नगर निगम की बोर्ड मीटिंग से नदारद रहे मेयर:भाजपा पार्षद बोले दे देना चाहिए इस्तीफा, उप सभापति ने कहा बेटे का स्वास्थ्य है खराब

Nov 04, 2026 - 06:56
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नगर निगम की बोर्ड मीटिंग से नदारद रहे मेयर:भाजपा पार्षद बोले दे देना चाहिए इस्तीफा, उप सभापति ने कहा बेटे का स्वास्थ्य है खराब
करीब 6 महीने इंतजार के बाद मंगलवार को मथुरा वृंदावन नगर निगम की बोर्ड बैठक आयोजित की गई। लेकिन इस मीटिंग से मेयर विनोद अग्रवाल का मौजूद न रहना चर्चा का विषय बन गया। पार्षदों ने कहा कि यह मीटिंग चर्चा के लिए बुलाई थी तो एजेंडा क्यों दिया और बोर्ड मीटिंग है तो फिर मेयर के बिना यह कैसे हो सकती है। मेयर की गैर मौजूदगी से भाजपा पार्षद भी न खुश नजर आए। भाजपा पार्षद ने कहा जब कोई संगठन नहीं चला सकता तो उनको इस्तीफा दे देना चाहिए। मीटिंग में दिया एजेंडा मंगलवार को नगर निगम के सदन में एक बैठक बुलाई गई। पार्षदों को नगर आयुक्त ओजस्वी राज की तरफ से एक पत्र भेजा गया। जिसमें कहा गया कि जनहित के बिंदुओं पर विचार विमर्श चर्चा हेतु 3 नवंबर को एक बैठक आहूत की गई है। इस पत्र पर मंगलवार को चुने हुए और मनोनीत पार्षद बैठक में भाग लेने नगर निगम पहुंचे। नगर निगम के सदन में जब बैठक शुरू हुई तो सभी को 34 बिंदुओं वाला एजेंडा दे दिया गया। अचानक मिले एजेंडा को देख पार्षद सकते में आ गए और कहने लगे कि यह बोर्ड मीटिंग है या विचार विमर्श के लिए बुलाई बैठक। मेयर के गैरमौजूदगी पर उठे सवाल पार्षद घनश्याम चौधरी और संतोष पाठक ने सदन में कहा कि अगर यह बोर्ड मीटिंग थी तो एजेंडा 72 घंटे पहले क्यों नहीं दिया गया। कांग्रेस,सपा और कुछ भाजपा के पार्षदों ने सवाल किए कि बैठक में मेयर विनोद अग्रवाल क्यों नहीं मौजूद हैं। मेयर जब मीटिंग में नहीं है तो यह बोर्ड मीटिंग कैसे हो सकती है। इसको लेकर हंगामा बढ़ा तो उप सभापति मुकेश सारस्वत और आयुक्त ओजस्वी राज ने किसी तरह आक्रोशित हो रहे पार्षदों को शांत किया। जिसके बाद बैठक की कार्यवाही शुरू हुई। या तो अपना काम करें या इस्तीफा दें बोर्ड मीटिंग की कार्यवाही आगे बढ़ी तो भाजपा के औरंगाबाद द्वितीय के पार्षद गुलवीर चौधरी ने माइक उठाते हुए कहा कि मेयर या तो काम करें नहीं तो इस्तीफा दें। इसको लेकर भाजपा के कुछ पार्षदों ने विरोध जताया जिसके बाद गुलवीर चौधरी ने कहा अगर उनकी बात नहीं सुननी तो वह सदन से बाहर जा रहे हैं। इसके बाद कुछ पार्षद नारेबाजी करते हुए सदन के पटल तक आ गए। सदन में गहमा गहमी बढ़ गई। पार्षदों ने की नारेबाजी करीब 5 मिनट तक सदन में हंगामा चल तो कुछ पार्षद प्रदर्शन और नारेबाजी करते हुए मीटिंग से बाहर निकल आए। पार्षदों का कहना था नगर निगम में तानाशाही चल रही है। वार्ड 17 से भाजपा पार्षद बृजेश खरे ने कहा कि हमको परिचर्चा बैठक के लिए बुलाया गया था,लेकिन जब अंदर पहुंचे तो हमारे हाथ में यह एजेंडा दे दिया गया। यह पार्षदों के साथ धोखा किया गया है। उन्होंने कहा बिना महापौर की अध्यक्षता के इस बैठक को कैसे स्वीकार करें। वार्ड 55 के पार्षद विवेक पाराशर ने आरोप लगाया कि महापौर अधिकारियों के भ्रष्टाचार से आहत होकर इस मीटिंग में आना नहीं चाहते हैं। वार्ड 40 के पार्षद कन्हैया ने कहा कि नगर आयुक्त बताएं कि मेयर क्यों नहीं आए। क्यों नहीं रहे मौजूद मेयर जवाब वही दे सकते हैं बोर्ड मीटिंग में मेयर विनोद अग्रवाल के मौजूद न रहने पर उप सभापति मुकेश सारस्वत ने कहा कि इसका जवाब उनसे बेहतर तो मेयर ही दे सकते हैं। मुकेश सारस्वत ने कहा 6 महीने से विकास कार्य लटके हुए हैं, विकास कार्यों को गति मिल सके इसीलिए यह मीटिंग की गई है। उप सभापति ने माना कि जो मुखिया होते हैं वह अनुपस्थित रहते हैं तो परेशानियां तो निश्चित रूप से आती हैं। नगर आयुक्त ओजस्वी राज ने कहा कि वह मेयर से मिलकर मुलाकात करेंगे और अनुपस्थिति का कारण पूछेंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि हो सकता है बेटे की सर्जरी हुई है जिसकी बजह से शायद वह नहीं आए हों। मेयर गड़बड़झाला कर रहे भाजपा पार्षद गुलवीर चौधरी ने मेयर विनोद अग्रवाल की अनुपस्थिति पर कहा कि वह क्या गड़बड़झाला कर रहे हैं। पहले निवेदन किया कि आ जाओ,बोर्ड मीटिंग 6 महीने से नहीं हुई। विकास कार्य उनकी बजह से रुके हुए हैं। गुलवीर ने कहा जब कोई व्यक्ति संस्था नहीं चला सकता तो जनता के समय को क्यों बर्बाद कर रहें हैं,क्यों चुनाव लड़े महापौर। गुलवीर ने आरोप लगाया 3 साल के कार्यकाल में इन्होंने एक रुपए का काम करके नहीं दिया,रूठते रहे। गुलवीर चौधरी ने कहा मेयर ने काम नहीं किया इसलिए आत्मा रो रही है।

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