"पहले टारगेट लॉक, फिर तबाही" — पाकिस्तान में भारत की इज़रायली-स्टाइल एयरस्ट्राइक

दि राइजिंग न्यूज। नई दिल्ली/इस्लामाबाद। सात मई 2025।  22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। इन हमलों को “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया। यह ऑपरेशन इज़रायल की सैन्य रणनीति से प्रेरित माना जा रहा है — जिसमें दुश्मन को बिना पूर्ण युद्ध के, प्रिसिशन स्ट्राइक्स के ज़रिए कमजोर किया जाता है।

"पहले टारगेट लॉक, फिर तबाही" — पाकिस्तान में भारत की इज़रायली-स्टाइल एयरस्ट्राइक

दि राइजिंग न्यूज। नई दिल्ली/इस्लामाबाद। सात मई 2025। 

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। इन हमलों को “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया। यह ऑपरेशन इज़रायल की सैन्य रणनीति से प्रेरित माना जा रहा है — जिसमें दुश्मन को बिना पूर्ण युद्ध के, प्रिसिशन स्ट्राइक्स के ज़रिए कमजोर किया जाता है।


भारत की इज़रायली रणनीति: टारगेट लॉक, फिर क्लीन हिट

इस ऑपरेशन में भारत ने इज़रायली शैली की ‘प्रिसिशन स्ट्राइक’ तकनीक अपनाई।
जैसे इज़रायल ग़ज़ा, लेबनान और सीरिया में आतंकियों के खिलाफ खुफिया जानकारी के आधार पर सीमित लेकिन घातक हमले करता है, वैसे ही भारत ने भी पाकिस्तानी आतंकी ढांचों को बिना पारंपरिक युद्ध के पूरी तरह ध्वस्त किया।


मुख्य लक्ष्य और लोकेशन

भारत ने जिन प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया, उनमें शामिल हैं:

  • बहावलपुर (JeM का गढ़)

  • मुरीदके (LeT का मुख्यालय)

  • गुलपुर, कोटली और मुजफ्फराबाद (PoK के आतंकी ट्रेनिंग हब्स)

इन हमलों के लिए टारगेट पहले से लॉक किए गए थे, और GPS-सहायक मिसाइलों ने अचूकता के साथ इन्हें नष्ट किया।


इंटेलिजेंस और निगरानी तंत्र

भारत ने सटीक हमलों के लिए उच्च स्तरीय खुफिया और निगरानी नेटवर्क का उपयोग किया, जिसमें शामिल थे:

  • ISRO के RISAT-2BR1 सैटेलाइट

  • नेट्रा AWACS (Airborne Warning and Control System)

  • ड्रोन सर्विलांस और रियल-टाइम इंटेलिजेंस
    यह तंत्र इज़रायल के मोसाद और उनके ड्रोन्स द्वारा संचालित निगरानी नेटवर्क की तरह काम करता है।


SEAD रणनीति और HQ-9 की विफलता

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करने के लिए SEAD (Suppression of Enemy Air Defense) ऑपरेशन चलाया।

  • Kh-31P एंटी-रेडिएशन मिसाइल (Su-30 MKI से लॉन्च)

  • स्वदेशी रुद्रम-1 मिसाइल
    ने दुश्मन के रडारों को पहले ही अंधा कर दिया।

HQ-9, जिसे चीन ने पाकिस्तान को 200 किमी की रेंज के साथ दिया था, इन मिसाइलों को ट्रैक करने में विफल रहा। ब्रह्मोस और रुद्रम की स्टील्थ फ्लाइट प्रोफाइल, कम ऊँचाई की उड़ान और जैमिंग टैक्टिक्स ने HQ-9 को बेअसर बना दिया।


तकनीकी बढ़त भारत के पास क्यों थी?

  • सुपरसोनिक स्पीड: ब्रह्मोस मिसाइल ध्वनि से तीन गुना तेज़ है।

  • स्टील्थ और जैमिंग: सम्यक और शक्ति जैसे इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम ने पाकिस्तानी रडार को जाम कर दिया।

  • कम ऊंचाई की उड़ान: जिससे रडार डिटेक्शन और रिएक्शन का समय घट गया।


इज़रायली नीति की प्रतिध्वनि

भारत की यह सैन्य रणनीति स्पष्ट रूप से इज़रायल की उस नीति को दर्शाती है जिसमें "टेरर के स्पॉन्सर्स" को सीमित लेकिन प्रभावशाली सैन्य कार्रवाई से चेतावनी दी जाती है। न बड़े युद्ध, न आमने-सामने की लड़ाई — सिर्फ शून्य सहिष्णुता और सटीक हमले।


ऑपरेशन सिंदूर न सिर्फ भारत की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि यह एक संदेश है कि आतंकवाद को अब सीमा पार पनाहगाह नहीं मिलेगी। और यह रणनीति, जो इज़रायल की शैली से प्रेरित है, भारत की “नई सैन्य नीति” की शुरुआत भी हो सकती है — जहां जवाब उतना ही सटीक होगा जितना कि हमला क्रूर।