काशी में Gen-Z से संवाद करेंगे संत:सनातन धर्म और राष्ट्रीय एकता पर होगी बात, संस्कृति संसद का आज दूसरा दिन

Nov 04, 2026 - 06:56
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काशी में Gen-Z से संवाद करेंगे संत:सनातन धर्म और राष्ट्रीय एकता पर होगी बात, संस्कृति संसद का आज दूसरा दिन
वाराणसी के सिगरा स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में तीन दिवसीय ‘संस्कृति संसद-2026’ का आज बुधवार को दूसरा दिन है। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे से होगी। दूसरे दिन देशभर से जुटे संत-महात्मा और विद्वान विभिन्न समसामयिक विषयों पर अपने विचार रखेंगे। सनातन धर्म और संस्कृति की चुनौतियों, धार्मिक स्वतंत्रता, राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहेंगे। संस्कृति संसद के पहले दिन मंगलवार को सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती धीरेंद्र शास्त्री पर भड़क गए। उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा- भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम के बीच अंतर बताने वाले व्यक्ति से बड़ा मूर्ख और अज्ञानी शायद ही कोई होगा। शिव, कृष्ण और राम में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने कहा- किसी कथावाचक को नशे में या किसी अन्य स्थिति में ऐसी अनर्गल टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हों। देशद्रोही गतिविधियों में जो लिप्त हैं, उन्हें शूट कर देना चाहिए। शंकराचार्य ने कहा- सरकारों की हिम्मत नहीं है कि मस्जिद-चर्च ले लें। मगर हिंदुओं का मंदिर लेकर उसका धर्म हड़पना चाहते हैं। मंदिर पर सनातनियों और हिंदुओं का अधिकार होना चाहिए। दरअसल, 29 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के शिवपुरी में रामकथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था- हमारे राम सीधे हैं, तुम्हारे कृष्ण टेढ़े। तुम्हारे ठाकुरजी की खोपड़िया भी टेढ़ी, नाम भी टेढ़ा और चलते-खड़े भी टेढ़े होते हैं। हालांकि, मामले में विवाद के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान पर माफी भी मांगी थी। संत बोले- सनातन धर्म के खिलाफ संघर्ष का अखाड़ा दिल्ली बनी है अखिल भारतीय संत समिति एवं गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि वर्तमान में अनेक षड्यंत्र हो रहे हैं। इस समय भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के खिलाफ संघर्ष का अखाड़ा दिल्ली बन गई है। कुछ व्यक्ति और संगठन लोकतंत्र में जनता नहीं जंतर-मंतर के रास्ते सत्ता बदलने का कुचक्र कर रहे हैं। यह सब इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें सनातन और संस्कृति की रक्षा के लिए काम करने वाली सरकार अच्छी नहीं लग रही है। उन्होंने कहा कि संतों को इस सच्चाई को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि Gen-Z के नाम पर युवकों को बांटने का काम हमारे समाज के अनुरूप नहीं है। संत समाज भारतीय युवकों से निवेदन करता है कि वे समाज और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दें।

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