सरकारी अस्पताल से निजी में ले जाने का आरोप:आशा कार्यकर्ता पर लगे आरोप, 20 हजार में प्रसव का भरोसा देकर 35 हजार मांगे

Oct 25, 2026 - 18:16
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सरकारी अस्पताल से निजी में ले जाने का आरोप:आशा कार्यकर्ता पर लगे आरोप, 20 हजार में प्रसव का भरोसा देकर 35 हजार मांगे
सोनभद्र में म्योरपुर के सरकारी अस्पताल में प्रसव के लिए पहुंची गर्भवती महिला को निजी अस्पताल में भर्ती कराने और इलाज के खर्च को लेकर विवाद सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन और दवाओं समेत 20 हजार रुपये में पूरा इलाज कराने का भरोसा देकर महिला को राबर्ट्सगंज स्थित ओम अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन प्रसव के बाद डिस्चार्ज के समय 35 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया। मामले की जानकारी होने पर निजी चिकित्सालय के नोडल अधिकारी डॉ. गुलाब शंकर यादव ने अस्पताल के स्टाफ से बातचीत की, जिसके बाद मामला सुलझ गया। हालांकि, पीड़ित परिवार ने सीएमओ को प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। म्योरपुर के परारी निवासी सोनू कुमार ने बताया कि उन्होंने14 अक्टूबर को अपनी पत्नी सुषमा को प्रसव के लिए म्योरपुर स्थित सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया था। आरोप है कि वहां मौजूद एक आशा कार्यकर्ता ने 16 अक्टूबर को लोढ़ी मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने की बात कहकर उन्हें राबर्ट्सगंज स्थित ओम अस्पताल पहुंचा दिया।उसी दिन उनकी पत्नी का प्रसव कराया गया। पूरा इलाज कराने की बात कही सोनू के मुताबिक,आशा कार्यकर्ता ने ऑपरेशन और दवाओं समेत 20 हजार रुपये में पूरा इलाज होने की बात कही थी। इसी भरोसे पर उन्होंने निजी अस्पताल में इलाज कराने का निर्णय लिया।परिजनों का कहना है कि शुरुआत में10 हजार रुपये जमा किए गए, लेकिन डिस्चार्ज के समय अस्पताल प्रबंधन ने 35 हजार रुपये की मांग की। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने मुश्किल खड़ी हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि अतिरिक्त रकम नहीं होने के कारण छुट्टी कराने में परेशानी हुई।इलाज के लिए किसी तरह पैसों का इंतजाम किया गया,जबकि आने-जाने में भी करीब तीन हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। उन्होंने अस्पताल में दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप भी लगाया। परिजनों ने सवाल उठाया कि जब सरकारी अस्पताल में प्रसव की व्यवस्था थी,तो गर्भवती को निजी अस्पताल क्यों ले जाया गया। उन्होंने सीएमओ से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने,इलाज के खर्च का स्पष्ट ब्योरा उपलब्ध कराने और मरीज को अनावश्यक रूप से रोके जाने के आरोप की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ रमेश कुमार मिश्रा ने बताया प्रकरण मेरे संज्ञान में आया है,जानकारी मे परिजन पहले मेडिकल कॉलेज गए थे वहां से किसी के द्वारा बहला फुसलाकर प्राइवेट अस्पताल में पहुंचाया गया है यदि परिजनों की तरफ से कोई तहरीर मिलती है तो अस्पताल पर करवाई होगी फिलहाल अभी कोई तहरीर नही मिली है।

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