खरगे का ज्ञानेश कुमार पर हमला, भाजपा बोली- पहली वोट चोरी नेहरू ने की थी!
मल्लिकार्जुन खरगे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन-महाभियोग प्रस्ताव पेश कर चुनाव आयोग और एसआईआर पर सवाल उठाए। भाजपा ने पलटवार करते हुए नेहरू पर वोट चोरी का आरोप लगाया।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इंडिया गठबंधन की मॉक संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन-महाभियोग’ प्रस्ताव पेश किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश में मतदान का अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे में है। खरगे ने कहा कि विपक्ष का चुनाव आयुक्त से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है, बल्कि उसकी मांग निष्पक्ष चुनाव और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने चुनावी बॉन्ड, सांसदों के निलंबन और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए महाराष्ट्र में लगभग 40 लाख नए नाम जुड़ने और विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल खड़े किए। उन्होंने चुनाव आयोग से पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
खरगे ने आरोप लगाया कि कर्नाटक और महाराष्ट्र में मतदाता सूची को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और विपक्ष की ओर से कई बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद चुनाव आयोग ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष मृत या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने के खिलाफ नहीं है, बल्कि वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने का विरोध कर रहा है। खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, वर्ष 2023 के चुनाव आयुक्त संबंधी कानून को रद्द करने और एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने प्रत्येक वयस्क नागरिक को मतदान का समान अधिकार दिया था और इसकी रक्षा के लिए विपक्ष हर संभव प्रयास करेगा।
दूसरी ओर, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने खरगे के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि देश में पहली वोट चोरी पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। उन्होंने दावा किया कि सरदार वल्लभभाई पटेल के पक्ष में अधिक समर्थन होने के बावजूद नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने। भाजपा ने कांग्रेस के लोकतंत्र और मतदान अधिकारों से जुड़े आरोपों पर सवाल उठाए। इस तरह खरगे के जन-महाभियोग प्रस्ताव के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। हालांकि, यह प्रस्ताव इंडिया गठबंधन की मॉक संसद में पेश किया गया प्रतीकात्मक प्रस्ताव है, न कि संसद में होने वाली औपचारिक महाभियोग प्रक्रिया।
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