टांडा एमसीएच विंग निजी हाथों में सौंपने की तैयारी:मरीजों को मिलेंगी विशेषज्ञ और सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं, 30 साल निजी हाथों में रहेगा संचालन
अम्बेडकरनगर में टांडा स्थित 200 शैय्या मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग के संचालन की जिम्मेदारी निजी भागीदार को सौंपने की तैयारी है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत अस्पताल में विशेषज्ञ और सुपरस्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। योजना लागू होने पर जिले के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लखनऊ समेत दूसरे बड़े शहरों की दौड़ लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में 200 या इससे अधिक बेड वाले चार अस्पतालों को इस मॉडल पर संचालित करने का प्रस्ताव है, जिनमें अम्बेडकरनगर का एमसीएच विंग भी शामिल है। प्रस्ताव के तहत अस्पताल में जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, अस्थि रोग, बाल रोग, नेत्र रोग, ईएनटी, त्वचा रोग, दंत शल्य चिकित्सा, मनोरोग, आपातकालीन एवं ट्रॉमा तथा क्रिटिकल केयर और एनेस्थीसियोलॉजी समेत 12 विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा हृदय रोग, न्यूरोलॉजी और यूरोलॉजी अथवा नेफ्रोलॉजी जैसी कम से कम तीन सुपरस्पेशियलिटी सेवाएं भी शुरू करने का प्रस्ताव है। केजीएमयू की दरों पर जांच, आयुष्मान से कैशलेस इलाज मरीजों को किफायती इलाज उपलब्ध कराने के लिए ओपीडी और जांच सेवाओं की दरें केजीएमयू लखनऊ के निर्धारित शुल्क के अनुसार रखने का प्रस्ताव है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के पात्र लाभार्थियों को नियमानुसार कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। सस्ती दवाओं की उपलब्धता के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी संचालित करने की योजना है। इसके अलावा ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य पर कम से कम 25 प्रतिशत छूट देने का भी प्रस्ताव है। अस्पताल में ओपीडी, आईपीडी, 24 घंटे आपातकालीन एवं ट्रॉमा सेवाएं, ऑपरेशन, पैथोलॉजी, एक्स-रे और अन्य इमेजिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने के लिए चयनित संचालक को 24 महीने के भीतर नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स (एनएबीएच) की पूर्ण मान्यता प्राप्त करनी होगी।
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