स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:हम सभी एक-दूसरे पर निर्भर हैं, जानिए दूसरों के साथ हमारा भला कैसे हो सकता है
इस संसार में मनुष्य सहित सभी जीव-जंतु, पेड़-पौधे और सूक्ष्म जीव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। प्रकृति में किसी भी प्राणी का अस्तित्व पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है, सभी का जीवन एक-दूसरे पर निर्भर है। प्रकृति में प्रत्येक जीव का अपना विशेष महत्व और स्थान है। जानिए हम अपना कल्याण यानी भला कैसे कर सकते हैं… 1. संसार में रहने वाले सभी जीवों की संरचना, प्रकृति और आवश्यकताएं अलग-अलग हैं, फिर भी सभी एक ही प्राकृतिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। यही विविधता में एकता का सुंदर उदाहरण है। 2. प्रत्येक जीव प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में योगदान देता है। पेड़-पौधे हमें ऑक्सीजन देते हैं और विभिन्न जीव खाद्य श्रृंखला को बनाए रखते हैं। इस प्रकार सभी जीव मिलकर प्रकृति में संतुलन स्थापित करते हैं। 3. मनुष्य भोजन, जल, वायु और औषधियों के लिए प्रकृति पर निर्भर है। इसी प्रकार प्रकृति के अन्य जीवों का जीवन भी दूसरे जीवों पर निर्भर करता है। यह परस्पर सहयोग जीवन के विकास का आधार है। 4. हमें सभी जीवों के प्रति प्रेम, करुणा, सम्मान और संवेदनशीलता का भाव रखना चाहिए। हमारा कर्तव्य है कि हम अन्य प्राणियों की भी रक्षा करें और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखे। वास्तव में सभी के कल्याण के साथ ही हमारा भी कल्याण होता है। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर दिए गए फोटो पर क्लिक करें।
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