उद्धव गुट ने दिखाई एकजुटता, 'ऑपरेशन टाइगर' पर सियासत तेज

महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चाओं के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मातोश्री पर पार्टी सांसदों की अहम बैठक बुलाई। बैठक के बाद पार्टी नेताओं ने दावा किया कि सभी नौ सांसद एकजुट हैं और पार्टी छोड़ने की अटकलों में कोई सच्चाई नहीं है।

उद्धव गुट ने दिखाई एकजुटता, 'ऑपरेशन टाइगर' पर सियासत तेज

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 15 जून 2026

ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं के बीच मातोश्री पर मंथन

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अटकलें लगाई जा रही थीं कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के संपर्क में हैं और पार्टी में टूट की संभावना बन सकती है। इन खबरों के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को अपने आवास 'मातोश्री' पर पार्टी सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। बैठक का मुख्य उद्देश्य पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देना और फैल रही राजनीतिक अटकलों पर विराम लगाना माना जा रहा है। बैठक के बाद पार्टी नेताओं ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) पूरी तरह एकजुट है और किसी भी सांसद के पार्टी छोड़ने की खबरें निराधार हैं।

चार सांसद पहुंचे मातोश्री, पांच ऑनलाइन जुड़े

बैठक में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, राजाभाऊ वाजे, संजय दीना पाटिल और राज्यसभा सांसद अनिल देसाई सीधे मातोश्री पहुंचे। वहीं पांच अन्य सांसद विभिन्न व्यक्तिगत कारणों से ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए। संजय देशमुख अपनी बेटी के विवाह समारोह में व्यस्त होने के कारण ऑनलाइन जुड़े। भाऊसाहेब वाकचौरे अपनी पत्नी की बीमारी की वजह से बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके। ओमराजे निंबालकर ने अपने बेटे की तबीयत खराब होने की जानकारी पहले ही पार्टी नेतृत्व को दे दी थी। नागेश पाटिल अष्टीकर विधान परिषद चुनाव की जिम्मेदारियों में व्यस्त थे, इसलिए उन्होंने भी ऑनलाइन भागीदारी की।

संजय जाधव की अनुपस्थिति से बढ़ीं चर्चाएं

बैठक में परभणी के सांसद संजय जाधव की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे संभावित असंतोष से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। हालांकि बैठक के बाद संजय राउत ने स्पष्ट किया कि संजय जाधव की उद्धव ठाकरे से फोन पर बातचीत हो चुकी है और अगले दो दिनों में वे व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात करेंगे। राउत ने कहा कि इसे किसी राजनीतिक संकट या असंतोष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

सभी नौ सांसद हमारे साथ हैं: संजय राउत

बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि पार्टी के सभी नौ सांसद बैठक का हिस्सा बने। कुछ सांसद शारीरिक रूप से मौजूद थे जबकि अन्य तकनीकी माध्यम से जुड़े। उन्होंने कहा कि यह एक सामान्य संगठनात्मक बैठक थी, जैसी पार्टी समय-समय पर अपने जनप्रतिनिधियों के साथ करती रहती है। राउत ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) पूरी तरह मजबूत और संगठित है तथा पार्टी में किसी तरह का संकट नहीं है।

ऑपरेशन टाइगर पर राउत का पलटवार

ऑपरेशन टाइगर को लेकर उठ रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि पिछले दो वर्षों से इसी तरह की अफवाहें फैलती रही हैं, लेकिन आज तक कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की खबरें केवल राजनीतिक माहौल बनाने और दबाव की राजनीति करने के लिए फैलाई जाती हैं। राउत ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि कोई ऑपरेशन टाइगर चला रहा है तो शिवसेना (यूबीटी) भी उसका जवाब 'ऑपरेशन फॉक्स' से देना जानती है।

शिंदे गुट ने भी किया खंडन

दूसरी ओर शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने भी ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं को खारिज किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है और इन खबरों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। हालांकि शिरसाट ने यह जरूर कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के कई नेता और जनप्रतिनिधि एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी नेता के पार्टी बदलने को लेकर अंतिम निर्णय एकनाथ शिंदे ही करेंगे।

शिवसेना विभाजन के बाद जारी है सियासी संघर्ष

साल 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद से उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट के बीच राजनीतिक संघर्ष लगातार जारी है। दोनों पक्ष संगठन, जनाधार और निर्वाचित प्रतिनिधियों पर अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में हर छोटे घटनाक्रम को दोनों गुटों की ताकत और कमजोरी के नजरिए से देखा जाता है। यही वजह है कि मातोश्री में हुई इस बैठक को भी सामान्य संगठनात्मक कार्यक्रम से कहीं अधिक महत्व दिया जा रहा है।

आगे क्या होगा

फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व यह संदेश देने में सफल दिखाई दे रहा है कि उसके सांसद एकजुट हैं। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में बदलते समीकरणों और लगातार चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच आने वाले दिनों में दोनों शिवसेना गुटों की गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी। ऑपरेशन टाइगर की चर्चाएं भले ही खारिज कर दी गई हों, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अटकलों का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा है।