पीओजेके में हिंसा पर घिरे लियाकत अली मलिक: चुनावी विवाद के बीच पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में चुनावी आरक्षण विवाद के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। प्रशासनिक कार्रवाई, संगठन पर प्रतिबंध और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आरोपों के बीच पुलिस प्रमुख लियाकत अली मलिक की भूमिका चर्चा के केंद्र में आ गई है। मानवाधिकार संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।

पीओजेके में हिंसा पर घिरे लियाकत अली मलिक: चुनावी विवाद के बीच पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

दि राइजिंग न्यूज़ | मुजफ्फराबाद | 10 जून 2026

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में चुनावी विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। आरक्षण व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विरोध अब बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के पुलिस प्रमुख लियाकत अली मलिक का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।

चुनावी आरक्षण विवाद से भड़का जनआक्रोश

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आगामी चुनावों से पहले बारह आरक्षित सीटों को लेकर व्यापक असंतोष देखने को मिला। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों की व्यवस्था क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर करती है और स्थानीय जनता की राजनीतिक भागीदारी को प्रभावित करती है।इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने विरोध अभियान शुरू किया। संगठन ने चुनावी प्रक्रिया के बहिष्कार का आह्वान करते हुए इसे स्थानीय अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया। धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे क्षेत्र में फैलता चला गया।

संगठन पर प्रतिबंध ने बढ़ाया तनाव

विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान सरकार ने संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया। इसके साथ ही संगठन से जुड़े कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया तथा विभिन्न क्षेत्रों में संचार सेवाओं पर भी रोक लगाई गई।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बातचीत के बजाय कठोर प्रशासनिक कार्रवाई ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया। प्रतिबंध के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन तेज हो गए।

प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा ने बढ़ाई चिंता

विरोध मार्च के दौरान मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, कोटली, मीरपुर और अन्य क्षेत्रों में भारी भीड़ जमा हो गई। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा कर्मियों पर भी हमले हुए जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनके खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया।घटनाओं के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की खबरों ने पूरे क्षेत्र में भय और असंतोष का माहौल पैदा कर दिया। राहत और चिकित्सकीय सहायता केंद्रों में घायलों का उपचार लगातार जारी है।

कौन हैं लियाकत अली मलिक

लियाकत अली मलिक वर्तमान में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति के समय भी प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी। कई स्थानीय अधिकारियों ने वरिष्ठता और प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए थे।मलिक इससे पहले पंजाब प्रांत में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। कानून व्यवस्था से जुड़े कई संवेदनशील अभियानों में उनकी भूमिका रही है, जिसके कारण वे पाकिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था में एक प्रभावशाली अधिकारी माने जाते हैं।

पूर्व विवादों को लेकर भी चर्चा में रहे मलिक

लियाकत अली मलिक का नाम इससे पहले भी कई विवादित घटनाओं में सामने आ चुका है। कुछ मामलों में उन पर प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग और कठोर कार्रवाई के आरोप लगाए गए थे। इन घटनाओं को लेकर राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने समय-समय पर सवाल उठाए थे।हालांकि मलिक के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने हमेशा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक कारणों से प्रेरित रहे हैं।

राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में भूमिका पर उठते रहे प्रश्न

पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में हुए कई राजनीतिक आंदोलनों के दौरान भी मलिक की भूमिका चर्चा का विषय बनी रही। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के नाम पर प्रशासन ने अत्यधिक बल प्रयोग किया।मानवाधिकार संगठनों ने भी कई अवसरों पर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की। इन घटनाओं के कारण लियाकत अली मलिक की कार्यशैली को लेकर लगातार बहस होती रही है।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

घटनाक्रम के बाद मानवाधिकार से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार होता है और कानून व्यवस्था बनाए रखते समय संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।संगठनों ने निष्पक्ष जांच, पारदर्शी कार्रवाई और सभी पक्षों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने मृतकों और घायलों के परिवारों को न्याय दिलाने पर भी जोर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी निगरानी

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हुई घटनाओं ने वैश्विक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। विभिन्न देशों के सांसदों, मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है। आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम का प्रभाव क्षेत्र की राजनीति, चुनावी प्रक्रिया और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी पड़ सकता है।

चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक अनिश्चितता

आगामी चुनावों से पहले बढ़ते विरोध, प्रशासनिक कार्रवाई और हिंसक घटनाओं ने क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना दिया है। विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन लगातार अपनी-अपनी मांगों को लेकर सक्रिय हैं।फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन, राजनीतिक नेतृत्व और विरोधी संगठन आगे क्या कदम उठाते हैं तथा हालात को सामान्य बनाने के लिए कौन से उपाय अपनाए जाते हैं।