पंप ऑपरेटरों को 4 महीने से नहीं मिला वेतन:बांदा DM से 12 घंटे की ड्यूटी और महीने में 30 दिन काम कराने की शिकायत
बांदा में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के खटान प्रोजेक्ट में तैनात पंप ऑपरेटरों ने सोमवार दोपहर करीब 1 बजे जिलाधिकारी से शिकायत की। ऑपरेटरों ने समय से मानदेय नहीं मिलने, 12 घंटे की ड्यूटी कराने और महीने में पूरे 30 दिन काम लेने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि कई बार तीन से चार महीने तक मानदेय रोक दिया जाता है, जिससे परिवार का खर्च चलाने में परेशानी होती है। 13 से 15 हजार से घटाकर 11,400 रुपए मानदेय देने का आरोप पंप ऑपरेटरों ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि खटान प्रोजेक्ट में उनकी नियुक्ति पंप ऑपरेटर के पद पर हुई थी। शुरुआत में उन्हें 13 हजार से 15 हजार रुपए के बीच मानदेय दिया जाता था। इसके अलावा मोटरसाइकिल के पेट्रोल का खर्च भी मिलता था। ऑपरेटरों का आरोप है कि अब उनका मानदेय घटाकर 11,400 रुपए कर दिया गया है। पेट्रोल का खर्च भी बंद कर दिया गया है। उनका कहना है कि तय मानदेय भी हर महीने नहीं मिलता और तीन से चार महीने का भुगतान रोकने के बाद एक साथ किया जाता है। 12 घंटे की ड्यूटी और पूरे महीने काम कराने की शिकायत ऑपरेटरों ने आरोप लगाया कि उनसे रोजाना 12 घंटे तक काम कराया जाता है और महीने में लगातार 30 दिन ड्यूटी ली जाती है। उनका कहना है कि उन्हें नियमित छुट्टी भी नहीं दी जाती। इसके अलावा पंप संचालन के साथ फील्ड की साफ-सफाई और अन्य काम भी कराए जाने का आरोप लगाया गया है। ऑपरेटरों का कहना है कि इन कामों से इनकार करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। ठेकेदार के अधिकारियों पर धमकी देने का आरोप प्रार्थना पत्र में ऑपरेटरों ने ठेकेदार एलएनटी के उच्च अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर नौकरी से हटाने की धमकी दिए जाने की शिकायत की है। उन्होंने कहा कि काम के दबाव के साथ नौकरी जाने की आशंका के कारण भी कर्मचारी परेशान हैं। हर महीने समय से भुगतान और चार दिन छुट्टी की मांग पंप ऑपरेटरों ने जिलाधिकारी से मांग की कि उन्हें तय मानदेय के अनुसार हर महीने समय से भुगतान कराया जाए। उन्होंने महीने में चार दिन छुट्टी देने की मांग भी की है। ऑपरेटरों ने ठेकेदार बेस से हटाकर आउटसोर्सिंग व्यवस्था में शामिल करने और मानक के अनुसार मानदेय दिलाने की मांग की। इसके साथ ही नौकरी से निकालने की धमकी पर रोक लगाने और दिन में एक गार्ड की व्यवस्था कराने की मांग भी रखी। ऑपरेटरों ने शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, मुख्य विकास अधिकारी और श्रम विभाग को भी भेजी है।
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