तिब्बत में भूकंप से 16 की मौत, 46 घायल
दि राइजिंग न्यूज़ | तिब्बत | 23 अक्टूबर 2026
तिब्बत में गुरुवार रात आए भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। तेज झटकों के कारण कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों को अपने घरों से बाहर निकलना पड़ा। समाचार में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 46 लोग घायल हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।
चार घंटे में 13 बार कांपी धरती
तिब्बत में गुरुवार रात भूकंप के कई झटके महसूस किए गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लगभग चार घंटे के दौरान कुल 13 बार धरती कांपी, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। शुरुआती झटके के बाद भी कई बार कंपन महसूस होने से लोगों की चिंता बढ़ गई। तिब्बत के अलावा चीन के कुछ क्षेत्रों में भी भूकंप के झटके महसूस किए जाने की खबर है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी झटके महसूस होने की जानकारी सामने आई है।
16 लोगों की मौत, 46 घायल
भूकंप के कारण जान-माल का भारी नुकसान होने की खबर है। समाचार में दी गई जानकारी के मुताबिक, अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 46 लोग घायल हुए हैं। कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है और कुछ मकान पूरी तरह ढह गए हैं। मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
राहत और बचाव अभियान तेज
भूकंप के बाद प्रभावित क्षेत्र में आपातकालीन व्यवस्था लागू कर दी गई है। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 300 से अधिक पुलिसकर्मियों और 347 बचावकर्मियों को तैनात किया है। प्रभावित बाछेन काउंटी में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है, ताकि जरूरतमंद लोगों को भोजन और अन्य जरूरी सहायता मिल सके। जिन लोगों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालना और घायलों को उपचार उपलब्ध कराना है।
कहां था भूकंप का केंद्र
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप भारतीय समय के मुताबिक रात लगभग 8 बजकर 3 मिनट पर आया था। उपलब्ध विवरण में इसका केंद्र तिब्बत के नागकू नगर क्षेत्र में बताया गया है, जो राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर है। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 173 किलोमीटर की गहराई में होने की जानकारी दी गई है। भूकंप की गहराई और उसकी तीव्रता के आधार पर इसके प्रभाव का आकलन किया जाता है। हालांकि, इस घटना से संबंधित अंतिम आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
तिब्बत में क्यों आते हैं भूकंप
तिब्बती पठार को भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाता है। इसकी प्रमुख वजह भारतीय और यूरेशियाई भूगर्भीय प्लेटों के बीच लगातार होने वाली हलचल है। इन प्लेटों के आपस में टकराने और दबाव उत्पन्न होने से धरती के भीतर ऊर्जा जमा होती है। जब यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, तो भूकंप के झटके महसूस होते हैं। इसी कारण हिमालय और उसके आसपास के कई क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं।
सैकड़ों मकान ढहने की खबर
भूकंप के बाद सामने आई मीडिया रिपोर्टों में कम से कम 339 मकानों के ढहने की जानकारी दी गई है। मकानों के क्षतिग्रस्त होने से कई परिवारों के सामने रहने और जरूरी सुविधाओं की समस्या खड़ी हो गई है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और क्षतिग्रस्त इमारतों का आकलन किया जा रहा है। नुकसान की वास्तविक स्थिति राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, तिब्बती पठार और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से बदलती जलवायु पर्यावरणीय जोखिमों को बढ़ा सकती है। बढ़ते तापमान, हिमनदों के पिघलने और चरम मौसमी घटनाओं के कारण इस क्षेत्र में बाढ़, भूस्खलन तथा अन्य प्राकृतिक खतरों की आशंका बढ़ सकती है। हालांकि, किसी विशेष भूकंप को सीधे जलवायु परिवर्तन का परिणाम मानने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक होते हैं। फिलहाल तिब्बत में भूकंप से प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाना और नुकसान का आकलन करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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