ममता बनर्जी को कलकत्ता उच्च न्यायालय से बड़ी राहत

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को बड़ी राहत देते हुए पार्टी के फ्रीज किए गए बैंक खातों को सीमित रूप से संचालित करने की अनुमति दी है। हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि खाते केवल न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की निगरानी में ही संचालित किए जाएंगे। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए सबूतों को अपर्याप्त बताया।

ममता बनर्जी को कलकत्ता उच्च न्यायालय से बड़ी राहत

दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 9 जुलाई 2026

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को बड़ी राहत देते हुए पार्टी के फ्रीज किए गए बैंक खातों को सीमित रूप से संचालित करने की अनुमति दी है। हालांकि न्यायालय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को कलकत्ता उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने पार्टी के फ्रीज किए गए बैंक खातों को सीमित रूप से संचालित करने की अनुमति प्रदान कर दी है। अदालत के इस फैसले से पार्टी को दैनिक खर्चों के संचालन में राहत मिलेगी। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह अनुमति पूरी तरह बिना शर्त नहीं है और इसके साथ कई महत्वपूर्ण नियम लागू रहेंगे।


विशेष अधिकारी की निगरानी में ही संचालित होंगे खाते

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि तृणमूल कांग्रेस अपने बैंक खातों का उपयोग केवल नियमित और आवश्यक खर्चों के लिए कर सकेगी। इसके लिए न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की निगरानी अनिवार्य होगी। खाते से होने वाले प्रत्येक लेन-देन पर विशेष अधिकारी की नजर रहेगी ताकि धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप ही किया जाए। न्यायालय ने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखना इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।


पुलिस की कार्रवाई पर अदालत ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया पर भी गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्य प्रथम दृष्टया पर्याप्त नहीं दिखाई देते। न्यायालय ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां अब तक ऐसे ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने में सफल नहीं हुई हैं जिनके आधार पर इतनी कठोर कार्रवाई को पूरी तरह उचित ठहराया जा सके। इसी कारण अदालत ने अंतरिम राहत देने का निर्णय लिया।


बागी गुट को नहीं मिलेगी खातों तक पहुंच

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जब तक चुनाव आयोग इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय नहीं देता, तब तक तृणमूल कांग्रेस का बागी गुट विशेष अधिकारी से किसी प्रकार का संपर्क नहीं करेगा। अदालत का मानना है कि इससे विवादित वित्तीय मामलों में किसी प्रकार की नई जटिलता पैदा नहीं होगी। अंतिम निर्णय आने तक वर्तमान व्यवस्था ही लागू रहेगी।


प्रवर्तन निदेशालय की जांच से जुड़ा है मामला

यह पूरा विवाद तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के मामले से जुड़ा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय ने लगभग चार सौ चालीस करोड़ रुपये से जुड़े बैंक खातों की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई स्थानों पर तलाशी अभियान भी चलाया गया, जिनमें एक निजी विमानन कंपनी का कार्यालय भी शामिल था। इसी जांच के दौरान संबंधित बैंक खातों पर डेबिट रोक लगाने की कार्रवाई की गई थी।


चुनाव के बाद पार्टी में बढ़ा राजनीतिक विवाद

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए। पार्टी के कई सांसदों ने अलग रुख अपनाया, जिसके बाद संगठन के भीतर दो गुट बनने की स्थिति पैदा हो गई। यह विवाद बाद में चुनाव आयोग तक पहुंचा, जहां दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किए गए। इसी राजनीतिक संघर्ष के बीच बैंक खातों का मामला भी कानूनी विवाद का विषय बन गया।


आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के अंतिम निर्णय और प्रवर्तन निदेशालय की जांच पर टिकी हैं। यदि जांच एजेंसियां पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं तो मामले की दिशा बदल सकती है। वहीं यदि चुनाव आयोग किसी एक पक्ष को वैध संगठन मानता है तो बैंक खातों के संचालन को लेकर स्थायी व्यवस्था तय की जाएगी। फिलहाल उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश से तृणमूल कांग्रेस को अस्थायी राहत मिल गई है।