मीराबाई की आस्था से विष भी अमृत बना:पद्मश्री डॉ. विद्याविन्दु सिंह ने कहा- कृष्ण प्रेम को बनाया जीवन का आधार
मीराबाई की आस्था में इतनी शक्ति थी कि विष भी अमृत बन गया। उन्होंने सामाजिक बंधनों की परवाह नहीं की। कृष्ण प्रेम को ही अपने जीवन का आधार बनाया। यह बात पद्मश्री डॉ. विद्याविन्दु सिंह ने कही। सोमवार को यूपी प्रेस क्लब में संत कवयित्री मीराबाई की जयंती और शरद पूर्णिमा पर लोक संस्कृति शोध संस्थान की 91वीं लोक चौपाल आयोजित हुई। डॉ. सिंह ने कहा कि मीराबाई कृष्णभक्ति शाखा की महान साधिका थीं। उन्होंने भक्ति के जरिए सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी। सात विभूतियों को मीराबाई लोक संगीत सम्मान कार्यक्रम में लोक संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए सात विभूतियों को मीराबाई लोक संगीत सम्मान दिया गया। सम्मान पाने वालों में रेखा मिश्रा, अनुज श्रीवास्तव, अलका चतुर्वेदी, डॉ. कुसुम वर्मा, रूपाली श्रीवास्तव, देवेश्वरी पंवार और बबिता सिंह शामिल रहीं। कार्यक्रम में अवधविद् डॉ. रामबहादुर मिश्र, वरिष्ठ लोक गायिका पद्मा गिडवानी, कुमाऊं कोकिला विमल पन्त और बुंदेली भजन कोकिला सूर्यमुखी स्वर्णकार विशिष्ट अतिथि रहे। भजनों से याद की गईं मीराबाई संस्थान के अध्यक्ष जीतेश श्रीवास्तव ने बताया कि संगीत भवन की ओर से मीराबाई के भजनों की सांगीतिक प्रस्तुति हुई। कलाकारों ने मुरलिया बाजे रे जमुना के तीर और चलो मन गंगा जमुना तीर प्रस्तुत किया। वही,सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी ने बताया कि इसमें सौम्या, सुमन, सुनीता, शुभी, आवांश, आश्वी, अव्युक्ता और कर्णिका शामिल हुईं।
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