आज कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत

जंतर-मंतर पर जारी सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन उन्नीसवें दिन भी जारी रहा। लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत कमजोर हुई है, लेकिन उन्होंने साफ कहा है कि वह अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। उन्होंने समर्थकों से बीस जुलाई को होने वाले "चलो संसद" मार्च में शामिल होकर आंदोलन को मजबूत बनाने की अपील की है, जबकि चिकित्सकों ने सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने का अनुरोध किया है।

आज कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 16 जुलाई 2026

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के पक्षधर सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन लगातार जारी है। गुरुवार को उनका यह आंदोलन उन्नीसवें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार उपवास के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर होती जा रही है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी परिस्थिति में अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि जनता और देश के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के लिए किया जा रहा है।सोनम वांगचुक ने देर रात जारी अपने संदेश में कहा कि उनकी तबीयत पहले जैसी नहीं है, लेकिन उनका मनोबल पूरी तरह मजबूत है। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए न कहें, बल्कि आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए बीस जुलाई को प्रस्तावित "चलो संसद" मार्च में बड़ी संख्या में शामिल हों। उनका कहना है कि जनसमर्थन ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार है।


उन्नीस दिनों के अनशन से काफी कमजोर हुए सोनम वांगचुक

लगातार उन्नीस दिनों तक भोजन का त्याग करने के कारण सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर स्पष्ट असर दिखाई देने लगा है। चिकित्सकों के अनुसार पिछले चौबीस घंटों में उनका वजन लगभग चार सौ ग्राम और अनशन शुरू होने के बाद अब तक कुल आठ दशमलव नौ किलोग्राम कम हो चुका है। वर्तमान में उनका वजन लगभग सत्तावन दशमलव पंद्रह किलोग्राम दर्ज किया गया है, जो सामान्य स्थिति की तुलना में काफी कम माना जा रहा है।इसके बावजूद सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि उनका संकल्प पहले से भी अधिक मजबूत है। उनका मानना है कि यदि किसी जनहित के मुद्दे के लिए त्याग करना पड़े तो वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि जनता की मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखना है।


चिकित्सकों की निगरानी में लगातार चल रहा उपचार

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए चिकित्सकों की एक विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। चिकित्सकीय जांच के अनुसार उनका रक्तचाप सामान्य सीमा से थोड़ा नीचे दर्ज किया गया है, जबकि रक्त में शर्करा का स्तर और शरीर में प्राणवायु की मात्रा फिलहाल नियंत्रित बताई गई है। इसके बावजूद डॉक्टरों ने उन्हें चौबीस घंटे चिकित्सकीय निगरानी में रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जा सके।चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण शरीर की ऊर्जा लगातार कम होती जा रही है। यदि अनशन और लंबा चला तो स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। हालांकि फिलहाल वह मानसिक रूप से पूरी तरह सचेत हैं और सभी निर्णय स्वयं लेने की स्थिति में हैं।


डॉक्टरों ने सरकार से बातचीत की अपील की

सोनम वांगचुक का उपचार कर रहे चिकित्सकों ने सरकार से अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए। उनका कहना है कि सोनम वांगचुक देश के सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ताओं में शामिल हैं और उनके स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही उचित नहीं होगी। डॉक्टरों का मानना है कि आंदोलन समाप्त कराने का सबसे बेहतर रास्ता संवाद और सकारात्मक बातचीत है।चिकित्सकों ने यह भी कहा कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो लगातार गिरती शारीरिक स्थिति चिंता का विषय बन सकती है। उन्होंने सरकार और आंदोलनकारियों के बीच शांतिपूर्ण वार्ता का रास्ता अपनाने की सलाह दी ताकि स्थिति सामान्य हो सके और किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।


समर्थकों से की "चलो संसद" मार्च में शामिल होने की अपील

सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में समर्थकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह न करे। यदि लोग वास्तव में उनके आंदोलन का समर्थन करना चाहते हैं तो उन्हें बीस जुलाई को आयोजित होने वाले "चलो संसद" मार्च में भाग लेना चाहिए। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन ही समाज में सकारात्मक बदलाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।उन्होंने लोगों से अनुशासन बनाए रखने और पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील भी की। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं बल्कि सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी भागीदारी निभाएंगे।


आंदोलन को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन

जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन लगातार मिल रहा है। बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचकर सोनम वांगचुक के प्रति अपना समर्थन व्यक्त कर रहे हैं और उनकी मांगों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। सामाजिक माध्यमों पर भी इस आंदोलन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत नहीं होती है तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है।


महत्वपूर्ण बिंदु

  • सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन उन्नीसवें दिन में पहुंचा।
  • लगातार उपवास के कारण अब तक लगभग नौ किलोग्राम वजन कम हुआ।
  • चिकित्सकों की निगरानी में लगातार स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।
  • सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने से स्पष्ट इनकार किया।
  • समर्थकों से बीस जुलाई के "चलो संसद" मार्च में शामिल होने की अपील की।
  • डॉक्टरों ने सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने का आग्रह किया।
  • आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और युवाओं का समर्थन मिल रहा है।