्पष्ट किया कि पंजाब इकाई के शीर्ष नेतृत्व में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके बाद मनीष तिवारी की ओर से सामाजिक माध्यम पर किया गया एक भावुक और व्यंग्यात्मक संदेश चर्चा का विषय बन गया। राजनीतिक जानकार इसे उनकी नाराजगी का संकेत मान रहे हैं और इसे आगामी चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए चुनौती के रूप में देख रहे हैं।


पार्टी के फैसले से नाराज बताए जा रहे हैं मनीष तिवारी

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब संगठन में बड़े बदलाव की संभावनाओं को फिलहाल खारिज कर दिया है। पार्टी ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा को विधानसभा में विधायक दल का नेता बनाए रखने का फैसला किया है। इसी निर्णय के बाद मनीष तिवारी के असंतुष्ट होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।बताया जा रहा है कि पंजाब कांग्रेस के भीतर नई जिम्मेदारियों को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। कई नेताओं को उम्मीद थी कि चुनाव से पहले संगठन में बदलाव किए जाएंगे, लेकिन आलाकमान ने मौजूदा व्यवस्था को ही बरकरार रखने का फैसला लिया। इसके बाद राजनीतिक हलकों में मनीष तिवारी की नाराजगी की खबरें सामने आने लगीं।


सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेश से बढ़ीं अटकलें

मनीष तिवारी ने सामाजिक माध्यम पर एक ऐसा संदेश साझा किया, जिसे उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने लिखा कि यदि उनके पास लोगों और संस्थाओं की असुरक्षाओं का कोई अचूक इलाज होता तो स्थिति कुछ और होती। इसके साथ उन्होंने यह भी लिखा कि पिछले पैंतालीस वर्षों में उन्हें कांग्रेस से बहुत कुछ मिला है और उन्होंने भी अपना पूरा सार्वजनिक जीवन पार्टी की सेवा में समर्पित किया है।उन्होंने अपने संदेश के अंत में लिखा कि जो होना है, वह होकर रहेगा। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया। हालांकि उन्होंने अपने संदेश में कहीं भी पार्टी छोड़ने की स्पष्ट बात नहीं कही, लेकिन इसे लेकर कई तरह के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं।


कांग्रेस ने किन नेताओं को सौंपी अहम जिम्मेदारियां

कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए कई वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर समिति का प्रमुख बनाया गया है।इसके अलावा विजय इंदर सिंघला को चुनाव प्रबंधन और समन्वय समिति का दायित्व सौंपा गया है, जबकि सांसद अमर सिंह को घोषणापत्र समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी का मानना है कि इन नियुक्तियों से चुनावी तैयारियों को मजबूती मिलेगी और संगठन में बेहतर तालमेल स्थापित होगा।


क्या कांग्रेस को लग सकता है बड़ा झटका

यदि मनीष तिवारी वास्तव में कांग्रेस से अलग होने का फैसला करते हैं तो यह पंजाब चुनाव से पहले पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। मनीष तिवारी लंबे समय से कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी अलग पहचान है। ऐसे में उनका किसी भी तरह का फैसला चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकता है।हालांकि फिलहाल पार्टी की ओर से किसी तरह के मतभेद से इनकार किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में मनीष तिवारी की अगली राजनीतिक रणनीति पर सभी की नजर रहेगी। यदि उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट किया तो पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।


पंजाब चुनाव से पहले बढ़ी सियासी सरगर्मी

पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सभी राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। कांग्रेस भी चुनाव से पहले अपने संगठन को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें उसके लिए चुनौती बन सकती हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी समय रहते आंतरिक मतभेदों को दूर नहीं कर पाई तो इसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर कांग्रेस नेतृत्व और मनीष तिवारी की अगली राजनीतिक चाल पर टिकी हुई है।