सऊदी अरब में नजरुल और स्वीटी को मौत की सजा क्यों? नौ दिन बाद भी अनसुलझे सवाल

सऊदी अरब में बांग्लादेशी नागरिक नजरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर को मौत की सजा दिए जाने के मामले में नौ दिन बाद भी कई सवाल बने हुए हैं। परिवारों को सजा की प्रक्रिया और शवों के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने की खबर है। बांग्लादेश सरकार ने सऊदी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। माथे पर चुंबन देने के कारण सजा मिलने का दावा अब तक आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है।

Oct 23, 2026 - 14:17
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सऊदी अरब में नजरुल और स्वीटी को मौत की सजा क्यों? नौ दिन बाद भी अनसुलझे सवाल

 दि राइजिंग न्यूज़ | सऊदी अरब | 23 अक्टूबर 2026

सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों, नजरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर को मौत की सजा दिए जाने का मामला लगातार चर्चा में है। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, दोनों को 14 अक्टूबर 2026 को सजा दी गई थी। सऊदी अधिकारियों ने आरोप को मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन करने वाली अनैतिक गतिविधि से जुड़ा बताया, लेकिन कथित अपराध की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की। घटना के नौ दिन बाद भी दोनों परिवारों को सजा के तरीके और शवों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने की बात सामने आई है।

सऊदी सरकार ने आधिकारिक तौर पर क्या बताया?

सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने सरकारी समाचार एजेंसी के माध्यम से नजरुल इस्लाम अब्दुल बसीर और स्वीटी अख्तर के नाम जारी किए। मंत्रालय के अनुसार, अदालत ने आरोप साबित होने के बाद दोनों को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे संबंधित अधिकारियों की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया गया। हालांकि, अधिकारियों ने कथित अपराध का विस्तृत विवरण और सजा देने का तरीका सार्वजनिक नहीं किया। इसी वजह से मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं और परिवार आधिकारिक जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

बांग्लादेश सरकार ने सऊदी अरब से मांगा जवाब

इस मामले में बांग्लादेश सरकार ने सऊदी अरब से स्पष्टीकरण मांगा है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने सजा से पहले जानकारी नहीं मिलने पर निराशा जताई है। जेद्दा स्थित बांग्लादेशी वाणिज्य दूतावास ने भी सऊदी अधिकारियों को पत्र भेजकर दोनों नागरिकों के मामले और सजा की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी है। बांग्लादेश सरकार के अनुसार, उसे सजा से पहले इसकी सूचना नहीं दी गई थी।

स्वीटी का परिवार नौ दिन से परेशान

बांग्लादेश के तांगाइल जिले के मिर्जापुर क्षेत्र के नगर छावली गांव की रहने वाली स्वीटी अख्तर के परिवार की चिंता लगातार बढ़ रही है। उसके पिता फजल मिया के अनुसार, उन्होंने अपनी बेटी से आखिरी बार 13 अक्टूबर को फोन पर बात की थी। बातचीत के दौरान स्वीटी ने न तो मुकदमे की जानकारी दी और न ही मौत की सजा मिलने की बात बताई। परिवार का कहना है कि उन्हें बेटी के बारे में स्पष्ट सूचना नहीं मिली है और वे सरकारी स्तर पर पुष्टि चाहते हैं।

कर्ज लेकर स्वीटी को भेजा गया था सऊदी अरब

समाचार रिपोर्टों के अनुसार, स्वीटी के पिता ने लगभग चार साल पहले डेढ़ लाख रुपये उधार लेकर उसे रोजगार के लिए सऊदी अरब भेजा था। शुरुआत में स्वीटी परिवार को पैसे भेजती थी, लेकिन कुछ समय बाद उसने बताया कि कार्यस्थल पर दूसरी महिलाओं के साथ विवाद के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। उसके परिवार के मुताबिक, स्वीटी को उम्मीद थी कि वह कुछ महीनों में रिहा हो जाएगी। परिवार ने बताया कि स्वीटी तलाकशुदा थी और उसकी चार साल की बेटी अपनी मौसी के पास रह रही है।

नजरुल के परिवार ने भी जताई अनजान होने की बात

नजरुल इस्लाम बांग्लादेश के ब्राह्मणबाड़िया जिले के बीरामपुर गांव का रहने वाला था। उसके पिता अब्दुल बसीर ने आर्थिक कठिनाइयों के बीच लगभग छह लाख रुपये उधार लेकर 2022 में उसे रोजगार के लिए सऊदी अरब भेजा था। नजरुल मक्का की ग्रैंड मस्जिद में सफाईकर्मी के रूप में काम करता था। परिवार के अनुसार, सऊदी पुलिस ने उसे कुछ महीनों बाद गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन उसके परिजनों को गिरफ्तारी और आरोपों की जानकारी काफी देर से मिली।

नजरुल की मां ने शादी की खबरों को नकारा

नजरुल की मां रहीमा बेगम ने समाचार रिपोर्टों में दावा किया कि उनका बेटा अविवाहित था और परिवार स्वीटी अख्तर को नहीं जानता था। उन्होंने कहा कि यदि नजरुल ने शादी की होती, तो परिवार को इसकी जानकारी अवश्य होती। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर दोनों को नवविवाहित जोड़ा बताने वाली खबरों पर सवाल उठने लगे। हालांकि, दोनों के बीच किसी संबंध की वास्तविक स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

क्या माथे पर चुंबन देने के कारण मिली मौत की सजा

इस मामले को लेकर सामाजिक माध्यमों पर यह दावा फैल गया कि नजरुल और स्वीटी को मक्का की मस्जिद में माथे पर चुंबन देने के कारण मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी इस दावे की पुष्टि नहीं करती। सऊदी अधिकारियों ने कथित अपराध को अनैतिक गतिविधि बताया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि वास्तव में क्या हुआ था। इसलिए माथे पर चुंबन वाली कहानी को प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

सजा देने के तरीके पर भी बना हुआ है सवाल

सऊदी अधिकारियों ने मौत की सजा लागू किए जाने की जानकारी दी, लेकिन सार्वजनिक बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि सजा किस तरीके से दी गई। इसी वजह से यह सवाल बना हुआ है कि दोनों को किस प्रक्रिया के तहत मौत की सजा दी गई। परिवारों का कहना है कि उन्हें अब तक पर्याप्त जानकारी नहीं मिली है। इस मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए आधिकारिक दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों के स्पष्ट जवाब की आवश्यकता है।

ताजीर कानून को लेकर क्यों उठ रहे सवाल

समाचार रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अधिकारियों ने इस मामले में ताजीर का उल्लेख किया है। इस्लामी न्याय व्यवस्था में ताजीर उन दंडों से जुड़ा है जिनका निर्धारण कुछ मामलों में न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करता है। इस मामले में आलोचकों ने सवाल उठाया है कि कथित अपराध के लिए मौत की सजा का आधार क्या था और अदालत ने किन साक्ष्यों पर भरोसा किया। हालांकि, किसी विशिष्ट मामले की कानूनी वैधता पर निष्कर्ष निकालने के लिए फैसले और कानूनी प्रक्रिया का पूरा विवरण जरूरी है।

क्या दोनों परिवारों को शव सौंपे गए

इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू दोनों परिवारों को शवों और अंतिम संस्कार से जुड़ी जानकारी नहीं मिलना है। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, सजा के नौ दिन बाद तक परिवार शवों की वापसी और आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा कर रहे थे। नजरुल के पिता ने अपने बेटे के शव को वापस लाने की मांग की है, ताकि वह अंतिम बार उसका चेहरा देख सकें। हालांकि, शवों की वर्तमान स्थिति के बारे में अंतिम जानकारी के लिए संबंधित अधिकारियों की पुष्टि आवश्यक है।

प्रवासी कामगारों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल

यह मामला विदेशों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों की कानूनी सहायता और दूतावासों की भूमिका पर भी सवाल खड़े करता है। दूसरे देश में गिरफ्तार होने पर भाषा की कठिनाई, कानूनी प्रतिनिधित्व की कमी और परिवार से संपर्क की सीमाएं गंभीर समस्या बन सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर जानकारी और उचित कानूनी सहायता बेहद महत्वपूर्ण होती है। नजरुल और स्वीटी के मामले में भी परिवारों की मांग है कि उन्हें आरोपों, सुनवाई और सजा से जुड़ी पूरी जानकारी दी जाए।

मामले में अब तक क्या स्पष्ट है

अब तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अधिकारियों ने दोनों को मौत की सजा दिए जाने की जानकारी दी है और बांग्लादेश सरकार ने मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। दूसरी ओर, परिवारों के बयान सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों से अलग तस्वीर पेश करते हैं। कथित अपराध का विस्तृत विवरण, दोनों के बीच संबंध और सजा देने के तरीके जैसे सवालों पर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। इसलिए अपुष्ट दावों को तथ्य मानने के बजाय आधिकारिक जानकारी की प्रतीक्षा करना जरूरी है।

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