सील अस्पताल को नए नाम से चलाने के पर कार्रवाई:घूस मांगने के आरोपी ACMO से चार्ज छीना, डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने दैनिक भास्कर स्टिंग का संज्ञान लिया
सील किए गए अस्पताल को नए नाम से दोबारा संचालित कराने के खेल और इसके लिए 3.50 लाख रुपये घूस मांगने के आरोपों के मामले में दैनिक भास्कर की खबर का असर हुआ है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में कार्रवाई शुरू हो गई है। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने भास्कर के इनवेस्टिगेशन का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच के आदेश दिए हैं और एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। वहीं, डीजी हेल्थ चिकित्सा एवं परिवार कल्याण डॉ. पवन कुमार ने आरोपी एसीएमओ डॉ. नरेंद्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेज दिया है। इसके साथ ही आरोपी एसीएमओ से नर्सिंगहोम का चार्ज वापस ले लिया गया है। संबंधित पटल सहायक को भी बदल दिया गया है। मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी घनश्याम मीणा के निर्देश पर सीडीओ कृतिराज के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। टीम वायरल वीडियो और घूस मांगने के आरोपों से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी। शहर के शेखपुर नरी स्थित उत्तम हॉस्पिटल को जुलाई में एक युवती की हत्या के मामले के बाद सील किया गया था। गुरुवार को दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें एसीएमओ कथित तौर पर अस्पताल का नाम बदलकर नया पंजीकरण कराने और उसे दोबारा संचालित करने को लेकर बातचीत करते सुनाई दे रहे हैं। इसी वीडियो के आधार पर 3.50 लाख रुपये घूस मांगने के आरोप लगाए गए हैं। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर पर तीन सदस्यीय टीम से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि जनमानस के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले और सील अस्पतालों का अवैध संचालन करने वालों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ACMO से छीना नर्सिंगहोम का चार्ज मामले के तूल पकड़ने के बाद डीजी हेल्थ डॉ. पवन कुमार ने सीएमओ डॉ. एके शर्मा को आरोपी एसीएमओ डॉ. नरेंद्र से नर्सिंगहोम का चार्ज वापस लेने के निर्देश दिए। इसके बाद यह जिम्मेदारी उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मनीष मिश्रा को सौंप दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंगहोम से संबंधित पटल पर भी बदलाव किया है। पहले यह जिम्मेदारी अखिल सक्सेना के पास थी, जिसे अब संतोष श्रीवास्तव को सौंप दिया गया है। एसीएमओ से चार्ज वापस लेने और पटल सहायक बदलने को मामले में विभाग की शुरुआती बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। आरोपों को निराधार बता रहे ACMO आरोपी एसीएमओ ने घूस मांगने के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि संबंधित अस्पताल अभी भी सील है और उसे दोबारा लाइसेंस नहीं दिया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में रकम मांगने की बात नहीं है, बल्कि अस्पताल का नया नाम बताने के लिए कहा गया था। एसीएमओ ने वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है। ------------------------------------------------------ पूरी इन्वेस्टिगेशन पढ़िए… सील अस्पताल खोलने के लिए डॉक्टर ने मांगे 3 लाख: मालिक बनकर CMO ऑफिस पहुंचा रिपोर्टर; यूपी में खुफिया कैमरे में डील गलत इलाज से मरीज की मौत हो जाती है… अस्पताल में रेप और मर्डर भी हो जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इनको सील कर देते हैं। लेकिन, कुछ दिनों बाद पैसे लेकर ये ‘दागदार’ अस्पताल नए नाम से फिर शुरू हो जाते हैं। ऐसा करके स्वास्थ्य विभाग के अफसर मरीजों की जिंदगी का सौदा कर रहे हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने इस खेल को एक्सपोज करने के लिए उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और उन्नाव में इनवेस्टिगेशन किया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
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