"शेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 650 अंक लुढ़का
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 650 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,200 के नीचे पहुंच गया। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये की कमजोरी और बैंकिंग क्षेत्र में बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव देखने को मिला।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 20 जुलाई 2026
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में निवेशकों को भारी झटका लगा और बाजार की शुरुआत से लेकर कारोबार समाप्त होने तक बिकवाली का दबाव लगातार बना रहा। सोमवार को बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 650 अंक से अधिक टूट गया, जबकि राष्ट्रीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। दिनभर निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना रहा, जिसके कारण लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। सबसे अधिक दबाव बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी और वाहन क्षेत्र के शेयरों पर देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी बाजारों की कमजोरी और रुपये में गिरावट ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया, जिसके चलते बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली देखने को मिली।
सप्ताह के पहले दिन भारी दबाव में रहा बाजार
सोमवार सुबह बाजार खुलते ही कमजोरी के संकेत मिलने लगे थे। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में पहुंच गए और समय बढ़ने के साथ गिरावट और गहरी होती चली गई। कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन गया। कारोबार के दौरान अधिकांश समय दोनों प्रमुख सूचकांक निचले स्तर पर बने रहे और दिन के अंत तक सेंसेक्स 650 अंक से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी 24,200 के नीचे फिसल गया। इस गिरावट का असर छोटे और मझोले आकार की कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला, जहां निवेशकों ने लगातार बिकवाली की।बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में निवेशक काफी सतर्क रुख अपना रहे हैं। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बढ़ती अनिश्चितता, महंगाई का दबाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों का जोखिम उठाने का भरोसा कमजोर पड़ा है। यही कारण रहा कि अधिकांश क्षेत्रों में खरीदारी की तुलना में बिकवाली अधिक देखने को मिली और बाजार पूरे दिन दबाव में रहा।
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमत बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में दुनिया भर के निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला और निवेशकों ने कई क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी कम करनी शुरू कर दी।इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भी निवेशकों की चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। ब्रेंट कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों की आर्थिक चिंता बढ़ गई है। महंगा कच्चा तेल परिवहन, उत्पादन और अन्य आवश्यक सेवाओं की लागत बढ़ा सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। यदि महंगाई बढ़ती है तो कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव शेयर बाजार पर दिखाई देता है।
बैंकिंग क्षेत्र में सबसे ज्यादा बिकवाली
सोमवार के कारोबार में सबसे अधिक दबाव बैंकिंग क्षेत्र पर देखने को मिला। कई प्रमुख निजी और सरकारी बैंकों के पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे। परिणामों से निराश निवेशकों ने बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू कर दी, जिससे इस क्षेत्र के अधिकांश प्रमुख शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।बैंकिंग क्षेत्र का भारतीय शेयर बाजार में महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए जब इस क्षेत्र में बड़ी गिरावट आती है तो उसका असर पूरे बाजार पर दिखाई देता है। बैंकिंग सूचकांक में कमजोरी आने से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर अतिरिक्त दबाव बना रहा। इसके साथ ही वित्तीय सेवाओं से जुड़ी अन्य कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली, जिससे बाजार का माहौल और कमजोर हो गया।
रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की चिंता
घरेलू मुद्रा रुपये में आई कमजोरी भी बाजार पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रही। रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है, जिससे कच्चा माल आयात करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ने की संभावना रहती है। इसके अलावा सरकारी और निजी ऋण प्रतिफल में बढ़ोतरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है, क्योंकि इससे निवेश का वातावरण प्रभावित होता है।ऐसी परिस्थितियों में विदेशी निवेशक आमतौर पर जोखिम वाले निवेश से दूरी बना लेते हैं और अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर सोमवार के कारोबार में साफ दिखाई दिया। विदेशी पूंजी के बाहर जाने से बाजार में नकदी का प्रवाह प्रभावित होता है और इसका सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ता है।
कुछ क्षेत्रों ने बाजार को दिया सीमित सहारा
जहां एक ओर बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी और वाहन क्षेत्र के शेयरों में लगातार दबाव बना रहा, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा और औषधि क्षेत्र के कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में निवेशकों ने सीमित खरीदारी की, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला। हालांकि इन क्षेत्रों की मजबूती इतनी प्रभावी नहीं रही कि वह पूरे बाजार की गिरावट को रोक सके।बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के आगामी वित्तीय परिणामों पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और आर्थिक संकेतकों में सुधार देखने को मिलता है, तो बाजार में फिर से स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय सोच-समझकर निवेश करने और बाजार की परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।