वांगचुक मामले पर राहुल गांधी का बड़ा बयान

जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को कोई भी ताकत दबा नहीं सकती। वहीं दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई को चिकित्सकीय सलाह और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप बताया।

वांगचुक मामले पर राहुल गांधी का बड़ा बयान

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 18 जुलाई 2026

दिल्ली के जंतर-मंतर पर इक्कीस दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठाने वाली आवाजों को कोई भी ताकत दबा नहीं सकती। उन्होंने सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की।


सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस का कहना है कि यह कदम चिकित्सकों की सलाह और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है और विपक्ष लगातार सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है। कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करने वाले लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए और उनकी बात सुनने का प्रयास होना चाहिए।इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सामाजिक माध्यम पर संदेश जारी करते हुए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुनना सरकार का दायित्व होता है। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।


राहुल गांधी ने सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि सरकार का व्यवहार सत्य और अहिंसा की भावना के अनुरूप नहीं दिखाई देता। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक शांतिपूर्ण तरीके से भूख हड़ताल कर रहे थे और ऐसे समय में उन्हें जंतर-मंतर से हटाया जाना उचित निर्णय नहीं कहा जा सकता। राहुल गांधी का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है और सरकार को इस अधिकार का सम्मान करना चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति या समूह अहिंसक तरीके से अपनी बात रखना चाहता है, तो सरकार को बल प्रयोग या प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय संवाद और चर्चा का रास्ता अपनाना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती इसी बात पर निर्भर करती है कि सरकार जनता की आवाज सुनने के लिए कितनी तैयार है।


शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों का भी किया उल्लेख

राहुल गांधी ने अपने संदेश में केवल सोनम वांगचुक के मुद्दे तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्होंने देश में शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, शिक्षा का खर्च तेजी से बढ़ रहा है और छात्रों की आत्महत्या जैसी घटनाएं देश के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।उनका कहना है कि इन समस्याओं पर व्यापक चर्चा और ठोस समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मूलभूत विषयों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। राहुल गांधी ने कहा कि देश का भविष्य छात्रों और युवाओं पर निर्भर करता है, इसलिए उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देना किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।


'कोई भी ताकत छात्रों की आवाज नहीं दबा सकती'

राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि देश के छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने की किसी भी कोशिश को सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि जो लोग छात्रों के भविष्य की चिंता करते हैं, वे इन मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे। राहुल गांधी के अनुसार लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे बड़ी शक्ति होती है और उसे किसी भी प्रकार के दबाव से समाप्त नहीं किया जा सकता।उन्होंने युवाओं से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए कहा कि इन समस्याओं का समाधान संवाद और सकारात्मक सोच से ही संभव है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों की समस्याओं को राजनीतिक दृष्टि से देखने के बजाय राष्ट्रीय हित के रूप में देखा जाए।


इक्कीसवें दिन बिगड़ी तबीयत, सफदरजंग अस्पताल में कराया गया भर्ती

सोनम वांगचुक पिछले इक्कीस दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे थे। लगातार अनशन और शरीर में पानी की कमी के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर होने लगी। चिकित्सकों ने स्वास्थ्य बिगड़ने की आशंका जताई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंची।अस्पताल में भर्ती होने के बाद चिकित्सकों की एक विशेष टीम उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार आवश्यक चिकित्सकीय जांच और उपचार जारी है तथा उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न न हो।


दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई को बताया चिकित्सकीय आवश्यकता

दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने का निर्णय पूरी तरह चिकित्सकीय विशेषज्ञों की सलाह और न्यायालय के निर्देशों के आधार पर लिया गया। पुलिस का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार कमजोर हो रहा था और उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक हो गया था।पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य किसी आंदोलन को रोकना नहीं बल्कि एक व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा करना था। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील भी की है।


सफदरजंग अस्पताल के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था

सोनम वांगचुक के अस्पताल पहुंचने के बाद सफदरजंग अस्पताल परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। अस्पताल के आसपास कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए और लोगों की आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी गई।प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अस्पताल में किसी प्रकार की अव्यवस्था रोकने के उद्देश्य से की गई है। वहीं समर्थकों और विभिन्न संगठनों की गतिविधियों पर भी प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।


राजनीतिक बहस के केंद्र में आया पूरा मामला

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद यह मामला अब केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बन चुका है। विपक्ष लगातार सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहा है, जबकि प्रशासन अपनी कार्रवाई को पूरी तरह स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकता और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप बता रहा है।आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच किसी प्रकार का संवाद स्थापित होता है या नहीं। साथ ही इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव क्या पड़ता है, इस पर भी पूरे देश की नजर बनी हुई है।