पेपर लीक बिल पर संसद में घमासान
पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए विधेयक को लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी टकराहट देखने को मिली। विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। सरकार इसे विद्यार्थियों के हित में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहा है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026
संसद के मानसून सत्र में मंगलवार का दिन पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए कड़े विधेयक और विपक्ष के तीखे विरोध के नाम रहा। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्षी दलों ने छात्र आंदोलन, प्रदर्शनकारियों पर कथित कार्रवाई और परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया। लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए कि पेपर लीक के खिलाफ प्रस्तावित कानून पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
संसद में शुरू होते ही गरमाया माहौल, विपक्ष ने खोला मोर्चा
मानसून सत्र के छठे दिन जैसे ही लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। विपक्ष के सांसदों ने छात्र आंदोलन, परीक्षा अनियमितताओं और प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग के मुद्दे उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। सदन में नारेबाजी और विरोध के कारण सामान्य कार्यवाही प्रभावित होती दिखाई दी।विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे में केवल नया कानून लाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। विपक्षी नेताओं ने कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेने के बजाय सरकार राजनीतिक बचाव में लगी हुई है।
लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित
सदन में बढ़ते शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से शांति बनाए रखने और चर्चा में भाग लेने की अपील की। हालांकि विपक्ष अपने मुद्दों पर अड़ा रहा और लगातार विरोध जारी रहा। स्थिति सामान्य न होते देख लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।राज्यसभा में भी लगभग यही स्थिति देखने को मिली। विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए जोरदार हंगामा किया। सदन में व्यवस्थित चर्चा संभव नहीं होने के कारण राज्यसभा की कार्यवाही भी दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इससे एक बार फिर संसद के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक दूरी साफ दिखाई दी।
पेपर लीक रोकने के लिए सरकार का बड़ा दांव
केंद्र सरकार का कहना है कि नया विधेयक परीक्षा अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। सरकार के अनुसार इसमें ऐसे लोगों और गिरोहों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान किया गया है जो परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। सरकार का दावा है कि यह कानून विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। इसी कारण एक मजबूत कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई। सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने के बाद परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत होगा।
विपक्ष ने छात्र आंदोलन और कार्रवाई पर उठाए गंभीर प्रश्न
विपक्षी दलों ने संसद के भीतर छात्र आंदोलन से जुड़े घटनाक्रमों को प्रमुखता से उठाया। कई सांसदों ने प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुननी चाहिए।विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर सरकार समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठा सकी। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक केवल कानून बनाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाएगा।
सत्ता पक्ष का पलटवार, कहा- छात्रों के हित में है कानून
सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया और कहा कि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार समर्थक सांसदों ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने देशभर के विद्यार्थियों को प्रभावित किया है और इसी कारण सरकार सख्त कानून लेकर आई है। उनका दावा है कि विपक्ष को हंगामे के बजाय चर्चा में भाग लेना चाहिए।सत्ता पक्ष के नेताओं ने यह भी कहा कि संसद लोकतांत्रिक बहस का मंच है और ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर सभी दलों को रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उनका मानना है कि नए कानून से परीक्षा माफियाओं और संगठित गिरोहों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा तथा योग्य विद्यार्थियों के साथ होने वाले अन्याय को रोका जा सकेगा।
प्रियंका गांधी के बयान पर भी टिकी निगाहें
संसद की कार्यवाही के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी पेपर लीक से जुड़े विधेयक पर अपनी बात रख सकती हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह मजबूती से उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विषय पर और अधिक तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस मुद्दे को विद्यार्थियों के भविष्य से जोड़कर प्रस्तुत कर रहे हैं। इसी कारण संसद का यह सत्र केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और राजनीतिक संघर्ष का बड़ा मंच बनता जा रहा है।