गलवान वाले चीनी जनरल झाओ जोंगकी पर शी का बड़ा फैसला
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जनरल झाओ जोंगकी को महत्वपूर्ण राजनीतिक और सैन्य पदों से हटा दिया है। झाओ डोकलाम गतिरोध और वर्ष 2020 की गलवान घाटी झड़प के दौरान चीन की पश्चिमी सैन्य कमान के प्रमुख थे। गलवान कार्रवाई को मंजूरी देने को लेकर भी उनका नाम अमेरिकी खुफिया आकलन के हवाले से सामने आया था।
दि राइजिंग न्यूज | बीजिंग | 29 अगस्त 2026
चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में सेना से जुड़े बड़े बदलाव का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में जनरल झाओ जोंगकी को चीनी राजनीतिक सलाहकार संस्था के शीर्ष पद से हटा दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें दो अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से भी मुक्त कर दिया गया है।झाओ जोंगकी का नाम भारत-चीन सीमा विवाद के कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है। वह उस समय चीन की पश्चिमी सैन्य कमान का नेतृत्व कर रहे थे, जब डोकलाम में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आए थे। इसके बाद वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ने के दौरान भी वह इसी सैन्य कमान के प्रमुख थे।
गलवान संघर्ष से पहले क्या भूमिका थी
वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव बढ़ गया था। इसके बाद दोनों देशों के सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा के कई इलाकों में आमने-सामने आ गए थे। जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी।15 जून 2020 को हुई इस झड़प में भारत के 20 सैनिक बलिदान हुए थे। इस घटना के बाद भारत और चीन के संबंधों में लंबे समय तक तनाव बना रहा। सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ने के साथ दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत भी हुई।
झाओ पर गलवान कार्रवाई की मंजूरी देने का आरोप
जनरल झाओ जोंगकी पर गलवान संघर्ष से पहले भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को मंजूरी देने का आरोप भी लगाया जाता रहा है। समाचार रिपोर्टों में वर्ष 2020 के अमेरिकी खुफिया आकलन का हवाला देते हुए दावा किया गया था कि झाओ ने भारत को जवाब देने के लिए गलवान में कार्रवाई की अनुमति दी थी।हालांकि, इस दावे को उसी रूप में आरोप और खुफिया आकलन के तौर पर देखा जाना चाहिए। गलवान संघर्ष को लेकर भारत और चीन के बीच घटनाओं की व्याख्या अलग-अलग रही है। इसके बावजूद झाओ की उस समय की सैन्य भूमिका के कारण उनका नाम इस पूरे घटनाक्रम से लगातार जुड़ा रहा।
डोकलाम के दौरान भी संभाल रहे थे कमान
वर्ष 2017 में डोकलाम क्षेत्र में भारत और चीन के सैनिकों के बीच लगभग 72 दिनों तक गतिरोध चला था। उस समय भी झाओ जोंगकी चीन की पश्चिमी सैन्य कमान के प्रमुख पद पर थे। यह क्षेत्र भारत, चीन और भूटान की सीमाओं के निकट होने के कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।डोकलाम विवाद के बाद भारत और चीन के बीच सीमा सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा था। इसके कुछ वर्षों बाद पूर्वी लद्दाख में भी दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आईं। ऐसे में झाओ का कार्यकाल भारत-चीन सीमा पर चीन की सैन्य गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
पश्चिमी सैन्य कमान क्यों महत्वपूर्ण है
चीन की पश्चिमी सैन्य कमान तिब्बत और शिनजियांग सहित भारत से लगती चीन की सीमा के बड़े हिस्से की सैन्य गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालती है। इस क्षेत्र में चीन की सैन्य तैनाती, सीमा सुरक्षा और रणनीतिक अभियानों को लेकर इस कमान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की सैन्य गतिविधियों को समझने में भी पश्चिमी सैन्य कमान का नाम प्रमुखता से सामने आता है। झाओ जोंगकी इसी कमान का नेतृत्व ऐसे समय कर रहे थे, जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लगातार गंभीर होता जा रहा था।
राजनीतिक सलाहकार संस्था से भी हटाया गया
झाओ जोंगकी को चीन की राजनीतिक सलाहकार संस्था की सदस्यता से भी हटा दिया गया है। इसके अलावा उन्हें दो अन्य पदों से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। यह घटनाक्रम चीन की सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था में चल रहे बड़े स्तर के बदलावों के बीच हुआ है।
शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन की सेना में अनुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लंबे समय से जारी है। इससे पहले भी कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाया जा चुका है। ऐसे में झाओ जोंगकी को हटाए जाने के फैसले को भी चीन की सैन्य व्यवस्था में जारी पुनर्गठन के संदर्भ में देखा जा रहा है।
शी जिनपिंग के लिए क्यों अहम है यह बदलाव
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले कुछ वर्षों में सेना पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और नेतृत्व में फेरबदल इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माने जाते हैं। सेना में अनुशासन और राजनीतिक निष्ठा को शी जिनपिंग लगातार प्राथमिकता देते रहे हैं।झाओ जोंगकी का हटाया जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह चीन की सेना के उन वरिष्ठ अधिकारियों में रहे हैं जिनका भारत से जुड़े सीमा विवादों के दौरान महत्वपूर्ण सैन्य दायित्व था। अब उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है और उनकी जगह किन अधिकारियों को जिम्मेदारी मिलती है, इस पर भी नजर रहेगी।
भारत के लिए क्या मायने हैं
झाओ जोंगकी को हटाए जाने की खबर ऐसे समय आई है, जब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम करने और संबंधों में सुधार की कोशिशें जारी रही हैं। गलवान के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई और सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव कम करने के प्रयास किए गए।ऐसे में भारत से जुड़े सैन्य अभियानों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके चीनी जनरल को हटाया जाना रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि, केवल इस फैसले के आधार पर भारत-चीन संबंधों में किसी बड़े बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।
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