सबरीमाला प्रसाद के गुड़ पर क्यों मचा विवाद

सबरीमाला मंदिर के प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले गुड़ पर उठे विवाद के मामले में केरल हाईकोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड को भविष्य में सामग्री खरीदते समय अधिक सावधानी बरतने का निर्देश दिया है। अदालत के सामने पेश जांच रिपोर्टों में गुड़ की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई, लेकिन न्यायालय ने कहा कि मंदिर के लिए खरीदी जाने वाली सामग्री धार्मिक परंपराओं और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

Oct 01, 2026 - 14:32
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सबरीमाला प्रसाद के गुड़ पर क्यों मचा विवाद

दि राइजिंग न्यूज़ | केरल | 1 अक्टूबर 2026

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले गुड़ को लेकर विवाद सामने आया है। एक याचिका में प्रसाद तैयार करने के लिए कथित तौर पर ‘हलाल प्रमाणित’ गुड़ के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान केरल हाईकोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड को भविष्य में मंदिर की धार्मिक परंपराओं और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सामग्री खरीदने को लेकर विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया।

क्या है पूरा मामला

यह मामला वर्ष 2021 में दायर की गई याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता एस. जे. आर. कुमार ने सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद की सामग्री को लेकर आपत्ति जताई थी। याचिका में कहा गया था कि अरवणा और उन्नियप्पम तैयार करने में ऐसे गुड़ का इस्तेमाल किया गया, जिसकी पैकेजिंग पर हलाल प्रमाणन का निशान मौजूद था। इसके बाद इस सामग्री के इस्तेमाल को लेकर न्यायालय में सवाल उठाए गए।

अरवणा और अप्पम क्या होते हैं

सबरीमाला मंदिर में अरवणा और उन्नियप्पम श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दिए जाने वाले प्रमुख पकवानों में शामिल हैं। अरवणा लाल चावल, गुड़ और घी से तैयार किया जाने वाला पारंपरिक मीठा व्यंजन है। वहीं उन्नियप्पम चावल, गुड़ और अन्य सामग्री से तैयार करके तला जाने वाला पकवान है। दोनों प्रसाद भगवान अयप्पा को अर्पित किए जाने के बाद श्रद्धालुओं में वितरित किए जाते हैं।

याचिकाकर्ता ने क्या आपत्ति जताई

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि जिस गुड़ की पैकेजिंग पर हलाल प्रमाणन का चिह्न था, उसका इस्तेमाल मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि मंदिर में भगवान को अर्पित किए जाने वाले पदार्थ मंदिर की धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के अनुरूप होने चाहिए। इसी आधार पर याचिका में ऐसे गुड़ के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

केरल हाईकोर्ट की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड को भविष्य में सामग्री खरीदते समय अधिक सावधानी बरतने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि प्रसाद और भगवान को अर्पित किए जाने वाले पदार्थों के लिए खरीदी जाने वाली सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों के साथ-साथ मंदिर पर लागू धार्मिक परंपराओं और आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। अदालत ने भविष्य की खरीद प्रक्रिया में आवश्यक शर्तें शामिल करने पर भी जोर दिया।

महाराष्ट्र की कंपनी ने की थी गुड़ की आपूर्ति

अदालत के सामने रखी गई जानकारी के अनुसार, देवस्वोम बोर्ड ने बड़ी मात्रा में गुड़ खरीदने के लिए निविदा प्रक्रिया अपनाई थी। महाराष्ट्र की वर्धन एग्रो प्रोसेसिंग लिमिटेड सफल बोलीदाता बनी थी और उसे करीब 19,96,034 किलोग्राम गुड़ का चूर्ण उपलब्ध कराना था। न्यायालय के अनुसार, यह कंपनी कुछ पश्चिम एशियाई देशों में भी गुड़ का निर्यात करती थी।

पैकेजिंग पर क्यों था हलाल प्रमाणन

न्यायालय के सामने प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, संबंधित कंपनी पश्चिम एशियाई देशों में गुड़ का निर्यात करती थी और इसी निर्यात के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पैकेजिंग पर हलाल प्रमाणन का चिह्न मौजूद था। अदालत ने यह भी कहा कि मंदिर के लिए खरीदी गई सामग्री पर ऐसे चिह्न, निशान या घोषणाएं नहीं होनी चाहिए थीं, जिनसे मंदिर की धार्मिक परंपराओं के साथ टकराव की आशंका पैदा हो।

गुड़ की गुणवत्ता को लेकर क्या सामने आया

इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि न्यायालय के सामने पेश की गई जांच रिपोर्टों में गुड़ की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई। परीक्षण में ऐसा कोई पदार्थ या तत्व नहीं मिला, जिसके कारण उसे प्रसाद तैयार करने के लिए अनुपयुक्त माना जाए। यानी अदालत के सामने उपलब्ध जांच रिपोर्टों के आधार पर विवादित गुड़ को खाद्य गुणवत्ता के लिहाज से खराब या दूषित नहीं पाया गया।

आगे के लिए क्या निर्देश दिए गए

केरल हाईकोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए देवस्वोम बोर्ड को भविष्य में सामग्री खरीदते समय अधिक सावधानी बरतने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि निविदा दस्तावेजों में ऐसी आवश्यक शर्तें शामिल की जाएं, जिससे भगवान को चढ़ाए जाने वाले नैवेद्य और श्रद्धालुओं को दिए जाने वाले प्रसाद की सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों तथा मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुरूप हो।

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