आप समय बर्बाद कर रहे हैं", सर्वोच्च न्यायालय की फटकार!

जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा, जहां एक अधिवक्ता ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सुधार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को भंग करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के पक्ष में हस्तक्षेप की अपील की। हालांकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि प्रत्येक प्रशासनिक या कानून-व्यवस्था से जुड़े मामले में सीधे सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप आवश्यक नहीं होता। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि इस प्रकार की याचिकाओं से न्यायालय का बहुमूल्य समय व्यर्थ होता है। फिलहाल छात्रों को कोई न्यायिक राहत नहीं मिली है और आंदोलन अपनी मांगों को लेकर जारी है।

आप समय बर्बाद कर रहे हैं", सर्वोच्च न्यायालय की फटकार!

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026

जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मामला बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सुधार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को भंग करने की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच एक अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। हालांकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि इस प्रकार की याचिकाओं के माध्यम से न्यायालय का समय व्यर्थ नहीं किया जाना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक प्रशासनिक या कानून-व्यवस्था से जुड़े मामले में सीधे सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप आवश्यक नहीं होता।


जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप से किया इनकार

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन का मामला बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया। आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर एक अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष तत्काल सुनवाई की मांग की। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह उनके मौलिक अधिकारों से जुड़ा विषय है और इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने छात्रों की ओर से कई तर्क रखे, लेकिन पीठ ने इस विषय में किसी भी प्रकार का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के मामलों को बिना उचित प्रक्रिया अपनाए सीधे सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लाना न्यायिक समय का उचित उपयोग नहीं है। पीठ की इस टिप्पणी के बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया।


पुलिस कार्रवाई को लेकर अधिवक्ता ने क्या दलील दी

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना था कि प्रदर्शन का उद्देश्य राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करना और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से छात्रों में भय और असंतोष का वातावरण पैदा हुआ है।अधिवक्ता ने यह भी कहा कि छात्रों का आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। उनका तर्क था कि यदि छात्रों की आवाज को इस प्रकार दबाया जाएगा तो इससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसी आधार पर उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और छात्रों को राहत देने का अनुरोध किया।


सर्वोच्च न्यायालय ने क्या कहा

अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि प्रत्येक घटना को सीधे सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लाना उचित नहीं माना जा सकता। यदि किसी मामले में वैधानिक प्रक्रिया उपलब्ध है, तो पहले उसी का पालन किया जाना चाहिए।सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिवक्ता से कहा कि इस प्रकार की याचिकाओं से न्यायालय का समय व्यर्थ होता है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय केवल उन मामलों में हस्तक्षेप करता है जहां संवैधानिक या विधिक रूप से तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक हो। इस टिप्पणी के साथ न्यायालय ने मामले में कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।


छात्र किन मांगों को लेकर कर रहे हैं प्रदर्शन

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांग राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करना है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय होनी चाहिए ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो। उनका मानना है कि हाल के वर्षों में सामने आए विवादों ने लाखों विद्यार्थियों का भरोसा कमजोर किया है।इसके अलावा प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को समाप्त करने की मांग भी उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा संचालन और परिणामों से जुड़े विवादों के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि परीक्षा संचालन के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिस पर सभी अभ्यर्थियों का विश्वास कायम हो सके।


जंतर-मंतर आंदोलन क्यों बना राष्ट्रीय बहस का विषय

जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है। विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और कई राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। आंदोलन के कारण शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य को लेकर पूरे देश में बहस तेज हो गई है।यदि परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों का विश्वास लगातार कमजोर होता है तो इसका असर देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि यह आंदोलन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार की व्यापक मांग के रूप में भी देखा जा रहा है।


आगे क्या हो सकता है

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप से इनकार किए जाने के बाद फिलहाल छात्रों को न्यायिक स्तर पर कोई तत्काल राहत नहीं मिली है। हालांकि, आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों ने संकेत दिए हैं कि वे अपनी मांगों को लेकर आगे भी प्रदर्शन जारी रखेंगे। यदि सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत होती है तो समाधान की दिशा में कोई नया रास्ता निकल सकता है।वहीं प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर कोई ठोस निर्णय सामने आता है। फिलहाल यह मामला देश की सबसे चर्चित शिक्षा और छात्र आंदोलनों में शामिल हो चुका है।