अल नीनो के बीच मुंबई में 6 दिन में 1,240 मिमी बारिश, जानिए क्यों बदली मौसम की चाल

अल नीनो के सक्रिय रहने के बावजूद मुंबई में जुलाई के पहले सप्ताह में रिकॉर्ड 1,240 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक तापवृद्धि, अरब सागर का बढ़ता तापमान और एक साथ सक्रिय कई मौसमी प्रणालियों ने मानसून का स्वरूप बदल दिया है। हालांकि मुंबई में भारी वर्षा से मानसून की कमी कुछ घटी है, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो का असर अभी खत्म नहीं हुआ है और देश के कई हिस्सों में अब भी कम वर्षा की स्थिति बनी हुई है।

अल नीनो के बीच मुंबई में 6 दिन में 1,240 मिमी बारिश, जानिए क्यों बदली मौसम की चाल

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई  | 9 जुलाई 2026

मुंबई में जुलाई के पहले सप्ताह में हुई रिकॉर्ड वर्षा ने मौसम वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया है। आमतौर पर अल नीनो के दौरान भारत में वर्षा कम होती है, लेकिन इस बार मुंबई में छह दिनों में लगभग 1,240 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि वैश्विक तापवृद्धि, अरब सागर का बढ़ता तापमान और एक साथ सक्रिय कई मौसमी प्रणालियों ने मानसून का स्वरूप बदल दिया है


अल नीनो के बावजूद मुंबई में रिकॉर्ड वर्षा ने बढ़ाई चिंता

सामान्य परिस्थितियों में अल नीनो का असर भारत में कमजोर मानसून और कम वर्षा के रूप में देखा जाता है। इस बार स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। जून का महीना अपेक्षाकृत सूखा रहने के बाद जुलाई के पहले ही सप्ताह में मुंबई में मूसलाधार वर्षा ने कई पुराने कीर्तिमान तोड़ दिए। इससे यह प्रश्न उठने लगा है कि आखिर मौसम का मिजाज इतनी तेजी से क्यों बदल रहा है।मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अब केवल अल नीनो के आधार पर वर्षा का अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं है। जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब वर्षा वाले दिनों की संख्या कम हो रही है, लेकिन कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यही कारण है कि बाढ़ और जलभराव जैसी स्थितियां पहले की तुलना में अधिक गंभीर होती जा रही हैं।


मुंबई में छह दिनों की वर्षा ने बनाए नए कीर्तिमान

जुलाई के पहले सप्ताह में मुंबई में लगभग एक हजार दो सौ चालीस मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। यह मात्रा देश के कई बड़े शहरों की पूरे वर्ष की औसत वर्षा के बराबर मानी जा रही है। लगातार हुई मूसलाधार वर्षा के कारण शहर के अनेक हिस्सों में जनजीवन प्रभावित हुआ और कई स्थानों पर जलभराव की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई।कोलाबा और सांताक्रूज मौसम वेधशालाओं में भी सामान्य मासिक औसत के बराबर अथवा उससे अधिक वर्षा दर्ज की गई। एक ही दिन में दो सौ मिलीमीटर से अधिक वर्षा ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब मानसून का स्वरूप पहले जैसा नहीं रहा। वर्षा का वितरण लगातार असंतुलित होता जा रहा है और कम समय में अधिक पानी बरसने की घटनाएं बढ़ रही हैं।


वैश्विक तापवृद्धि ने बदल दिया मानसून का स्वरूप

विशेषज्ञों का कहना है कि पृथ्वी का बढ़ता तापमान अब मानसून को सीधे प्रभावित कर रहा है। गर्म वातावरण अपने भीतर पहले की तुलना में अधिक जलवाष्प समाहित कर सकता है। जब अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं तो यही नमी कुछ ही घंटों में अत्यधिक वर्षा के रूप में धरती पर गिरती है।इसी कारण अब वर्षा वाले दिनों की संख्या घट रही है, जबकि वर्षा की तीव्रता लगातार बढ़ती जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं। इससे बाढ़, जलभराव और सूखे जैसी चरम परिस्थितियां एक साथ देखने को मिल सकती हैं।


अरब सागर का बढ़ता तापमान बना बड़ी वजह

इस वर्ष अरब सागर का तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया है। समुद्र का तापमान बढ़ने से जल का वाष्पीकरण तेज होता है और वातावरण में अधिक नमी पहुंचती है। यही अतिरिक्त नमी मानसूनी हवाओं के साथ पश्चिमी तट तक पहुंचकर भारी वर्षा का कारण बन रही है।मौसम विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र के अधिक गर्म होने से बादलों का निर्माण तेजी से हुआ। लगातार नमी मिलने के कारण कई दिनों तक वर्षा का सिलसिला जारी रहा और मुंबई सहित आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई।


एक साथ सक्रिय हुई कई मौसमी प्रणालियां

मुंबई में हुई भारी वर्षा के पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं था। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से लगातार नमी मिल रही थी। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दाब क्षेत्र मानसून को और अधिक सक्रिय करता रहा।जब नमी से भरी हवाएं पश्चिमी घाट से टकराईं तो वे ऊपर उठीं और घने वर्षा वाले बादलों का निर्माण हुआ। इसी प्रक्रिया के कारण मुंबई तथा आसपास के क्षेत्रों में लगातार तेज वर्षा हुई और सामान्य से कई गुना अधिक पानी बरसा।


क्या अब अल नीनो का खतरा समाप्त हो गया है

मौसम विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि अल नीनो का प्रभाव अभी समाप्त नहीं हुआ है। मुंबई में हुई रिकॉर्ड वर्षा से देश में वर्षा की कमी कुछ कम अवश्य हुई है, लेकिन पूरे देश की स्थिति अभी भी समान नहीं है। कई राज्यों में अब भी सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की जा रही है। यदि जुलाई और अगस्त के दौरान अल नीनो सक्रिय बना रहा तो कई क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए केवल मुंबई की भारी वर्षा को पूरे देश के मानसून की स्थिति का संकेत नहीं माना जा सकता।


पूर्वी भारत में अब भी बनी हुई है चिंता

जहां महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है, वहीं बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका सीधा प्रभाव खेती, पेयजल की उपलब्धता और जलाशयों में जल भंडारण पर पड़ रहा है।जल विशेषज्ञों का कहना है कि देश के प्रमुख जलाशयों में अभी भी अपेक्षा से कम पानी उपलब्ध है। यदि आने वाले दिनों में संतुलित वर्षा नहीं हुई तो कृषि उत्पादन और जल आपूर्ति दोनों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।


मौसम की बदलती तस्वीर क्या संकेत दे रही है

इस वर्ष की घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि अब मानसून का स्वरूप पहले जैसा नहीं रहा। अल नीनो और जलवायु परिवर्तन मिलकर मौसम की नई परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं। कहीं कुछ ही दिनों में रिकॉर्ड वर्षा हो रही है तो कहीं लंबे समय तक सूखे जैसे हालात बने हुए हैं।भविष्य में ऐसी चरम मौसमी घटनाएं और अधिक सामान्य हो सकती हैं। इसलिए मौसम की सटीक निगरानी, जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और आपदा से निपटने की तैयारियों को पहले से अधिक मजबूत बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।