भारत की अधिकांश कंपनियों को नहीं मिलेगा पावरफुल एआई मॉडल

अमेरिका ने एंथ्रोपिक के अत्याधुनिक एआई मॉडल मिथोस 5 पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है। अब चुनिंदा अमेरिकी संस्थाओं और कंपनियों को इसका उपयोग करने की अनुमति मिलेगी। हालांकि भारत सहित कई देशों की अधिकांश कंपनियां अभी भी इस शक्तिशाली एआई मॉडल तक पहुंच नहीं बना सकेंगी। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील तकनीकों के नियंत्रण से जुड़ा माना जा रहा है।

भारत की अधिकांश कंपनियों को नहीं मिलेगा पावरफुल एआई मॉडल

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 29 जून 2026

एंथ्रोपिक को मिली आंशिक राहत

अमेरिकी सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एंथ्रोपिक को उसके अत्याधुनिक एआई मॉडल ‘मिथोस 5’ को लेकर बड़ी राहत दी है। नए आदेश के तहत कंपनी को कुछ चुनिंदा संस्थाओं को इस मॉडल की सेवा देने की अनुमति मिल गई है।हालांकि यह राहत सीमित दायरे में दी गई है और मॉडल को अभी भी सामान्य वैश्विक उपयोग के लिए पूरी तरह नहीं खोला गया है।


पहले लगाया गया था सख्त प्रतिबंध

कुछ सप्ताह पहले अमेरिकी प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए एंथ्रोपिक को अपने सबसे उन्नत एआई मॉडल ‘मिथोस 5’ और ‘फेबल 5’ की पहुंच अमेरिका के बाहर सीमित करने का निर्देश दिया था।सरकार का तर्क था कि अत्यधिक शक्तिशाली एआई तकनीक का इस्तेमाल अमेरिका के विरोधी देशों या संगठनों द्वारा सुरक्षा चुनौतियां पैदा करने के लिए किया जा सकता है।


किन संस्थाओं को मिलेगी अनुमति

नए आदेश के अनुसार केवल वे संस्थाएं और कंपनियां मिथोस 5 का उपयोग कर सकेंगी जिन्हें अमेरिकी सरकार की मंजूरी प्राप्त है।इनमें मुख्य रूप से वे संगठन शामिल हैं जो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े संचालन में कार्यरत हैं।सरकार द्वारा स्वीकृत सूची के बाहर की कंपनियों को अभी भी इस मॉडल तक पहुंच नहीं मिलेगी।


100 से अधिक संस्थानों को होगा लाभ

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के 100 से अधिक संस्थानों और कंपनियों को मिथोस 5 का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी।इनमें कई बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां और फॉर्च्यून 500 सूची में शामिल प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। इससे अमेरिकी उद्योगों को उन्नत साइबर सुरक्षा और तकनीकी अनुसंधान में लाभ मिलेगा।


विदेशी कर्मचारियों को भी मिली राहत

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण नियम में भी बदलाव किया है।पहले स्वीकृत अमेरिकी संस्थाओं को अपने गैर-अमेरिकी कर्मचारियों द्वारा मिथोस 5 के उपयोग के लिए अलग निर्यात लाइसेंस लेना पड़ता था। अब यह शर्त हटा दी गई है।इस बदलाव के बाद एंथ्रोपिक और अन्य स्वीकृत संस्थाओं में कार्यरत विदेशी कर्मचारी भी बिना अतिरिक्त अनुमति के इस मॉडल का उपयोग कर सकेंगे।


भारत की कंपनियां अब भी दायरे से बाहर

हालांकि अमेरिका द्वारा नियमों में ढील दिए जाने के बावजूद भारत सहित अनेक देशों की अधिकांश कंपनियां अभी भी मिथोस 5 तक पहुंच प्राप्त नहीं कर पाएंगी।सरकार की स्वीकृत सूची में शामिल न होने वाली विदेशी कंपनियों पर निर्यात और लाइसेंस संबंधी प्रतिबंध पहले की तरह लागू रहेंगे।इसका अर्थ है कि भारतीय तकनीकी कंपनियों को फिलहाल इस अत्याधुनिक एआई प्लेटफॉर्म का लाभ नहीं मिलेगा।


क्या है मिथोस 5

मिथोस 5 एंथ्रोपिक का एक अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा और विश्लेषण आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल माना जाता है।कंपनी का दावा है कि यह जटिल सॉफ्टवेयर प्रणालियों में कमजोरियों की पहचान करने, साइबर खतरों का विश्लेषण करने और सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने में सक्षम है।इसी क्षमता के कारण इसे अत्यधिक शक्तिशाली एआई प्रणालियों की श्रेणी में रखा जाता है।


सुरक्षा एजेंसियों को क्यों है चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीकें जहां सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकती हैं, वहीं गलत हाथों में पड़ने पर बड़े साइबर हमलों का माध्यम भी बन सकती हैं।विशेष रूप से बैंकिंग, ऊर्जा, संचार और सरकारी नेटवर्क जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इस प्रकार की तकनीक का दुरुपयोग गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।यही वजह है कि अमेरिकी प्रशासन इसके उपयोग को नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ा रहा है।


भविष्य में बढ़ सकती है उपलब्धता

एंथ्रोपिक ने कहा है कि वह अमेरिकी सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि भविष्य में मिथोस 5 और फेबल 5 जैसे मॉडलों की उपलब्धता को और व्यापक बनाया जा सके।कंपनी का लक्ष्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करते हुए अधिक देशों और संस्थाओं तक अपनी सेवाएं पहुंचाना है।फिलहाल अमेरिकी सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि जोखिमों को नियंत्रित किया जाता है तो आने वाले समय में इन मॉडलों की पहुंच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।