फिर टल सकती है कपसाड़ केस की ट्रायल प्रक्रिया:बचाव पक्ष के अधिवक्ता नेपाल सिंह सोम को नहीं मिली केस फाइल, लेंगे समय

Oct 27, 2026 - 08:17
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फिर टल सकती है कपसाड़ केस की ट्रायल प्रक्रिया:बचाव पक्ष के अधिवक्ता नेपाल सिंह सोम को नहीं मिली केस फाइल, लेंगे समय
मेरठ के चर्चित कपसाड़ केस की ट्रायल प्रक्रिया उलझकर रह गई है। आज से ट्रायल शुरू होना था, लेकिन आरोपी पारस सोम की तरफ से केस लड़ने का ऐलान करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता नेपाल सिंह सोम को अभी तक केस से जुड़े दस्तावेज हेंडओवर नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि जब तक वह फाइल नहीं पढ़ लेते, तब तक वह केस कैसे लड़ सकते हैं। माना जा रहा है कि वह कोर्ट से फिर नई तिथि का आग्रह कर सकते हैं। मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में 8 जनवरी, 2026 को सुनीता जाटव अपनी बेटी रूबी के साथ खेत पर काम करने जा रही थी। आरोप है कि इसी दौरान रूबी को गांव का रहने वाला पारस सोम अपने साथ ले गया। सुनीता ने इसका विरोध किया तो उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। घायल सुनीता को परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उनकी मौत हो गई। 48 घंटे में मुकदमा व फिर गिरफ्तारी विवाद दलित बनाम ठाकुर का रूप लेने लगा। बामुश्किल पुलिस ने स्थिति को संभाला। आनन फानन में सुनीता के बेटे नरसी कुमार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने रूबी की तलाश शुरू की और आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने करीब 48 घंटे के भीतर रूबी को बरामद कर लिया था। बाद में मजिस्ट्रेट के सामने रूबी के बयान दर्ज कराए गए। बयान के बाद रूबी काउंसलिंग के लिए आशा ज्योति केंद्र और आरोपी पारस सोम को जेल भेज दिया गया। चार माह तक लगी अस्थाई पिकेट मामले की गूंज लखनऊ तक पहुंची, जिसके बाद विपक्ष हावी होने लगा। पुलिस ने गांव को किले में तब्दील कर दिया। ना केवल राजनीतिक दलों बल्कि मीडिया की एंट्री पर रोक लगा दी गई। पीड़ित रूबी के घर के बाहर अस्थाई पिकेट भी तैनात कर दी गई। करीब चार माह तक पुलिस यहां तैनात रही। इसके बाद मामला शांत होता चला गया। दोनों पक्ष ने कोर्ट में लड़ाई शुरु की। पुलिस ने 647 पेज की चार्जशीट दाखिल की और 43 गवाह तैयार कर दिए। ट्रायल से पहले दोनों पक्ष के वकील बदले 17 अक्टूबर से कपसाड़ कांड का ट्रायल शुरु होना था लेकिन उससे पहले ही नरसी कुमार की तरफ से एडवोकेट राजेंद्र कुमार को हटाकर नये एडवोकेट रियासत अली को केस सौंप दिया गया। भीम आर्मी के संस्थापक व सांसद चंद्रशेखर आजाद के कहने पर एडवोकेट को बदला गया। हड़ताल के कारण 17 को ट्रायल शुरु नहीं हुआ और 23 तारीख लग गई। इससे पहले कि ट्रायल शुरु हो पाता, आरोपी पारस सोम पक्ष ने भी बलराम सोम की जगह नये एडवोकेट नेपाल सिंह सोम को खड़ा कर दिया। नेपाल सोम को नहीं मिली केस फाइल दैनिक भास्कर से बातचीत में नेपाल सिंह सोम ने बताया कि केस लड़ने के लिए उन्हें पूरे मामले का पता होना जरूरी है। इसके लिए उन्हें दस्तावेजों की आवश्यकता है। उन्होंने कोर्ट से डुप्लीकेट फाइल का आग्रह किया था लेकिन अभी तक दस्तावेज मिले ही नही हैं। दस्तावेजों का अच्छी तरह अवलोकन करने के बाद ही वह बहस कर सकेंगे।

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