12 साल में लोकतंत्र को नुकसान! सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला
सोनिया गांधी ने भाजपा सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने विपक्षी एकता, कांग्रेस की राजनीतिक संभावनाओं और भाजपा-आरएसएस के साथ समझौता नहीं करने के पार्टी के रुख पर भी अपनी बात रखी।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 7 नवंबर 2026
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतांत्रिक ढांचे, संवैधानिक संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अब आम लोगों को भी इस नुकसान का एहसास होने लगा है और मौजूदा परिस्थितियों को लेकर उनकी बेचैनी बढ़ रही है। सोनिया गांधी ने उम्मीद जताई कि सरकार बदलने के बाद देश में सुशासन की वापसी होगी, हालांकि लोकतांत्रिक संस्थाओं को दोबारा मजबूत बनाने में समय लगेगा।
अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' को दिए साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने विपक्षी एकजुटता को लेकर कहा कि कांग्रेस समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर काम कर रही है और पार्टी की राजनीतिक संभावनाएं लगातार बेहतर हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में विपक्ष को चुनाव लड़ने के लिए समान अवसर नहीं मिल रहे हैं। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग और मुख्यधारा का मीडिया सरकार के प्रभाव में है। उन्होंने धनबल और धर्म के इस्तेमाल से चुनावी मुकाबले को प्रभावित किए जाने का भी आरोप लगाया।
भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ राजनीतिक समझौते के सवाल पर सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने कभी इन संगठनों के साथ समझौता नहीं किया और भविष्य में भी ऐसा नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों में कभी-कभी अलग विचारधारा वाले दलों के साथ भी काम करना पड़ता है, लेकिन भाजपा और आरएसएस के मामले में कांग्रेस का रुख स्पष्ट है। उन्होंने 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले पर भी कहा कि उन्हें इसका कभी पछतावा नहीं हुआ। उस समय उन्होंने मनमोहन सिंह के साथ अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हुए एक टीम की तरह काम किया था।
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