धर्मेंद्र प्रधान इतने अहम क्यों' सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर अभिजीत दीपके का बड़ा सवाल

पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 25वें दिन में पहुंच गई है। इस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए पूछा कि अब तक सोनम वांगचुक से बातचीत क्यों नहीं की गई। उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उनके बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

धर्मेंद्र प्रधान इतने अहम क्यों' सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर अभिजीत दीपके का बड़ा सवाल

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026

पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 25वें दिन में प्रवेश कर गई है। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई सवाल पूछते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब तक सोनम वांगचुक से बातचीत क्यों नहीं की गई, छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई क्यों की और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अब भी अपने पद पर क्यों बने हुए हैं। उनके बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है।


सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने बढ़ाया सियासी तापमान, अभिजीत दीपके ने सरकार से मांगे जवाब

देश में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी आंदोलन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 25 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। उनकी लगातार जारी हड़ताल को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई सवाल पूछे हैं और सरकार की चुप्पी पर चिंता जताई है।अभिजीत दीपके का कहना है कि जब देश के लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हो और एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता लगातार 25 दिनों से अनशन कर रहा हो, तब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित करे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और न ही समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से क्या पूछा अभिजीत दीपके ने

अभिजीत दीपके ने अपने सामाजिक माध्यम पर जारी संदेश में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल चुनाव जीतने और सरकार चलाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक होती है। उन्होंने कहा कि जब देशभर के छात्र परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं, तब सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि आखिर 25 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से अब तक किसी भी स्तर पर बातचीत क्यों नहीं की गई। उनका कहना था कि यदि समय रहते सरकार आंदोलनकारियों से संवाद करती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं बनती और भूख हड़ताल को समाप्त कराने का रास्ता निकाला जा सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही किसी भी विवाद का सबसे प्रभावी समाधान होता है।


छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर सरकार को घेरा

अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्र लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ सख्ती बरती गई।उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर बल प्रयोग और कठोर पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना था कि यदि छात्र अपनी शिक्षा और भविष्य को लेकर आवाज उठा रहे हैं, तो सरकार को उनके साथ बातचीत करनी चाहिए, न कि उन्हें बलपूर्वक हटाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने इसे युवाओं की भावनाओं की अनदेखी बताया।


धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी पूछे तीखे सवाल

अपने बयान में अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार विवाद सामने आने के बावजूद सरकार ने अब तक कोई बड़ा प्रशासनिक कदम नहीं उठाया है। इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब परीक्षा प्रणाली को लेकर इतने गंभीर आरोप लग रहे हैं और लाखों छात्र प्रभावित हो रहे हैं, तब भी धर्मेंद्र प्रधान सरकार के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों बने हुए हैं। उन्होंने सरकार से इस विषय पर स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि जनता जानना चाहती है कि जिम्मेदारी तय करने की दिशा में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।


परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग क्यों हो रही है

पेपर लीक की घटनाओं और परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद छात्र संगठन लगातार व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है, जिससे लाखों मेहनती विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है।आंदोलनकारी चाहते हैं कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाया जाए। इसके साथ ही वे ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके।


राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को लेकर भी उठ रही हैं मांगें

आंदोलन कर रहे कई छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा संचालन को लेकर लगातार विवाद सामने आए हैं, जिससे छात्रों का विश्वास कमजोर हुआ है।कुछ संगठन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को भंग करने और उसकी जगह नई एवं अधिक पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि केवल छोटे सुधारों से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी प्रणाली में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है।


राजनीतिक बयानबाजी क्यों हुई तेज

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल लंबी होने के साथ-साथ इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ गई है। विपक्षी दल लगातार सरकार से बातचीत शुरू करने और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील कर रहे हैं।वहीं सरकार की ओर से अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसी कारण यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक इस पर चर्चा और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।


आगे क्या हो सकता है

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल लगातार जारी है और इसे लेकर छात्रों, अभिभावकों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों की चिंता भी बढ़ रही है। यदि सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत शुरू करती है तो विवाद के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल हो सकती है। हालांकि, फिलहाल ऐसी किसी औपचारिक वार्ता की घोषणा नहीं की गई है। परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे का समाधान केवल संवाद और पारदर्शी निर्णयों के माध्यम से ही संभव है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और आंदोलनकारियों की अगली रणनीति इस पूरे आंदोलन की दिशा तय करेगी।